शबर

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शबर या शबर स्वामी जैमिनीकृत पूर्व मीमांसा सूत्र के भाष्यकार थे। इस पर उन्होने शबर भाष्य की रचना की। ऐसा कहा जाता है कि शबर का वास्तविक नाम 'आदित्यदेव' था किन्तु जैनों के डर से उन्होने अपने वास्तविक नाम को प्रकट नहीं होने दिया और वनवासी की तरह भेष बदलकर रहे। शबर-भाष्य पर कुमारिल भट्ट ने भाष्य लिखा है। शबर का जीवनकाल प्रथम शताब्दी (ईसवी) के आसपास हुआ था। वे पतंजलि महाभाष्य के पश्चात एवं वात्स्यायन के पूर्व उत्पन्न हुए थे।

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