शक्ति इंजीनियरी

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विद्युत उत्पादन करने वाली विद्युत जनित्र को घुमाने के लिये प्रयुक्त वाष्प टरबाइन

शक्ति इंजीनियरी (Power engineering) इंजीनियरी की वह उपक्षेत्र है जो विद्युत शक्ति के उत्पादन (जनन /generation), पारेषण (transmission), वितरण (distribution) , उपभोग (utilization) तथा इनमें प्रयुक्त जनित्रों, ट्रांसफार्मरों, पारेषण लाइनों एवं मोतरों से सम्बन्ध रखता है। इस विधा को विद्युत प्रणाली इंजीनियरी (power systems engineering) भी कहते हैं।

इतिहास[संपादित करें]

  • १८८१ - दो अंग्रेज तकनीशियनों ने इंगलैण्ड में प्रथम विद्युत उत्पादन संयंत्र बनाया जो जल-चक्र (वाटर ह्वील) से चलता था।
  • १८८२ - न्यूयॉर्क के पर्ल स्ट्रीट में एडिसन की 'एडिसन पॉवर क्म्पनी' ने वाष्प से चलने वाला विश्व का पहला शक्ति-संयंत्र (पॉवर प्लान्ट) विकसित किया। इसमें डीसी वोल्टेज का उत्पादन होता था।
  • १८८२ - लन्दन में ही लुसिन गौलार्ड और जॉन डिक्सन गिब्ब्स ने शक्ति-प्रणाली में उपयोग किये जाने योग्य प्रथम ट्रांसफार्मर का प्रदर्शन किया।
  • १८८७-८८ : निकोला टेस्ला ने शक्ति-प्रणाली से सम्बन्धित बहुत से पेटेन्ट फाइल किये।
  • १८९० तक यूरोप और अमेरिका में हजारों शक्ति-संयन्त्र लग चुके थे जिनमें कुछ एसी और कुछ डीसी उत्पन्न करते थे।

शक्ति प्रणाली के अवयव[संपादित करें]

आधुनिक शक्ति प्रणाली के मुख्यत: चार भाग होते हैं -

  • जनन (जनरेशन)
  • पारेषण (ट्रांसमिशन)
  • वितरण (डिस्ट्रिब्यूशन)
  • उपभोग (युटिलाइजेशन)

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]