वैमानिक शास्त्र

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वैमानिक शास्त्र में निरूपित 'शकुन विमान'
'द विमानिक शास्त्र' नाम से सन् १९७३ में प्रकाशित 'वैमानिक शास्त्र' का अंग्रेजी अनुवाद

वैमानिक शास्त्र, संस्कृत पद्य में रचित एक ग्रन्थ है जिसमें विमानों के बारे में जानकारी दी गयी है। इस ग्रन्थ में बताया गया है कि प्राचीन भारतीय ग्रन्थों में वर्णित विमान रॉकेट के समान उड़ने वाले प्रगत वायुगतिकीय यान थे।

इस पुस्तक के अस्तित्व की घोषणा सन् 1952 में आर जी जोसयर (G. R. Josyer) द्वारा की गयी। जोसयर ने बताया कि यह ग्रन्थ पण्डित सुब्बाराय शास्त्री (1866–1940) द्वारा रचित है जिन्होने इसे 1918–1923 के बीच बोलकर लिखवाया। इसका एक हिन्दी अनुवाद 1959 में प्रकाशित हुआ जबकि संस्कृत पाठ के साथ अंग्रेजी अनुवाद 1973 में प्रकाशित हुआ।

इसमें कुल ८ अध्याय और 3000 श्लोक हैं। पण्डित सुब्बाराय शास्त्री के अनुसार इस ग्रंथ के मुख्य जनक रामायणकालीन महर्षि भारद्वाज थे।

भारद्वाज ने 'विमान' की परिभाषा इस प्रकार की है-

वेग-संयत् विमानो अण्डजानाम्
( पक्षियों के समान वेग होने के कारण इसे 'विमान' कहते हैं।)

संरचना[संपादित करें]

वैमानिक शास्त्र में कुल ८ अध्याय और 3000 श्लोक हैं।

अध्याय १
  1. मङ्गलाचरणम्
  2. विमानशब्दार्थाधिकरणम्
  3. यन्तृत्वाधिकरणम्
  4. मार्गाधिकरणम्
  5. आवर्ताकरणम्
  6. अङ्काकरणम्
  7. वस्त्राकरणम्
  8. आहाराकरणम्
  9. कर्माधिकाराधिकरणम्
  10. विमानाधिकरणम्
  11. जात्याधिकरणम्
  12. वर्णाधिकरणम्
अध्याय २
  1. संज्ञाधिकरणम्
  2. लोहाधिकरणम्
  3. संस्काराधिकरणम्
  4. दर्पणाधिकरणम्
  5. शक्त्यधिकरणम्
  6. यन्त्राधिकरणम्
  7. तैलाधिकरणम्
  8. ओषध्यधिकरणम्
  9. घाताधिकरणम्
  10. भाराधिकरणम्
अध्याय ३
  1. भ्रामण्यधिकरणम्
  2. कालाधिकरणम्
  3. विकल्पाधिकरणम्
  4. संस्काराधिकरणम्
  5. प्रकाशाधिकरणम्
  6. उष्णाधिकरणम्
  7. शैत्याधिकरणम्
  8. आन्दोलनाधिकरणम्
  9. तिर्यन्धाधिकरणम्
  10. विश्वतोमुखाधिकरणम्
  11. धूमाधिकरणम्
  12. प्राणाधिकरणम्
  13. सन्ध्यधिकरणम्
अध्याय ४
  1. आहाराधिकरणम्
  2. लगाधिकरणम्
  3. वगाधिकरणम्
  4. हगाधिकरणम्
  5. लहगाधिकरणम्
  6. लवगाधिकरणम्
  7. लवहगाधिकरणम्
  8. वान्तर्गमनाधिकरणम्
  9. अन्तर्लक्ष्याधिकरणम्
  10. बहिर्लक्ष्याधिकरणम्
  11. बाह्याभ्यन्तर्लक्ष्याधिकरणम्
अध्याय ५
  1. तन्त्राधिकरणम्
  2. विद्युत्प्रसारणाधिकरणम्
  3. व्याप्त्यधिकरणम्
  4. स्तम्भनाधिकरणम्
  5. मोहनाधिकरणम्
  6. विकाराधिकरणम्
  7. दिङ्निदर्शनाधिकरणम्
  8. अदृष्याधिकरणम्
  9. तिर्यञ्चाधिकरणम्
  10. भारवहनाधिकरणम्
  11. घण्टारवाधिकरणम्
  12. शुक्रभ्रमणाधिकरणम्
  13. चक्रगत्यधिकरणम्
अध्याय ६
  1. वर्गविभाजनाधिकरणम्
  2. वामनिर्णयाधिकरणम्
  3. शक्त्युद्गमाधिकरणम्
  4. सूतवाहाधिकरणम्
  5. धूमयानाधिकरणम्
  6. शिखोद्गमाधिकरणम्
  7. अंशुवाहाधिकरणम्
  8. तारमुखाधिकरणम्
  9. मणिवाहाधिकरणम्
  10. मतुत्सखाधिकरणम्
  11. शक्तिगर्भाधिकरणम्
  12. गारुडाधिकरणम्
अध्याय ७
  1. सिंहिकाधिकरणम्
  2. त्रिपुराधिकरणम्
  3. गूढचाराधिकरणम्
  4. कूर्माधिकरणम्
  5. ज्वालिन्यधिकरणम्
  6. माण्डलिकाधिकरणम्
  7. आन्दोलिकाधिकरणम्
  8. ध्वजाङ्गाधिकरणम्
  9. वृन्दावनाधिकरणम्
  10. वैरिञ्चिकाधिकरणम्
  11. जलदाधिकरणम्
अध्याय ८
  1. दिङ्निर्णयाधिकरणम्
  2. ध्वजाधिकरणम्
  3. कालाधिकरणम्
  4. विस्तृतक्रियाधिकरणम्
  5. अङ्गोपसहाराधिकरणम्
  6. तमप्रसारणाधिकरणम्
  7. प्राणकुण्डल्यधिकरणम्
  8. रूपाकर्षणाधिकरणम्
  9. प्रतिबिम्बाकर्षणाधिकरणम्
  10. गमागमाधिकरणम्
  11. आवासस्थानाधिकरणम्
  12. शोधनाधिकरणम्
  13. परिच्छेदाधिकरणम्
  14. रक्षणाधिकरणम्

विमान के ३२ रहस्य[संपादित करें]

इस ग्रन्थ में विमानचालक (पाइलॉट) के लिये ३२ रहस्यों (systems) की जानकारी आवश्यक बतायी गयी है। इन रहस्यों को जान लेने के बाद ही पाइलॉट विमान चलाने का अधिकारी हो सकता है। ये रहस्य निम्नलिखित हैं-

मांत्रिक, तान्त्रिक, कृतक, अन्तराल, गूढ, दृश्य, अदृश्य, परोक्ष, संकोच, विस्तृति, विरूप परण, रूपान्तर, सुरूप, ज्योतिर्भाव, तमोनय, प्रलय, विमुख, तारा, महाशब्द विमोहन, लाङ्घन, सर्पगमन, चपल, सर्वतोमुख, परशब्दग्राहक, रूपाकर्षण, क्रियाग्रहण, दिक्प्रदर्शन, आकाशाकार, जलद रूप, स्तब्धक, कर्षण ।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]