वेस्ट इंडीज़ संघ

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West Indies Federation
1958 – 1962
ध्वज कुल चिन्ह
ध्वज कुल चिन्ह
आदर्श वाक्य
To dwell together in unity
राष्ट्रगान
God Save the Queen (Official)

Forged from the Love of Liberty (Proposed)

Location of West Indies
राजधानी De jure Chaguaramas De facto Port of Spain
भाषा(एँ) English
सरकार Constitutional monarchy
Queen Elizabeth II
राज्यपाल Lord Hailes
Prime minister Grantley Herbert Adams
इतिहास
 - संस्थापित January 3
 - विसंस्थापित May 31
क्षेत्र
 - 1960 20,253 km² (7,820 sq mi)
जनसंख्या
 - 1960 est. 31,17,300 
     घनत्व 153.9 /कि.मी²  (398.6 /वर्ग मील)
मुद्रा BWI dollar (XBWD)
दूरभाष कोड +1-809
Preceded by
Succeeded by
Flag of Barbados (1870–1966).png Barbados
Flag of Jamaica (1957-1962).svg Jamaica
Trinidad colonial 1889-1958.gif Trinidad and Tobago
Missing Blue Ensign.svg British Leeward Islands
Missing Blue Ensign.svg British Windward Islands
Antigua and Barbuda Flag of Antigua and Barbuda.svg
Barbados Flag of Barbados (1870–1966).png
Cayman Islands Flag of the Cayman Islands (pre-1999).svg
Dominica Flag of Dominica.svg
Grenada Missing Blue Ensign.svg
Jamaica Flag of Jamaica.svg
Montserrat Flag of Montserrat.svg
Saint Christopher-Nevis-Anguilla Flag of Saint Christopher-Nevis-Anguilla.svg
Saint Lucia Flag of Saint Lucia.svg
Saint Vincent and the Grenadines St Vincent colonial flag.png
Trinidad and Tobago Flag of Trinidad and Tobago.svg
Turks and Caicos Islands Flag of the Turks and Caicos Islands.svg
¹ West Indies Federal Labour Party

वेस्ट इंडीज़ संघ , जिसे अंग्रेजी में फेडेरेशन ऑफ द वेस्ट इंडीज़ के रूप में भी जाना जाता है, एक अल्पजीवी कैरिबियन संघ था जो 3 जनवरी, 1958 से लेकर 31 मई, 1962 तक अस्तित्व में रहा. इसमें यूनाइटेड किंगडम के कई कैरिबियन उपनगर शामिल थे. संघ का अभिव्यक्त उद्देश्य राजनीतिक इकाई का निर्माण करना था जो कि ब्रिटेन से अलग एक स्वतंत्र राज्य के रूप में होता - संभवतः कनाडाई महासंघ, ऑस्ट्रेलियाई संघ, या केन्द्रीय अफ्रीकी संघ के समान होता; हालांकि ऐसा होने से पहले ही आंतरिक राजनीतिक संघर्ष के कारण यह संघ ध्वस्त हो गया.

जनसंख्या और भूगोल[संपादित करें]

वेस्ट इंडीज़ संघ की कुल आबादी 3 से 4 मीलियन के बीच थी जिसमें पश्चिम अफ्रीकी मूल के अश्वेत लोगों की संख्या अधिक थी. अल्पसंख्यकों में उपमहाद्वीप के भारतीय (जिन्हें इस्ट इंडियंस कहा जाता था), यूरोपीय चीनी और केरिब्स शामिल थे. वहां मिश्रित वंश की एक बड़ी आबादी भी मौजूद थी (मुख्य रूप से मुलाटो थे, लेकिन अफ्रीकी-भारतीय, यूरोपीय-भारतीय और मिश्रित चीनी भी बड़ी संख्या में मौजूद थे) धर्म के संदर्भ में, बड़ी संख्या में कैथोलिक और कुछ हिंदुओं और मुसलमानों (मुख्य रूप से दोनों पूर्व भारतीय आबादी से थे) के अलावा सबसे ज्यादा आबादी प्रोटेस्टेंट की थी.

वेस्ट इंडीज़ संघ (या केवल वेस्ट इंडीज़) में बसे हुए लगभग 24 मुख्य द्वीप और 220-230 क आस-पास छोटे अपतटीय द्वीप, टापू और प्रवाल मालाएं (कुछ बसे हुए और कुछ निर्जन) शामिल हैं. सबसे बड़ा द्वीप जमैका था जो संघ के उत्तर पश्चिम में स्थित था. सामान्य रूप से दक्षिण पूर्व में दूसरा बड़ा द्वीप त्रिनिदाद और उसके बाद बारबाडोस (जनसंख्या के आधार पर) है जो कि संघ के पूर्वी छोर पर स्थित है.

यह संघ, कैरिबियन में सभी द्वीप समूह में फैला हुआ था:

अपनी चौड़ाई में (पूर्व से पश्चिम), केमैन द्वीप से बारबाडोस तक यह करीब 2,425-किलोमीटर (1,310 nmi) फैला है (और देशांतर के करीब 22 डिग्री) और उत्तर में तुर्क एंड कोइकोस द्वीप से इकाकोस प्वोइंट तक, और दक्षिण में त्रिनिदाद तक यह 1,700-किलोमीटर (920 nmi) तक विस्तारित है (अक्षरेखा के 12 डिग्री तक फैला है). हालांकि, इन दोनों दूरियों का अधिकांश क्षेत्र पानी द्वारा घिरा है (इनके बीच कुछ अन्य द्वीपों के अपवाद के साथ). तुलनात्मक रूप से ग्रेट ब्रिटेन अक्षांश के करीब 10 डिग्री भर में फैला है और स्पेन देशांतर के लगभग 20 डिग्री के पार फैला हुआ है. हालांकि वेस्ट इंडीज़ इतने विशाल क्षेत्र में फैला था कि उसके अधिकांश प्रांत पूर्वी कैरेबियन में काफी नजदीकी रूप से संस्पर्शी थे, जहां जमैका, केमैन द्वीप समूह, और तुर्क और कोइकोस द्वीप समूह स्पष्ट अपवाद थे.

अधिकांश द्वीपों में अंदरूनी पहाड़ थे जो संकीर्ण तटीय मैदानों से घिरे हुए थे. अपवाद के रूप में एंगुइला, एंटीगुआ, बारबुडा, केमैन द्वीप, तुर्क एंड कोइकोस द्वीप (जो कि सभी काफी सपाट थे), और त्रिनिदाद थे (जिसके उत्तर में वृहद पहाड़ी श्रृंखला और भीतर एक छोटा सा केन्द्रीय पर्वत है). संकीर्ण तटीय मैदान के साथ-साथ ऐतिहासिक व्यापार वह मुख्य कारण था जिसके चलते लगभग सभी प्रमुख बस्तियां (शहर और कस्बे) तट पर स्थित थे. प्रमुख शहरों में किंग्स्टन, पोर्ट ऑफ़ स्पेन, ब्रिजटाउन, स्पेनिश टाउन, मोंटेगो बे, मांडेविल, कैसेट्रीस, रोसिउ, सेंट जॉर्ज, किंग्सटाउन, सेंट जॉन्स, और बस्सेटेरे शामिल हैं.

सभी द्वीपों की जलवायु गर्म और आर्द्र मौसम के साथ उष्णकटिबंधीय है, हालांकि बड़े द्वीपों में अंतर्देशीय क्षेत्रों में अधिक समशीतोष्ण जलवायु है. वृष्टि छाया के अंतर्गत पड़ने वाले क्षेत्र (जमैका और त्रिनिदाद के दक्षिणी तट और लेसर एंटीलिज के पूर्वी तट) अपेक्षाकृत सूखे हैं. साल में वहां दो मौसम होते हैं, साल की पहली छमाही में शुष्क मौसम होता है और दूसरी छमाही में बरसात का मौसम (तूफानी मौसम के रूप में भी जाना जाता है) होता है. कई द्वीप पारम्परिक तूफान वाले हिस्सों के अंतर्गत आते हैं जिसमें त्रिनिदाद अपवाद के रूप में देखा जा सकता है (हालांकि यहां कभी-कभी न्यून अक्षांश तूफ़ान आते हैं) इसीलिए यहां पवन जोखिम और बाढ़ क्षति के खतरे की संभावना होती है.

ब्रिटेन ने इस संघ को अपने "कैरेबियन और उत्तर अटलांटिक क्षेत्र" के हिस्से के रूप में वर्गीकृत किया है, वह क्षेत्र जिसे बरमूडा जैसी अन्य संपत्तियों के साथ बांटा गया.

वर्तमान में इस संघ को भौगोलिक दृष्टि से उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप का हिस्सा माना जाता है क्योंकि इसके सभी द्वीप कैरिबियन के भीतर और चारों ओर हैं, यद्यपि सिर्फ त्रिनिदाद दक्षिण अमेरिका तट से दूर स्थित है और उसी महाद्वीप पर स्थित है.[कृपया उद्धरण जोड़ें] बायोकंटीनेंटल देश देखें.

प्रांत[संपादित करें]

वेस्टइंडीज़ संघ के दस प्रांत या प्रदेश इकाई में शामिल थे:

ऐतिहासिक दृष्टि से "पश्चिम भारतीय" राष्ट्र द बहामास, बरमुडा, बेलीज, ब्रिटिश वर्जिन आइसलैंड और गुयाना को शामिल करने के लिए नहीं चुना गया था क्योंकि उनका मानना था कि उनका भविष्य क्रमशः उत्तरी अमेरिका (बहामा और बरमूडा दोनों के लिए), मध्य अमेरिका, संयुक्त राज्य अमेरिका वर्जिन आइसलैंड, दक्षिण अमेरिका के साथ है. हालांकि, बहामा ने 1960 में वेस्ट इंडीज़ फेडेरेशन गेम्स में भाग लिया, जिसमें बहामा के भावी राष्ट्रपति पेरी क्रिस्टी ने एक खिलाड़ी के रूप में भाग लिया था. हालांकि 1971 के आसपास गुयाना ने संभवतः बड़े ढीले तरीके से कैरिबियन संघ के लिए पुनः प्रयास किया था. [1]

सरकार और कानूनी स्थिति[संपादित करें]

संघ एक आंतरिक स्वराज्य था जो दस प्रांतो से बना संघीय राज्य था जिसमें सभी ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रदेश थे. इस महासंघ का निर्माण यूनाईटेड किंगडम द्वारा 1958 में अधिकांश ब्रिटिश वेस्टइंडीज़ से किया गया था. ब्रिटेन का इरादा था कि यह संघ जल्दी ही एक स्वतंत्र राज्य होगा और इस प्रकार वह क्षेत्र के सभी प्रदेशों की स्वतंत्रता की मांगों को पूरा कर रहा था. हालांकि, प्रांतों के बीच भारी राजनीतिक विवादों के चलते यह परियोजना तहस-नहस हो गई और यह संघ कभी भी न तो राष्ट्रमंडल दायरे के रूप में संप्रभुता हासिल कर सका और ना ही राष्ट्रमंडल के भीतर गणतंत्र के ही रूप में.

इस महासंघ के लिए कानूनी आधार ब्रिटिश कैरिबियन संघ अधिनियम 1956 था और गठन की तिथि - 3 जनवरी, 1958 - इसकी स्थापना 1957 में घोषित एक ऑर्डर-इन-काउंसिल द्वारा की गई.

जैसा कि उस समय के सभी ब्रिटिश प्रदेश के साथ था, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय राज्य की मुखिया थी और इस संघ के कार्यकारी मामलों, रक्षा और वित्तपोषण के लिए द क्राउन के पास वैधानिक शक्तियां थीं. उनके प्रतिनिधि, पैट्रिक बुखन-हेपबर्न, प्रथम बैरन हेल्स को ब्रिटिश उपनिवेश के लिए आम रूप से दिया जाने वाला गवर्नर की बजाए गवर्नर जनरल का पद दिया गया. यह पद राज्य के संघीय स्वरूप को परिलक्षित कर सकता था, या संघ के जल्द ही स्वतंत्र हो जाने की अपेक्षाओं का संकेत दे रहा था. ब्रिटिश सरकार द्वारा गवर्नर जनरल के पास भी संघ द्वारा पारित किसी भी कानून को वीटो करने की क्षमता थी.

संघीय संसद द्विसदनीय थी, जिसमें एक नामित सीनेट और लोकप्रिय निर्वाचित हाउस ऑफ रिप्रेजेनटेटिव शामिल था. सीनेट में उन्नीस सदस्य शामिल थे. इन सदस्यों को संबंधित क्षेत्रीय सरकारों से सलाह के बाद गवर्नर जनरल द्वारा नियुक्त किया गया था. प्रत्येक इकाई का प्रतिनिधित्व दो सदस्यों द्वारा किया गया (मॉन्ट्सेराट से केवल एक के साथ). हाउस ऑफ रिप्रेजेनटेटिव में कुल 45 निर्वाचित सदस्य थे - जमैका में 17 सीटें, त्रिनिदाद और टोबैगो में 10 सीटें, बारबाडोस में पांच सीटें, मॉन्ट्सेराट में 1 सीट, और शेष के प्रत्येक द्वीपों के 2 सीटें थीं.

हालांकि सरकार (कार्यकारी) एक कैबिनेट न होकर एक काउंसिल ऑफ स्टेट थी. इसकी अध्यक्षता गवर्नर जनरल द्वारा की गई और इसमें एक प्रधानमंत्री और 10 अन्य अधिकारी शामिल थे.

यहां एक संघीय सुप्रीम कोर्ट भी था जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और तीन (बाद में पांच) अन्य न्यायाधीश शामिल थे.

राजधानी के लिए प्रस्तावित स्थल चौगोरामास था जो कि पोर्ट ऑफ स्पेन, त्रिनिदाद एंड टोबैगो के पश्चिम में कुछ मील की दूरी पर था, लेकिन साइट संयुक्त राज्य नौसेना बेस का एक हिस्सा था. सामान्यतः पोर्ट ऑफ स्पेन संघ के अस्तित्व की अवधि के लिए महासंघीय राजधानी के रूप में था.

पहला चुनाव[संपादित करें]

पहले संघीय चुनाव की तैयार के लिए, स्थानीय राजनीतिक दलों के परिसंघ के रूप में दो महासंघीय-व्यापक पार्टियों को आयोजित किया गया. दोनों का आयोजन जमैका नेताओं द्वारा किया गया: नोर्मन मनले द्वारा वेस्ट इंडीज़ के संघीय श्रम पार्टी और अलेक्जेंडर बस्टामंटे द्वारा डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी. व्यापक संदर्भ में, डबल्यूआईएफएलपी (WIFLP), पूरे संघ में शहरी आधारित पार्टियों से बना था, जबकि डीएलपी में ग्रामीण आधारित पार्टियां शामिल थीं. एक छोटी सी तृतीय पार्टी, फेडरल डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थापना नवम्बर 1957 में त्रिनिडाड के एक समूह द्वारा की गई थी, हालांकि यह पार्टी एक भी सीट हासिल करने में नाकाम रही थी.

दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलों के लिए कई माइनों में प्लेटफार्म समान थे. दोनों ने यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा (वे देश जिनके आइसलैंड के साथ एक मज़बूत सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध थे) के साथ संबंधों को बनाए रखने और मज़बूती बनाने की वकालत की: पर्यटन को प्रोत्साहित और विस्तारित करने पर जोर दिया; ऋण प्राप्त करने के लिए, वित्तीय सहायता, और तकनीकी सहायता, के लिए संघ में ब्रिटिश गयाना और ब्रिटिश हौंडुरस को लाने का प्रयास करने पर जोर दिया. इन समानताओं के बावजूद, वहां काफी मतभेद थे. WIFLP ने कृषि के प्रोत्साहन की वकालत की थी, जबकि DLP ने निजी उद्योग और श्रम, मानव और आर्थिक संसाधनों के विकास दोनों के लिए अनुकूल जलवायु का वादा किया. डबल्यूआईएफएलपी ने बहामा (ब्रिटिश गयाना और ब्रिटिश हौंडुरस के अलावा) को संघ में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने का वादा किया, जबकि नहीं डीएलपी ने नहीं किया. डबल्यूआईएफएलपी ने क्रेडिट संसाधनों के विस्तार के लिए एक केंद्रीय बैंक की स्थापना का अभियान भी चलाया और एक लोकतांत्रिक समाजवादी समाज और सभी यूनिट प्रदेशों के लिए पूर्ण आंतरिक स्वशासन की वकालत की, जबकि स्वतंत्रता आंदोलन के मुद्दो और एक कस्टम यूनियन से बचने की कोशिश की. डीएलपी ने पूर्ण आंतरिक स्वशासन के बारे में कुछ नहीं कहा, पर समाजवाद पर हमला किया, उच्च कराधान (ऋण और तकनीकी सहायता के माध्यम से) से बचने की कोशिश की और वेस्ट इंडीज़ की एकता की कामना की ,पूजा की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति, और ट्रेड यूनियनों के प्रोत्साहन पर बल दिया.

25 मार्च 1958 को संघीय चुनाव का आयोजन किया गया. डबल्यूआईएफएलपी ने 26 सीटों के साथ चुनाव में जीत हासिल की जबकि डीएलपी 19 सीटों को ही हासिल कर पाया. डबल्यूआईएफएलपी को सीटों का बड़ा हिस्सा छोटे द्वीपों से मिला, जबकि डीएलपी को जमैका और त्रिनिदाद एवं टोबैगो में बहुमत हासिल हुआ. डीएलपी ने जमैका में 11 सीटों और त्रिनिडाड में 6 सीटों में जीत हासिल की. सीनेट को नियुक्त करते समय, गवर्नर जनरल लॉर्ड हेल्स ने महसूस किया कि केवल सेंट विन्सेंट द्वीप सरकार डीएलपी द्वारा नियंत्रित किया गया था, परिणामस्वरूप सीनेट, अनुपातहीन ढंग वाले डबल्यूआईएफएलपी के पास जा रहा था. एक विवादास्पद फैसले में उन्होंने जमैका और त्रिनिदाद में विपक्ष डीएलपी समूहों से संपर्क किया, और उन द्वीपों में से प्रत्येक से एक डीएलपी सीनेटर नियुक्त किया है. इस प्रकार सीनेट में 15 डबल्यूआईएफएलपी सदस्य और 4 डीएलपी सदस्य शामिल हुए.

बारबाडोस के डबल्यूआईएफएलपी नेता सर ग्रांटले एडम्स प्रधान मंत्री बने. प्रधानमंत्री के रूप में एडम्स का चयन, संघ की भावी समस्याओं का संकेत दे रहा था. डबल्यूआईएफएलपी के सम्भावी नेता जमैका के प्रधानमन्त्री नॉर्मन मनले थे, और उसके बाद तार्किक रूप से त्रिनिदाद एंड टोबैगो के प्रीमियर डॉ. एरिक विलियम्स थे. लेकिन दोनों ही ने संघीय चुनाव नहीं लड़ा, और अपने संबंधित द्वीप के नियंत्रण को बनाए रखने को पसंद किया. इसका अर्थ यह था कि दो सबसे महत्वपूर्ण प्रांतों के नेताओं ने संघ को व्यवहार्य के रूप में नहीं देखा. इसी तरह, डीएलपी के जमैकन संस्थापक अलेक्जेंडर बस्टामंटे ने भी संघ के चुनाव के लिए मना कर दिया और त्रिनिडाडियन एशफोर्ड सिनानन के लिए पार्टी नेतृत्व छोड़ दिया. प्रमुख जमैकन नेताओं की संघीय स्तर पर किसी भी भूमिका में गैर मौजूदगी ने महासंघ की एकता को कमजोर कर दिया.

राज्य परिषद के अन्य सदस्यों में शामिल थे:

  • उप-प्रधानमंत्री और व्यापार और उद्योग मंत्री: माननीय. डा. सीजीडी ला कोर्बिनेयर
  • वित्त मंत्री: माननीय रॉबर्ट लेवेलीन ब्रेडशॉ (सेंट किट्स)
  • संचार और कार्य मंत्री: माननीय. डबल्यू.ए. रोज़
  • कृषि और प्राकृतिक संसाधन मंत्री: माननीय एफ. बी. रिकेट्स
  • श्रम एवं सामाजिक मामलों के मंत्री: माननीय. श्रीमती फिलिस ब्याम शैंड अलफ्रे (डोमिनिका)
  • पोर्टफोलियो के बिना मंत्री: माननीय. एन.एच. रिचर्ड्स, माननीय. श्री वी. बी. वॉन, सीनेटर ए. जी. आर. बायफील्ड (जमैका), सीनेटर जे. डबल्यू. लीबर्ड, और सीनेटर जे. एल चार्ल्स

सरकारी सेवाएं[संपादित करें]

सम्पूर्ण महासंघ के लिए सामान्य सेवाओं के तहत कई इकाइयां थीं[2]:

  • संघीय नौवहन सेवा
  • संघीय सुप्रीम कोर्ट
  • वेस्टइंडीज़ यूनिवर्सिटी कॉलेज
  • वेस्ट इंडीज़ मौसम सेवा
  • वेस्ट इंडिया रेजिमेंट

संघ की सलाहकार सेवाओं में शामिल थे:

  • कृषि
  • नागरिक उड्डयन
  • शिक्षा
  • मत्स्य पालन
  • वानिकी
  • पशुधन
  • समुद्री सेवा
  • विपणन
  • चिकित्साशास्त्र
  • डाक सेवा
  • दूरसंचार

संघीय समस्याएं[संपादित करें]

इस नवजात संघ की राजनीति, संघीय सरकार और प्रांतीय सरकारों के बीच और दो सबसे बड़े प्रांतों (जमैका और त्रिनिदाद एंड टोबैगो) और छोटे प्रांतों के बीच होने वाले संघर्षों द्वारा ध्वस्त हो गई थी.

वेस्टइंडीज़ संघ का संघीय ढांचा असामान्य रूप से कमजोर था. उदाहरण के लिए, इसके प्रांत एक एकल कस्टम यूनियन में शामिल नहीं थे. इस प्रकार, प्रत्येक प्रांत टेरिफ के साथ एक अलग अर्थव्यवस्था के रूप में कार्य कर रहा था, मुख्यतः क्योंकि छोटे प्रांत बड़े द्वीप की अर्थव्यवस्थाओं द्वारा अभिभूत होने से डरते थे. इसके अलावा, संघ के भीतर आंदोलन की पूरी स्वतंत्रता को लागू नहीं किया गया, क्योंकि बड़े प्रांत छोटे द्वीपों से बड़े पैमाने पर पलायन के बारे में चिंतित थे. इस अर्थ में, कहा जा सकता है कि मौजूदा यूरोपीय संघ ने वेस्ट इंडियन प्रयास की तुलना में एक अधिक एकीकृत आर्थिक माहौल को लागू किया है.

और न ही संघीय सरकार कार्य करने के लिए अपने घटक राज्यों को ला पाई. प्रारंभिक संघीय बजट काफी अल्प था, जिसने संघीय सरकार को अपनी वित्तीय उदारता को एक गाजर के रूप में उपयोग करने से प्रतिबंधित किया. वह यूनाइटेड किंगडम और अपने सदस्य देशों के अनुदान पर निर्भर था. जमैका और त्रिनिदाद एंड टोबैगो के प्रांतीय बजट दोनों संघीय बजट से बड़े थे. इसके चलते उन राज्यों से संघीय सरकार के लिए अधिक से अधिक वित्त पोषण प्रदान के अनुरोधों को दोहराया गया. इन अनुरोधों को नजरअंदाज किया गया क्योंकि जमैका और त्रिनिदाद एंड टोबैगो, दोनों ने मिलकर संघीय राजस्व में पहले ही लगभग 85 प्रतिशत का योगदान कर दिया था, लगभग बराबर भागों में.

इसके अलावा, प्रधानमंत्री का पद काफी कमजोर था. प्रधानमंत्री के साथ दूसरे वेस्टमिंस्टर प्रणालियों के विपरीत, वेस्ट इंडियन संघ के प्रधानमंत्री संसद को भंग नहीं कर सकते थे.

कनाडा के साथ संबंध[संपादित करें]

विशेष रूप से संघ ने कनाडा के साथ करीबी संबंधों को बनाए रखा था, जिसका अतीत भी इस रूप में समान था कि वह कई पूर्व ब्रिटिश उपनिवेशों का एक महासंघ था. प्रारम्भिक वर्षों में, कई कैरिबियन नेताओं ने सुझाव दिया कि वेस्ट इंडीज़ संघ को एक कैनेडियन प्रांत बनने की संभावना की जांच करनी चाहिए, हालांकि यह एक क्षणभंगुर से अधिक कभी नहीं था.[कृपया उद्धरण जोड़ें]

वार्ता के खंडित होने के बावजूद, मई 1961 में कनाडा ने क्षेत्र के दो सबसे महत्वपूर्ण उपहार को वेस्टइंडीज़ संघ को प्रस्तुत किया: दो व्यापारी जहाज, जिसका नाम द फेडरल पाम और ग फेडरल मेपल था. ये दो जहाज महासंघ में महीने में दो बार हर द्वीप का दौरा करते थे, और द्वीपों के बीच एक महत्वपूर्ण समुद्री संपर्क को प्रदान करते थे.

विघटन[संपादित करें]

संघ के समाप्त होने के लिए कई कारणों को गिनाया गया है, उनमें से कुछ को ऊपर "समस्या" अनुभाग में विस्तार से बताया गया है. इसमें स्थानीय जन-साधारण समर्थन की कमी, प्रतिस्पर्धी द्वीपीय राष्ट्रवाद, संघीय सरकारी की कमजोरी, संघीय कराधान और आंदोलन की स्वतंत्रता पर रोक, संघीय संविधान में कमी, इसके अस्तित्व के प्रारम्भ में ही संविधान के लिए बुनियादी परिवर्तन, प्रभावशाली नेताओं के बीच राजनीतिक झगड़े, तीन सबसे प्रभावशाली नेताओं की संघीय चुनाव में भाग न लेने का फैसला, दो सबसे बड़े इकाइयों में जनसंख्या और संसाधनों की भारी एकाग्रता, इकाइयों के बीच भौगोलिक और सांस्कृतिक दूरी, सार्वजनिक प्रशासन की इतिहास की कमी, और स्व-राज्य की अवधि का प्रभाव जो कि क्राउन कॉलोनी प्रणाली से चली आ रही थी.

हालांकि, संघ के विघटन के लिए तत्काल उत्प्रेरक जमैकन असंतोष था. 1961 तक, राज्य के मामलों को लेकर जमैका में असंतोष के कई कारण पैदा हो गए थे:

  • संघ में अधिकांश द्वीपों से जमैका काफी दूर था, पश्चिम में कई सौ मील की दूरी तक फैला था.
  • सीटों को बंटवारे को लेकर संघीय संसद में जमैका का सीटों का हिस्सा सम्पूर्ण जनसंख्या में इसके हिस्से से कम था.
  • यह माना जाता था कि छोटे द्वीप जमैका के धन को चूस रहे थे.
  • जमैका में कई लोग इस बात को लेकर नाराज थे कि किंग्स्टन को संघ की राजधानी के रूप में नहीं चुना गया.

जमैका के असंतुष्ट होने का सबसे महत्वपूर्ण कारण संघ की औपनिवेशिक स्थिति का जारी रहना था. जमैका, संघ में इसीलिए शामिल हुआ था क्योंकि उसके नेताओं का मानना था कि वेस्ट इंडीज़ को जल्दी ही स्वतंत्रता दे दी जाएगी. संघ के गठन के लगभग तीन साल बाद भी ऐसा नहीं हुआ था, इसी बीच, छोटे ब्रिटिश उपनिवेश जैसे साइप्रस और सियरा लियोन ने स्वतंत्रता प्राप्त कर ली थी. इस प्रकार, कई जमैकंस का मानना था कि द्वीप को अपने अधिकार से स्वतंत्रता की तलाश करनी चाहिए और ऐसा हो सकता है.

साथ ही संघ द्वारा प्रस्तावित राजधानी चौगारामासा के साथ भी समस्याएं थी, उस समय वह संयुक्त राज्य के हाथों में था (द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूनाइटेड किंगडम से एक नौसेना बेस के रूप में पट्टे पर लिया गया था). कैरेबियन प्रांत के कई नेता महासंघ की राजधानी के रूप में चौगारामास को चाहते थे. क्षेत्रीय नेता जैसे, जमैका के नोर्मन मनले और डॉ. एरिक विलियम्स ने चौगारामास को संयुक्त राज्य से छुड़ा कर संघ को सौंपे जाने की वकालत की. हालांकि अमेरिका और ब्रिटेन असहमत थे और महासंघ के प्रधानमंत्री ग्रांटले एडम्स ने चौगारामास को प्राप्त करने से प्रांतीय नेताओं को इनकार कर दिया था. कई जमाइकंस को तब लगा कि संघ उनकी विकास प्रक्रिया और स्वतंत्रता आंदोलन को बाधित कर रहा है.

परिणाम स्वरूप बस्टामांटे के नेतृत्व वाली जमैका लेबर पार्टी (वेस्ट इंडीज़ डीएलपी का स्थानीय घटक) ने संघ से राजनीतिक अलगाव लेने पर सितम्बर 1961 में एक जनमत-संग्रह कराने के लिए मनले को सफलतापूर्वक मजबूर किया. उस समय के प्रांतीय प्रधानमंत्री मनले के विरोध के बावजूद, 54 प्रतिशत वोट के साथ इसे पारित कर दिया गया. स्वयं मनले को अप्रैल 1962 के द्वीप चुनावों में शिकस्त मिली, और बस्टामांटे, 6 अगस्त 1962 में स्वतंत्र जमैका के पहले प्रधानमंत्री बने.

जमैका के जाने के बाद, पुराने मलबे से एक नया महासंघ खड़ा करने का प्रयास किया गया. इसके लिए त्रिनिदाद और टोबैगो के प्रधानमंत्री विलियम्स पर काफी निर्भरता थी जिन्होंने पूर्व में कहा था कि वे एक "मज़बूत संघ" चाहते हैं. एंटीगुआ के प्रधानमंत्री वेयर बर्ड ने जवाब दिया कि संघ में उनका प्रांत त्रिनिदाद के बराबर का हिस्सेदार है, "एक छोटे से टोबैगो" की तरह नही है. उन्होंने संकेत किया कि एक मजबूत महासंघ स्वीकार्य था बशर्ते एक एकात्मक राज्य बनाने का कोई भी प्रयास नहीं किया गया हो.

इस नए संघ पर वार्ता सितंबर 1961 में शुरू हुई; हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि त्रिनिदाद को 75 से 80 प्रतिशत तक नए महासंघ का राजस्व प्रदान करना होगा. इसके अलावा, भले ही त्रिनिदाद अब नए संघ की जनसंख्या का 60 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता, विचाराधीन प्रस्ताव के तहत उसे संसद में आधी सीटों से भी कम दिया जाना था.

नवंबर तक, विलियम्स ने संकेत दिया कि अब वह एक एकात्मक राज्य बनाने के विचार के पक्ष में है. उसमें असफल होने पर उन्होंने त्रिनिदाद और टोबैगो को स्वतंत्रता लेने का संकल्प लिया. जिसके तहत 4 दिसंबर, 1961 को उन्हें एक त्रिनिडाडियन नेता के रूप पुनर्निर्वाचन द्वारा सीमित किया गया. बाद में उसी दिसंबर में बारबाडोस के प्रधानमंत्री एर्रोल बैरो, विलियम्स के साथ मिले थे, लेकिन संघ में त्रिनिदाद को रखने के लिए उसे मनाने में विफल हो गए.

14 जनवरी,1962 को नैशनल पीपुल्स मूवमेंट ने (विलियम्स के नेतृत्व वाली डबल्यूआईएफएलपी की त्रिनिदाद घटक) संघ के साथ किसी भी आगे की भागीदारी को खारिज करने के प्रस्ताव को पारित किया. खुद विलियम्स ने कहा कि "दस में से एक की संख्या निकाल दें तो केवल शून्य ही रह जाता है" दूसरे शब्दों में, जमैका के बिना, संघ संभव नहीं था. त्रिनिदाद और टोबैगो को 31 अगस्त 1962 को स्वतंत्रता मिली.

त्रिनिदाद और जमैका के बिना, शेष "नन्हे आठ" ने वेस्ट इंडीज़ संघ के कुछ स्वरूप को बनाए रखने का प्रयास किया, जो इस बार बारबाडोस पर केंद्रित था. हालांकि, ये वार्ताएं अंततः निरर्थक साबित हुई. अपने दो सबसे बड़े राज्यों के बिना, संघ वित्तीय दिवालिएपन से बर्बाद हो गया था. बारबाडोस इस समय वित्तीय बोझ को अपने कंधे पर उठाने से इनकार कर दिया, और एंटीगुआ और ग्रेनेडा क्रमशः जमैका और त्रिनिदाद के साथ विलय करने के विचार के साथ दिलचस्पी लेना शुरू किया.

यूनाइटेड किंगडम की संसद के वेस्ट इंडीज़ अधिनियम 1962 के साथ वेस्टइंडीज़ संघ कानूनी तौर पर भंग हुआ. शेष "न्यून आठ" प्रांत एक बार फिर अलग प्रदेश बन गए जिसे सीधे लंदन से संचालित किया गया, इनमें से अधिकांश बाद में स्वतंत्र हुए, जो कि इस प्रकार थे:

मॉन्ट्सेराट, यूनाइटेड किंगडम का एक विदेशी क्षेत्र बना हुआ है. केमैन द्वीप और तुर्क एंड कोइकोस द्वीप को जमैका के 1962 में स्वतंत्रता के बाद इससे अलग कर दिया गया था; 1980 में सेंट किट्स और नेविस से एंगुइला को अलग किया गया. ये तीनों ब्रिटेन के प्रदेश भी बने हुए हैं.

विरासत[संपादित करें]

इस महासंघ की मुद्रा वेस्टइंडीज़ डॉलर थी (हालांकि जमैका ने पाउंड के इस्तेमाल को जारी रखा), बाद में जिसका स्थान ईस्ट कैरिबियन डॉलर, बार्बेडियन डॉलर और टोबैगो त्रिनिदाद और डॉलर ने लिया. उत्तराधिकारी संगठनों में शामिल हैं वेस्टइंडीज़ एसोसिएटेड स्टेट्स और कैरीकॉम (CARICOM).

कुछ लोग वेस्ट इंडीज़ क्रिकेट टीम को संघ की एक विरासत के रूप में देखते हैं, हालांकि वास्तव में इसका गठन संघ के निर्माण से 30 साल पहले हुआ था.

आधिकारिक तौर पर संघ से पहले निर्मित, एक अन्य स्थायी क्षेत्रीय निर्माण है वेस्टइंडीज़ विश्वविद्यालय. संघ के दौरान, इस विश्वविद्यालय ने मुख्य परिसर में जमैका से परे क्षेत्रीय विस्तार करने की नीति अपनाई थी. दो अन्य परिसरों को स्थापित किया गया था: एक त्रिनिदाद एंड टोबैगो में, जिसे 1960 में स्थापित किया गया था, और दूसरा बारबाडोस में, जिसे 1963 में संघ के भंग हो जाने के शीघ्र बाद स्थापित किया गया था.

टिकट[संपादित करें]

संघ के अस्तित्व के दौरान, प्रत्येक सदस्य ने पहले की तरह अपने स्वयं के डाक टिकट को जारी रखा; लेकिन 22 अप्रैल, 1958 को प्रत्येक सदस्य (केमैन द्वीप समूह को छोड़कर) के लिए तीन स्मारक टिकटों के एक सेट को जारी किया गया. इन सभी टिकटों में एक आम डिज़ाइन थी जिसमें कैरिबियन का नक्शा और रानी एलिजाबेथ का चित्रण था और उसके शीर्ष पर "द वेस्ट इंडीज़/ फेडरेशन 1958 " लिखा होता था और नीचे सदस्य का नाम लिखा होता था. ये सभी टिकट दोनों मिंट और प्रयुक्त स्थिति में लगभग आम थे.

संघ के पूर्व प्रयास[संपादित करें]

वेस्ट इंडीज़ संघ, एक ब्रिटिश कैरिबियन संघ का पहला प्रयास नहीं था (और न ही यह अंतिम था). महासंघों और यूनियनों पर पिछले प्रयास का इतिहास, 1958 के संघ की विफलता की आंशिक रूप से व्याख्या करता है.

प्रारंभिक संघीय प्रयास कभी भी इतने आगे नहीं गए कि जिसमें सम्पूर्ण ब्रिटिश वेस्ट इंडीज़ (BWI) शामिल हुआ हो, लेकिन उनका कार्य-क्षेत्र अधिकांशतः क्षेत्रीय था. ऐतिहासिक क्षेत्रीय समूहों में ब्रिटिश लीवार्ड आइलैंड्स, ब्रिटिश विंडवार्ड आइलैंड्स और आस-पास के उपनिवेशों के साथ जमैका शामिल था. ब्रिटिश वेस्ट इंडीज़ के इतिहास को देखें.

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • कैरेबियन का इतिहास
  • कनाडा-कैरेबियन संबंध
  • कैरीकॉम
  • वेस्ट इंडीज़ में क्रिकेट

पाद-टिप्पणी[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  • करमाइकल, डा. ट्रेवर ए. 2001. पासपोर्ट टू द हर्ट: रिफ्लेक्शंस ऑन कनाडा कैरिबियन रिलेशंस . इयान रेंडल प्रकाशक, किंग्सटन 6, जमैका. ISBN 976-637-028-1 द बुक्स फॉरवर्ड पैसेज, सिनोप्सिस
  • [|Stewart, Alice R.] (1950) "Canadian—West Indian Union, 1884–1885" Canadian Historical Review Number 4, (University of Toronto Press) 31,: Pgs. 369–389 doi:10.3138/CHR-031-04-02 ISSN (Print) 1710-1093 (Online) 0008-3755 (Print) 1710-1093 (Online) http://utpjournals.metapress.com/content/c52481673131810h/fulltext.pdf 
  • फ्रेजर, कैरी. 1994. एम्बीवेलेंट एंटी-कोलोनिएलिज्म: द यूनाइटेड स्टेट्स एंड द जेनेसिस ऑफ वेस्ट इंडियन इनडिपेनडेंस, 1940-1964 . ग्रीनवूड प्रेस
  • घनी, डॉ हामिद 1996. कमल : ए लाइफटाइम ऑफ पोलिटिक्स रीलीजियन एंड कल्चर मल्टीमीडिया उत्पादन केन्द्र, वेस्टइंडीज़ विश्वविद्यालय.
  • गोंजाल्विस राल्फ ई. 1994 हिस्टरी एंड फ्यूचर: ए कैरिबियन पर्सपेक्टिव क्विक प्रिंट, किंग्सटाउन, सेंट विंसेंट.
  • होयेस, एफ.ए. 1963. द राइज ऑफ वेस्ट इंडियन डेमोक्रेसी: द लाइफ एंड चाइम्स ऑप सर एडम्स ग्रांटले एड्वोकेट प्रेस.
  • महावीर, डॉ विंस्टन 1978 इन एंड आउट ऑफ पोलिटिक्स इनप्रिंट कैरिबियन.
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  • विखम, पी.डब्ल्यू. 1997 "फेक्टर्स इन इंटीग्रेसन एंड डिसइंटीग्रेसन ऑफ द कैरिबियन" इसु इन द गवर्नमेंट एन पोलिटिक्स ऑफ द वेस्ट विंडीज के हिस्से के रूप में प्रकाशित हुई, जेजी लागुएरा द्वारा संपादित, मल्टीमीडिया उत्पादन केन्द्र वेस्टइंडीज़ विश्वविद्यालय.
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बाह्य लिंक[संपादित करें]

साँचा:Territories of the British Empire

Erioll world.svgनिर्देशांक: 10°40′60″N 61°37′60″W / 10.6833, -61.6333