विद्युतचुंबकीय विकिरण

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विद्युतचुंबकीय तरंगों का दृष्यात्मक निरूपण
VFPt Solenoid correct2.svg
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विद्युत चुंबकीय विकिरण शून्य (स्पेस) एवं अन्य माध्यमों से स्वयं-प्रसारित तरंग होती है। इसे प्रकाश भी कहा जाता है किन्तु वास्तव में प्रकाश, विद्युतचुंबकीय विकिरण का एक छोटा सा भाग है। दृष्य प्रकाश, एक्स-किरण, गामा-किरण, रेडियो तरंगे आदि सभी विद्युतचुंबकीय तरंगे हैं।

विद्युतचुंबकीय विकिरण की विशेषताएँ[संपादित करें]

यह एक अनुप्रस्थ (Transverse) तरंग है। (जबकि ध्वनि एक अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंग है।)

  • यह एक अनुप्रस्थ (लांगीट्यूडनल) तरंग है। (जबकि ध्वनि एक अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंग है।)
  • इसका अस्तित्व विद्युत क्षेत्र एवं चुंबकीय क्षेत्र के दोलन के कारण होता है।
  • इसके संचरण के लिये किसी माध्यम का होना आवश्यक नहीं है। यह शून्य या निर्वात में भी चल सकता है। (जबकि ध्वनि के लिये माध्यम आवश्यक है।)
  • इसमें विद्युत क्षेत्र एवं चुंबकीय क्षेत्र परस्पर लम्बवत दोलन करते हैं; तथा विद्युत चुंबकीय तरंग के संचरण की दिशा विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्र के लम्बवत होती है।
  • शून्य या निर्वात में प्रकाश का वेग लगभग ३ लाख किमी/से (299,800 किमी/सेकेण्ड) होता है जो एक नियतांक है। कोई भी वस्तु इससे अधिक वेग से गति नहीं कर सकती।
  • अन्य माध्यमों में इसकी चाल शून्य में इसकी चाल से कम होती है।
  • मानव की आँखें, विद्युतचुंबकीय विकिरण के जिस भाग के प्रति संवेदनशील होती हैं उसे दृष्य प्रकाश (visible light) कहा जाता है। दृष्य प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (वेभलेंथ) ४००० एंगस्ट्राम से ८००० एंगस्ट्राम तक होती है।
  • विद्युत और चुंबकत्व दोनो ही विद्युतचुंबकीय प्रभाव हैं।
  • विद्युतचुंबकीय विकिरण में ऊर्जा एवं संवेग (मोमेन्टम्) भी होते हैं। जब ये तरंगे किसी पदार्थ से अनुक्रिया (इन्टरैक्शन) करती हैं तो पदार्थ के अणुओं (परमाणुओं या एलेक्ट्रान) को यह उर्जा और संवेग प्रदान करती हैं।
  • विद्युत्चुंबकीय विकिरण के दृष्य प्रकाश के अतिरिक्त अन्य विकिरणों का उपयोग कुछ ही दशकों से आरम्भ हुआ है। मानव जब भी किसी नये विकिरण का पता लगाता है, सभ्यता में एक क्रान्ति आ जाती है।

वर्गीकरण[संपादित करें]

विद्युतचुम्बकीय वर्णक्रम - इसमें दृष्य प्रकाश के भाग को बड़ा करके दिखाया गया है।

विद्युतचुंबकीय विकिरण का वर्गीकरण आवृत्ति के आधार पर होता है ; क्योंकि आवृति के आधार पर इनके कुछ गुण प्रभावित होते हैं। आवृति के आधार पर निम्न प्रकार के वर्ग होते हैं :-

रेडियो वर्णक्रम
अत्यधिक निम्न आवृत्ति (ELF) परम निम्न आवृत्ति (SLF) अत्यन्त निम्न आवृत्ति (ULF) अति निम्न आवृत्ति (VLF) निम्न आवृत्ति (LF) मध्यम आवृत्ति (MF) उच्चावृत्ति (HF) अत्योच्चावृत्ति (VHF) अत्यन्त उच्चावृत्ति (UHF) परम उच्चावृत्ति (SHF) अत्यधिक उच्चावृत्ति (EHF)
3 Hz 30 Hz 300 Hz 3 किलो हर्ट्ज़ 30 किलो हर्ट्ज़ 300 किलो हर्ट्ज़ 3 मैगा हर्ट्ज़ 30 मैगा हर्ट्ज़ 300 मैगा हर्ट्ज़ 3 गीगा हर्ट्ज़ 30 गीगा हर्ट्ज़
30 Hz 300 Hz 3 किलो हर्ट्ज़ 30 किलो हर्ट्ज़ 300 किलो हर्ट्ज़ 3 मैगा हर्ट्ज़ 30 मैगा हर्ट्ज़ 300 मैगा हर्ट्ज़ 3 गीगा हर्ट्ज़ 30 गीगा हर्ट्ज़ 300 गीगा हर्ट्ज़