वितरण इकाई

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ड्रैसर वेन द्वारा निर्मित एक वितरण इकाई

वितरण इकाई या ईंधन वितरण इकाई एक मशीन है जिसका प्रयोग कर किसी पेट्रोल पंप पर वाहनों में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, इथेनॉल ईंधन, बायोडीजल, मिट्टी का तेल या ईंधन के किसी अन्य प्रकार का जैव ईंधन भरा जाता है। भारत में इसे पेट्रोल पंप भी कहा जाता है और इसी कारण ईंधन भराई स्थल को भी इसी नाम से जाना जाता है।

इतिहास[संपादित करें]

विश्व की पहली वितरण इकाई का आविष्कार फोर्ट वेन, इंडियाना में सिलवानुस एफ बाउज़र ने किया था और जिसने इसे 5 सितंबर 1885 को बेच दिया था। शुरुआत में इसे मोटर वाहन के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया था क्योंकि इस समय तक उनका आविष्कार ही नहीं हुआ था। इस इकाई का प्रयोग मिट्टी के तेल के दीपों और चूल्हों के लिए किया गया था। बाद में उन्होंने अपनी इस इकाई में सुधार करते हुये कई सुरक्षा उपायों को इसमें जोड़ा साथ ही मोटर वाहनों में सीधे ईंधन वितरित करने के लिए इसमें एक नली भी जोड़ दी। शुरुआत में कुछ दिनों तक एक ऊर्ध्वाधर पेट्रोल पंप के लिए बाउज़र शब्द का प्रयोग किया गया था हालांकि इस शब्द को अब संयुक्त राज्य अमेरिका या भारत में उपयोग नहीं किया जाता है, पर अभी भी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में इसे अक्सर बाउज़र कहा जाता है।

कई शुरुआती वितरण इकाइयों के शीर्ष पर एक अंशांकित कांच का सिलेंडर होता था और इस सिलेंडर को पंप द्वारा ईंधन की वांछित मात्रा से भरा जाता था। इसके बाद पंप को बंद कर जाता था और पेट्रोल गुरुत्व बल के द्वारा ग्राहक के ईंधन टैंक में भर जाता था। जब मापक पंप प्रयोग में आया, तब इस कांच के मापक सिलेंडर की जगह एक छोटे से कांच के गोले ने ले ली जिसके अंदर एक टरबाइन लगी होती थी, और इसके प्रयोग से ग्राहक संतुष्ट होता था कि पेट्रोल सचमुच उसके टैंक में भरा जा रहा है।

सन्दर्भ[संपादित करें]