विजयानन्दसूरी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
आचार्य विजयानन्द सूरी
Vijayanandsuri Atmaram.jpg
नाम (आधिकारिक) आचार्य विजयानन्द सूरी
व्यक्तिगत जानकारी
जन्म 6 अप्रैल 1837
लेहरिया, पंजाब
निर्वाण 20 मई 1896(1896-05-20) (उम्र 59)
गुजरांवाला, पंजाब
शुरूआत
नव सम्बोधन आनन्दविजय (पूर्व संत आत्माराम)
सर्जक मुनि बुद्धिविजय
सर्जन तिथि विक्रम संवत १९७५
दीक्षा के बाद
पद आचार्य
कार्य तत्त्व-दर्शा, आग्यन तिमिरा भास्कर और तत्त्व निर्णय प्रासाद
जैन धर्म
Jain Prateek Chihna.svg
यह जैन धर्म की श्रेणी का लेख है।
मंत्र तथा प्रार्थना
नवकार मंत्र • अहिंसा •
ब्रह्मचर्य • सत्य • निर्वाण •
आस्तेय • अपरिग्रह • अनेकांतवाद
मुख्य सिद्धांत
केवल ज्ञान • ब्रह्माण्ड विज्ञान • संसार •
कर्म • धर्म • मोक्ष •
पुनर्जन्म • नवतत्त्व
मुख्य व्यक्ति
२४ तीर्थंकर • ऋषभ देव •
महावीर • आचार्य  • गणधर •
सिद्धसेन दिवाकर • हरिभद्र
क्षेत्रीय जैन धर्म
भारत • पश्चिमी
मत
श्वेतांबर • दिगंबर • तेरापंथी •
प्रारंभिक विद्यालय • स्थानकवासी •
बीसपंथ • डेरावासी
पाठ/ग्रंथ
कल्पसूत्र • अग्मा •
तत्तवार्थ सूत्र • सन्मति प्रकरण
अन्य
समय रेखा • प्रमुख जैन तीर्थ  • विषय सूची

जैन धर्म प्रवेशद्वार
 v • d • e 

आचार्य विजयानन्द सूरी (1837–1896) जिन्हें आत्माराम के नाम से भी जाना जाता है, आधुनिक समय में आचार्य शीर्षक पाने वाले प्रथम श्वेताम्बर मूर्तिपुजक जैन साधु थे।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. मांगीलाल भुटोरिया, इतिहास की अमर बेल- ओसवाल, प्रियदर्शी प्रकाशन, कलकता, 1988