विकिपीडिया:निर्वाचित लेख

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प्रथम निर्वाचित लेख[संपादित करें]

रामायण (फरवरी २००७)

चित्र:Lord Ram.jpg
श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान
रामायण संस्कृत का सर्वप्रथम महाकाव्य है जिसकी रचना वाल्मीकि ऋषि ने की। प्रथम महाकाव्य की रचना करने के कारण ही उन्हें ‘आदिकवि’ की उपाधि मिली। उनकी यह रचना न केवल भारत में वरन, उन दिनों विश्वव्यापी प्रचार-प्रसार का नगण्य साधन होने के बावजूद भी, विश्वप्रसिद्ध रचना बन गई तथा उनकी ये रचना सम्पूर्ण विश्व में लोकप्रिय हो गई। विश्व के अधिकांश देशों में वाल्मीकि रामायण के आधार पर राम के चरित्र पर विभिन्न नामों से रचनायें की गईं।

आज हम यदि किसी विषय पर कुछ रचना करना चाहते हैं तो हम सर्वप्रथम यह देखते हैं कि उस विषय पर पहले किसने क्या लिखा है, और उन पूर्वलिखित रचनाओं से प्रेरणा लेकर हम अपना लेख लिखते हैं। महर्षि वाल्मीकि तो आदिकवि हैं अतएव उनके समक्ष प्रेरणा देने वाली कोई अन्य रचना नहीं थी। वास्तव में वे संस्कृत तथा हिंदी साहित्य के महान प्रेरक हैं।

आदिकवि वाल्मीकि की रचना से ही प्रभावित होकर सन्त श्री तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना की जो कि आज हिंदू परिवार का अंग बन गई हैं। अतः महाकवि वाल्मीकि के बाद राम के चरित्र का द्वितीय लोकप्रिय वर्णन करने वाले का श्रेय सन्त श्री तुलसीदास जी को जाता है। तुलसीदास जी के पश्चात् भी अन्य हज़ारों रचयिताओं ने राम के चरित्र पर अनेक भाषाओं में रचनायें कीं। संपूर्ण लेख पढ़ें...


वर्तमान निर्वाचित लेख[संपादित करें]

श्रेणी के कुछ सैकड़ों पद और उनकें आंशिक संकलन।

गणित में, 1 − 2 + 3 − 4 + · · · एक अनन्त श्रेणी है जिसके व्यंजक क्रमानुगत धनात्मक संख्याएं होती हैं जिसके एकांतर चिह्न होते हैं। अनन्त श्रेणी के अपसरण का मतलब यह है कि इसके आंशिक योग का अनुक्रम (1, −1, 2, −2, ...) किसी परिमित मान की ओर अग्रसर नहीं होता है। बहरहाल, 18वीं शताब्दी के मध्य में लियोनार्ड आयलर 1 − 2 + 3 − 4 + · · · = 14 बताया। दशक 1980 के पूर्वार्द्ध में अर्नेस्टो सिसैरा, एमिल बोरेल तथा अन्यों ने अपसारी श्रेणियों को व्यापक योग निर्दिष्ट करने के लिए सुपरिभाषित विधि प्रदान की – जिसमें नवीन आयलर विधियों का भी उल्लेख था। इनमें से विभिन्न संकलनीयता विधियों द्वारा 1 − 2 + 3 − 4 + · · · का "योग" 14 लिख सकते हैं। सिसैरा-संकलन उन विधियों में से एक है जो 1 − 2 + 3 − 4 + ... का योग प्राप्त नहीं कर सकती, अतः श्रेणी एक ऐसा उदाहरण है जिसमें थोड़ी प्रबल विधि यथा एबल संकलन विधि की आवश्यकता होती है। श्रेणी 1 − 2 + 3 − 4 + ..., ग्रांडी श्रेणी 1 − 1 + 1 − 1 + ... से अतिसम्बद्ध है। आयलर ने इन दोनों श्रेणियों को श्रेणी 1 − 2n + 3n − 4n + · · · जहाँ (n यदृच्छ है), की विशेष अवस्था के रूप में अध्ययन किया और अपने शोध कार्य को बेसल समस्या तक विस्तारित किया। बाद में उनका ये कार्य फलनिक समीकरण के रूप में परिणत हुआ जिसे अब डीरिख्ले ईटा फलन और रीमान जीटा फलन के नाम से जाना जाता है। (विस्तार से पढ़ें...)