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ऊँ पर्यावरण, आध्यात्मिक एवं समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व का अग्रणी शास्त्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस (बीकानेर से प्रकाशित व प्रसारित) वर्ष 25अंक-24दि0 -9-8-13--- हमारा ध्येय ब्रह्माण्डिय पर्यावरण सुरक्षा व विश्व शान्ति एवं प्राणियों की स्वास्थ्य रक्षा करनी ही है। आप स्वस्थ रहेंगे तो धर्म-कर्म विद्यौपार्जन,धनोपार्जन करेंगे। घर में तुलसी पौध लगाने से सुख-शान्ति मिलती है। प्रकृति शक्ति पीठ, खेजड़ा एक्सप्रेस से तुलसी, पीपल पौध निःशुल्क ले जावें।

- आर्य संस्कृति, माता-पिता- गुरु, प्रकृति वनस्पति, तुलसी और पर्यावरण से जोड़ने का हमारा महायज्ञ सफलता की ओर अग्रसर है। आप आज ही शामिल होवे। पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस का कार्यालय एवं कर्म स्थल ब्रह्माण्ड का एकमात्र अनूठा तीर्थ स्थल ‘‘प्रकृति शक्ति पीठ’’ - सम्पूर्ण स्वतन्त्रता का उद्घोष ! ! (उदघोष ) सत्य तो सत्य ही होता है । जो स! ! सदियों धूल-पत्थरों के नीचे दबा रहकर भी बाहर आ ही जाता है। जगद्गुरु शंकराचार्य ‘मिडीया’ देश के कर्णधार -विद्वान-गीता प्रेस- आर.एस.एस. सिनेमा जगत बतावें हिन्दू शब्द कहाँ है ? देखे जी भरकर सबूत -जो अटल सत्य ही है । ब्रह्माण्डगुरु भगवान प्रजापति-अधिष्ठाता प्रकृति शक्ति पीठ ने आहवन कि- Brahmandguru Bhagwan Prajapati - Adhishthata, Prakriti Shakti Pith that - ॐ -ईश्वर रचित श्रष्टि उत्पति से, ॐ -ईश्वर रचित सतयुग से सनातन के-ईश्वर रचित वेदों व सनातन धर्म के किसी भी प्रमाणित शास्त्र में ‘‘हिदू’’ शब्द नहीं है ! - ४ -चारों वेदों -में --नहीं है -शब्द "हिन्दू "-!!! १-ऋग्वेद २-यजुर्वेद ३- सामवेद ४- अथर्ववेद -- ४-चारों उपवेदों --में --नहीं है -शब्द "हिन्दू "-!!! १- आयुर्वेद २- धनुर्वेद ३- गन्धर्ववेद ४-अर्थवेद ६ - छ :दर्शन शास्त्रों--में --नहीं है -शब्द "हिन्दू "-!!! १-मीमांसा दर्शन -----जैमिनी २-साख्य दर्शन ---------कपिल ३-न्याय दर्शन ------गॊतम ४-विशेषिक -----वाद ५-योग दर्शन ---पतंजलि ६-वेदांत दर्शन ---वेदव्यास - ६- छ :अंग में ---में --नहीं है -शब्द "हिन्दू "-!!! १- शिक्षा २- कल्प ३-व्याकरण ४- सिरुक्त ५-छंद ६-ज्योतिष ४- चार ब्राह्मण ग्रंथों --में --नहीं है -शब्द "हिन्दू "-!!! १- शतपथ ब्राह्मण २-ऐतरेय ब्राह्मण ३- ताण्डय ब्राह्मण ४- गोपथ ब्राह्मण १०३ -एक सॊ तीन उपनिषदों में से- (१३ -) तेरह -का महत्त्व है पर (११- )-ग्यारह ही ज्यादा महत्त्व रखते है ।-बाकी के दो का भी विशेष स्थान है ---- में --नहीं है -शब्द "हिन्दू "-!!! १-ईसोपनिषद २-केनोपनिषद ३- कन्ठोपनिषद ४-प्रश्नोपनिषद ५-मुण्डकोपनिषद ६-एतरेयोपनिषद ७- मांडूक्योपनिषद ८- छान्दोग्योपनिषद ९- तैतिरीयोपनिषद १०-वृहदोपनिषद ११-मैत्राणीय -आख्योपनिषद १२-श्वेताश्वर १३ कोषीतक मनुस्मृति भी मान्य ग्रन्थ है -- -में --नहीं है -शब्द "हिन्दू "-!!! - वाल्मीकी रामायण ---में --नहीं है -शब्द "हिन्दू "-!!! गीता -महाभारत ----में --नहीं है -शब्द "हिन्दू "-!!! - तुलसी -रामायण ----में --नहीं है -शब्द "हिन्दू "-!!! हमारी देव भाषा --संस्कृत -----में --नहीं है -शब्द "हिन्दू "-!!! - हमारी देवनागरी भाषा -------में --नहीं है -शब्द "हिन्दू "-!!!

शब्द ही ब्रह्म है। शब्द से संस्कार बनते हैं। ये ही सनातन सत्य है ! ॐ तत्सत ! जब हिन्दू शब्द हमारी संस्कृत और देनागरी भाषा का ही" हिन्दू " शब्द नहीं है -हम यदि पुराणोंकी बात भी करे तो उसमें भी हिन्दू शब्द नहीं है । आपने(प्राचीन साहित्य माधव दिग्विजय ) साहित्य बताया है न की शास्त्र -शास्त्रों के नाम हमने बता दिए है।- आप भी -हम भी साहित्य -पुस्तकें -उपन्यास -कहानिया में जो लिखेंगे वे आपके- हमारे विचार है - उसको सनातन धर्म -संस्कृति मान्यता नहीं देती । - -मनुस्मृति को भी मान्य शास्त्रों में मान लिया है --उसमें भी नहीं है --शब्द-" हिन्दू" ! पुराणों में भी - नहीं है --शब्द हिन्दू ! अब हम पुराणों के नाम बता रहे हैं ।

सही और गलत का फैसला तथाकथित हर किसी के लिखने से नहीं -अपितु हमारे मान्य वेद-उपनिषद् आदि मान्य शास्त्रों से होता है --- वैसे आप लाला लाजपतराय से बड़े हो तो और बात है -उन्होंने भी १८९८ में कहा था कि -हिन्दू शब्द भारतीय सनातन आर्यों को अपमानित करने के लिए इस्लामी आक्रंताओ ने जबरदस्ती थोपा है ।-जिसका आर्थ -गुलाम -चोर आदि ही है -ये सब सबूत - आप खेजडा एक्सप्रेस -९-८-११ व २४ ५- १३ में पढ़ सकते हों । -- --हिन्दू शब्द--- -९९७ ईसवी में महमूद गजनवी ने पहला डाका डाला था ऒर २७ डाके डाले थे -के साथ व बाद के आक्रान्ताओ ने भारतीय भू -भाग के सनातन आर्यों को- जैनों -बोद्धो को गाजर -मूली की तरह काटा था और हिन्दू बनाया _। बाद में जिन्होंने इस्लाम स्वीकार किया वे मुसलमान कहलाये । ये ही अटल ऐतिहासिक सत्य है । सदियों -वर्षों कीइस्लामी गुलामी में हमारे पूर्वज अपनी पहचान भूल गए - फिर इंग्लिश गुलामी में रहते -रहते तो सब कुछ-बदल गया । -क्योंकि -हिन्दू -मुस्लिम -एक्ट अंग्रेजों ने जो बना दिया । इस प्रकार हिन्दू शब्द हमारे गले में रह ही गया । स्वतंत्रता के बाद किसी ने शब्द कोष संभालने की कोशिश ही नहीं की -। हमारे शब्द कोषों में साफ लिखा है की -हिन्द -हिंदी -हिन्दू -हिन्दुस्थान आदि फारसी शब्द है । - -फारसी -उर्दू शब्द कोषोंमें हिन्दू का अर्थ बताया है ----गुलाम -आज्ञाकारी नॊकर-डाकू -चोर -राहजन आदि आदि। - अत हिन्दू न ही हमारा शब्द है - हिदू न ही हमारी जाति है -हिन्दू न ही हमारा धर्म है । यह अटल सत्य है -हमारा धर्म है -सनातन --जो प्राचीन से प्राचीन है -जिससे बाद के सभी धर्म प्रेरित-प्रभावित हुवे है । - ॐ शान्ति ॐ तत्सत ! संसार के सभी देशों के मूल नाम को ही अन्य भाषाओं में बोला जाता है। भारत वर्ष के चार (4 ) नाम क्यों है - भारत वर्ष के चार (4 ) नाम इस प्रकार है - (1)आर्यावर्त - हे महामानवों - भारत का मूल स्वाभीमान व संस्कृति है --आर्य संस्कृति व सनातन धर्म जो सत्युग से चली आ रही है। भारतीय भू भाग में अफगानिस्तान से नेपाल तक को आर्यवर्त कहा जाता था। (2) भारत वर्ष -शकुन्तला के पुत्र के नाम से भारत वर्ष कहा जाने लगा। शकुन्तला पुत्र भारत तो शेर के नाम से जाना जाता है । शेर के नाम से याद आया कि - वर्ष के बच्चे को गुलाम बनाकर आप कुत्ता -गंडक आदि कुछ भी कह सकते हो वर्षों गुलाम रहने पर शेर बड़ा हो जाने के बाद ही अपने आप को कुता ही समझने लगेगा - जब वह स्वतंत्र हो जाता है और उसे कोई कहे की तुम तो शेर हो, कुत्ते नहीं हो व तुरंत समझ जाता है और कुत्ता कहने वाले को चीर कर रख देता है । हिन्दुओं को सबूत देकर कह रहें हैं कि सतयुग से कलियुग तक किसी भी प्रमाणित शास्त्र में हिन्दू में शब्द नहीं है - ब्रह्मा -विष्णु -राम- कृष्ण आदि आर्य ही थे फिर भी..... (3) हिन्दुस्तान-तत्पष्चात् 997 ई. के बाद विदेषी मुसलमानी आंतकियों ने भारत के आर्यों पर अत्याचार करके जिन आर्यों ने इस्लाम स्वीकारा उन्हें मुसलमान, जो आर्य बने रहे उन्हें हिन्दू, गुलाम आदि शब्द से कहा जाने लगा और फिर हिन्दू से हिन्दुस्तान बना दिया - (हिन्दुस्तान - शब्द कोश में पटना-दिल्ली व मध्य भाग को ही हिन्दुस्तान कहा है) (4) इण्डिया - बाद में अंग्रेज आंतकियों ने भारत के पिछड़े पन, आदिवासी स्तर को देखकर इण्डियन कहा और इण्डिया बना दिया। ॐ तत्सत ! ॐ शान्ति ! हिन्दू’ शब्द का फारसी भाषा में मूल अर्थ है- चोर, डाकू, लुटेरे, राहजन, काला, गुलाम आदि। यह ऐतिहासिक सत्य है। फारसी भाषा के शब्द कोषों में हिन्दू का अर्थ - आगे ‘काला’ और ‘दास’ संकलन में फारसी और उर्दू भाषा के शब्द कोष यह वर्णन करते है कि यह अर्थहीन और घ्रणित ‘हिन्दू’ शब्द का अर्थ है- फारसी भाषा का शब्दकोष - ल्युजत-ए-किशवारी, लखनऊ 1964, चोर, डाकू, राहजन, गुलाम, दास। उर्दू फिरोजउल लजत-प्रथम भाग पृ. 615, तुर्की चोर, राहजन, लूटेरा: फारसी गुलाम, दास, बारदा (आज्ञाकारी नौकर), शियाकाम (काला) पेज 376 भार्गव शब्द कोष बारवां संकलन 1965 भी देखे) परसियन - पंजाबी (डिक्सनरी) शब्द कोश (पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला) भारतीय उपमहाद्वीप के निवासी, डाकू, राहजन, चोर, दास, काला, आलसी। (हिन्दुकुश - यानि भ्पदकन ज्ञपससमतए ैसंनहीजंतद्ध यहाँ असंख्य मौतें, मार-काट, हत्याएं हुई। लाला लाजपत राय ने अपने परिचय में - महर्षि दयानन्द के लाहौर 1898 के परिचय के बारे में कहा: लेखक के अनुसार कुछ लोग कहते है कि हिन्दू है जो कि सिन्धु का बिगड़ा हुआ नाम है लेकिन यह गलत है। परन्तु सिन्धु एक नदी का नाम है। किसी समुदाय का नाम नहीं है । यह सही है कि यह नाम असली आर्यन जाति को दिया गया है जो कि इस क्षेत्र में मुस्लिम आक्रान्ताओं द्वारा अपमानित करने के लिए इस नाम से पुकारी जाती थी। फारस में लेखक हमारे लेखक कहते है, इस शब्द का तात्पर्य ‘दास’ है और इस्लाम के अनुसार वो सारे लोग जिन्होंने इस्लाम को नहीं अपनाया था उनको दास बना दिया गया। ॐ तत्सत ! ॐ शान्ति !



हिन्दू का सच जाने ¨ !!! भारतीय संस्कृति के प्रमाणित शास्त्र पढ़ो । .आप शब्द कोष पढो ।हिन्दू के आगे पु 0 लिखा है यानि पुरुष लिंग है |.आगे ;फा0.लिखा है यानि हिन्दू शब्द फारसी ही है । .शब्द कोष में आप किसी भी शब्द के आगे उसे देख¨ .जैसे .हाहाकार .पुं0;सं 0 द्धघबराहट पुं0का मतलब है पुरुष लिंग ;सं 0 का मतलब है यह शब्द संस्कृत से लिया गया है । देखीय हिंदी के आगे. वि 0 .यानि विसर्ग है .आगे ;फा0 लिखा है यानि फारसी भाषा का है । hindu के आगे पु 0 लिखा है यानि पुरुष लिंग है .आगे ;फा0.लिखा है यानि हिन्दू शब्द फारसी ही है । हिकरना के आगे अ श्लिखा है यां यह शब्द अंग्रेजी का है । हिसा .स्त्री ंिलंग है. स .यानि यह शब्द संस्कृत का है। भारतीय संस्कृति के प्रमाणित शास्त्र पढों । -शब्द कोष पढो ।- -सच सामने आ जायेगा ! "( हमारे पूर्वजों के पूर्वज आर्य थे -ये तो" १७६ वर्ष पुराने "आर्य समाज "की अंट-संट बकवास से हम "आर्य समाज" को ही "आर्य" समझ गए -जबकि "-ब्रह्मा -विष्णु -महेश -राम- कृष्ण=ऋषि -मुनि " आदि सभी "आर्य संस्कृति -सनातन धर्म" के "आर्य" ही है !") हमारे पूर्वजों ने -शब्द कोष-व प्रमाणित शास्त्र न पढ़कर - तथा हमारे पूर्वजों के वंशजों ने भी शब्द कोष-व प्रमाणित शास्त्र न पढ़कर मान लिया कि "हिदू "शब्द हमारी भाषा का है - जबकि हिन्दू फारसी शब्द ही है -जिसका अर्थ -गुलाम -नॊकर अदि ही है । जो भूल हमारे पूर्वजों से हुई है -उसे आप नहीं सुधारोगे तो कौन सुधारेगा ? हिंदी भी फारसी शब्द है - इसका नाम होना चाहिए - "देवनागरी !" -हमसे समपर्क करों हम बताएँगे असली सच-व-

ॐ तत्सत ! ॐ शान्ति ! अब देखिये हमारे गुरुकुल कहां है ///????? जब अंग्रेज आक्रान्ता भारत में आये थे -अषिक्षा का अन्धकार था इसी पिछड़ेपन को देख कर हमें गवांर आदिवाषी की श्रेणी में रखकर कहा था- इंडियन। जिसका अर्थ पिछड़ा, आदिवासी आदि है और इंडिया बन गया । 18 वीं शताब्दी के बाद तो स्वतंत्रता के आन्दोलन की तैयारिया शुरू हो गई थी। यदि इन शताब्दियों में गुरुकुल होते तो स्वतन्त्रता तक अवषेष जरूर मिलते -इन १वर्षों में कोई बड़ा प्राकृतिक प्रकोप नहीं आया जिससे गुरुकुल जैसी सदियों से चली आ रही प्रथा नष्ट हो जावे -इन दिनों तो हमारे कई अग्रणीविद्वान षिक्षा के लिए अंग्रेजों से आग्रह कर रहे थे । गुरुकुल चाणक्य के काल में थे। 7 वीं सदी में हवेन्संग चीनी यात्री आया तब भी थे। इसी काल के आस -पास आदि जगद्गुरु शंकराचार्य ने अपनी विद्वता का डंका चारों ओर बजाया था । अब सोचने की बात यह है कि इन सदियों का इतिहास स्पष्ट नहीं है । अस्पष्ट सदियों में इस्लाम तलवार के बल पर फल- फूल रहा था। स्पष्ट इतिहास 997 ईस्वी से इस्लामिक आक्रान्ताओं से शुरू होता है। इन्होने कंधार (अफगानिस्थान )में एक लाख चालीस हजार (1,40,000)आर्यों -जैनों बोद्धों को गाजर -मुली की तरह काटा था -जबदस्ती मुस्लमान बनाये -गुलाम (हिन्दू ) बनाये। लड़के-लड़कियों को गुलाम -दास-बनाकर ले गए। ये क्रम ही चलता रहा। बाद में मैदानी इलाकों में आये और चक्रवर्ती राजा के अभाव में इन्होने यहाँ भी ऐसा ही किया। मैदानी इलाकों में पहाड़ों की एक कन्दरा से आना होता है यहाँ प्राय-भारतीय डाकुओं की भी लूटपाट होती थी -ये व्यापारियों को लूटते थे । इसी कन्दरा से एक बार इस्लामिक लूटेरे -लड़के -लड़कियों को ले जा रहे थे - तेज सर्दी पड़ी -सभी बच्चे मर गए । इसलिए इस जगह का नाम हिदुकुष पड़ा यानि मार -काट की जगह -यह अरबी लोगों का ग्रामीण भाषा का नाम है । इस्लामिक लूटेरे -लड़के -लड़कियों को अधिक पसंद करते थे -ये लड़के -लड़कियां तो इन्हें गुरुकुल से सहज ही मिल जाते थे । अब हस्तिनापुर कहो या इन्द्रप्रस्थ इसका अंतिम वारिश पृथ्वी राज चैहान भी मोहमद गोरी के समय गौरी को मरकर मार गया -बाद में कोई शक्ति शाली राजा था नहीं और इस्लाम ने अपने पैर जमा लिए -हमारे गुरुकुल नष्ट हो गए । हमने हमारे गुरुकुल तो खोये -हमारे ग्रंथों को भी इन्होने जला दिए चुन चुन कर - लेकिन हमारे बुजुर्गों ने ग्रंथों के ज्ञान को दूसरे तरीके से बचाया जो आज भी जीवित है। दन्त कथाओं में -लोक कथाओं में इस बात का ईसलाम व अंग्रेजों को पता हो गया तो इन्होने -इन्हें अंधविष्वास-ढोंगी - अप्रमाणित है जैसे शब्दों से प्रचार प्रसार किया। इस षडयंत्र को सफल बनाया हमारे अपनो ने जो अंग्रेजों के पीठु थे। प्रायः प्राय बुजुर्ग मर गए है परन्तु आज भी हमारे शास्त्रों का ज्ञान हमें मर ग्रामीणों में मिल ही जायेगा -बस थोड़ी मेहनत करनी होगी । ॐ तत्सत ! ॐ शान्ति ! महामानवों ने हिन्दुओं को बचाया -वरना सभी मुस्लमान हो जाते ! शब्द हिन्दू फारसी है। यह इस्लामिक गुलामी व अंग्रेजी गुलामी तक तो ठीक था -और हमारे पूर्वज शान से कहते थे किहम हिन्दू है -यानि गुलाम है पर - मुसलमान तो नहीं है -हम सनातनी है हम आर्य है। विदेषी इस्लामिक लुटेरों ने भारत को गुलाम बनाया -मार-काट की और हमारे कमजोर पूर्वज मुसलमान बन गए -बाकी गुलाम/हिन्दू बन गए । इस प्रकार कुछ-कुछ अन्तराल में जो मुस्लिम शासक जो गुलाम या हिन्दू थे उन्हें भी मुसलमान बनाने के लिए कुचक्र चलाते थे। इन कुचक्रों को असफल करने के लिए हमारे कई महायोद्धाओं ने जैसे - गुरु गोविन्द सिंह, महाराणा प्रताप, शिवाजी, आदि अनेकानेक महायोद्धा जो सनातन को बचाना चाहते थे। (नोट: मुस्लिम शासकों ने कई ऐसे घृणित कार्य किये जो यहां पर हम उजागर करना नहीं चाहते।) इन्ही बहादूर आर्यों -सनातनियों को बचाने के लिए -हमारे योद्धाओं -महापुरुषों -महामानवों -ऋषि -मुनियों ने अपना सर्वस्व बलिदान न्यौछावर कर दिया -लेकिन हिन्दुओं को बहादूर आर्यों -सनातनियों को मुसलमान नहीं बनने दिया -जो बन गए वे आज भी मुसलमान ही है यदि सभी उस समय मुसलमान बन जाते तो आज आर्य संस्कृति- सनातन धर्म का नामो निषान मिट जाता ! गन्धार की तरह जो आज अफगानिस्तान कहलाता है इसी प्रकार भारत भी आज सही रूप में हिन्दूस्तान बन जाता। शान्ति ! तत्सत ! शब्द हिन्दू का प्रभाव देखें । अब हम स्वतंत्र है -फिर भी शब्द हिन्दू के प्रभाव में है। आज देष के कर्णधार -अग्रणी -संत -षंकराचार्य आदि शब्दश्हिन्दूश्से ही ग्रसित है ? गुलामी के भाव प्रबल है -इसलिए ये लोग आज भी हिंदुस्थान-इंडिया -हिन्द -हिंदी में जी रहे है -वरना अब क्या आवष्यकता है -अंग्रेजों की नकल के संविधान की। कानून की। क्योंकि - शब्द हिन्दूश्का प्रभाव जो है - शब्द हिन्दूका प्रभाव जो है - इसी कारण -सभी के मन में चोर -डाकू तत्व प्रबल है और ?भ्रष्टाचार रुपी राक्षस का देष में तांडव हो रहा है । अतः शब्द हिन्दू का प्रभाव जो है - उससे मुक्त होवो । आर्य संस्कृति- सनातन धर्म के आर्य बनो। (नोट आर्य समाज के आर्य नहीं ये तो स्वयंभू अहंकारी है जो ईस्लाम से प्रभावित है ये लोग आर्य संस्कृति सनातन धर्म के मूल तीर्थ स्थल, पूजा पद्धति की जब चाहे आलोचना करते रहते है। इसी कारण लोग आर्य बनने की इच्छा रखते हुए भी हिन्दू बनना ही उचित समझते है।) -देखो चमत्कार ! आर्य का मतलब अर्थ है -श्रेष्ठ !-श्रेष्ठ ! -श्रेष्ठ !-श्रेष्ठ ! तभी हम कहते हैं -शब्द ही ब्रह्म है। शब्द से संस्कार बनते हैं। ये ही सनातन सत्य है ! ॐ तत्सत! ॐ शान्ति ! जय भारत -!! आर्य संस्कृति सनातन धर्मेव जयते ! हम वर्षों से सनातन धर्म-हिन्दू धर्म का विश्लेषण कर रहे थे 1979 में जगद्गुरु शंकराचार्य निरंजन देव ने हमसे हिन्दू धर्म की बात की थी तो हमारे शरीर में अजीब सी हलचल हुई थी चलते-चलते 1988 में दूरदर्शन ने अमरनाथ यात्रा को हिन्दू धर्म का बताया तो हमारे में चेतना आयी और दूरदर्शन को पत्र लिखा अमरनाथ सनातन धर्म का है। दिसम्बर 1992 में बुद्धिजीवी वर्ग व पत्रकारों की गोष्ठी में हमने पुछा था कि एक दैनिक पत्र को सम्बोधित करके कि बताओ हिन्दू धर्म का प्रवर्तक कौन है हो हल्ला हो गया? शोर हो गया? फिर चलते चलते हिन्दू पर शोध करके 21 मई 2011 को खेजड़ा एक्सप्रेस को कर्मस्थल कार्यालय प्रकृति शक्ति पीठ में हिन्दू शब्द पर गोष्ठी रखी। जो पांच घंटे चली और 24 मई 2011 से हिन्दूत्व की सच्चाई पर विधिवत खेजड़ा एक्सप्रेस में प्रकाशन शुरु कियाऔर 9- 8- 2011 को खेजड़ा एक्सप्रेस में हिन्दूत्व को सच्चाई और सबूतों के साथ छाप कर विधिवत हिन्दूत्व पर प्रथम भाग ‘‘भारत छोड़ो’’ आन्दोलन के दिन से ‘‘हिन्दूत्व छोड़ो’’ का महाअभियान का महायज्ञ शुरु किया जो अनवरत चलते-चलते आज 9-8-2013 को ‘‘सम्पूर्ण स्वतन्त्रता’’ के लिए पूर्णतया सच्चाई को उजागर करते हुए आगे बढ़ रहा है। आओ हमारे साथ आर्य संस्कृति के आर्य बनो श्रेष्ठ बनो! संकल्प लो कि हम आज से आर्य संस्कृति सनातन धर्म के आर्य है। सनातन है। तन-मन से सनातन धर्म की आर्य संस्कृति की रक्षा करेंगे। शब्द ही ब्रह्म है। शब्द से संस्कार बनते हैं। ये ही सनातन सत्य है ! ॐ तत्सत! ॐ शान्ति ! ॐ प्रेम! जय भारत -!! आर्य संस्कृति सनातन धर्मेव जयते ! - ब्रह्माण्डगुरु भगवान प्रजापति-अधिष्ठाता प्रकृति शक्ति पीठ ब्रह्माण्डगुरु- भगवान प्रजापति -अधिष्ठाता - -प्रकृति शक्ति पीठ. brahmandguru bhagawan prjapati -adhishthata -prikriti shakti पीठ

अधिक जानने के लिए -खेजडा एक्सप्रेस ९-८-२०११ व ९-८-२०१३ को पढ़े| http://bhagwanprajapati.webs.com/