वारली
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वारली आदिवासी भारत के महाराष्ट्र राज्य के कुछ भागों में पाये जाते हैं। वारली एक स्वदेशी जनजाति या आदिवासी हैं। ये महाराष्ट्र और गुजरात के सीमा के तटीय क्षेत्रों और आसपास के के पहाड़ी में रहते हैं। वारली जन् जाति की अपनी खुद कि हिंदू मान्यताओं, परंपराओं, संस्कृति - संक्रमण हैं जिनको उन्होंने अपनाया है। यह लोग वारली नाम की एक अलिखित भाषा में बात करते हैं जो की दक्षिणी क्षेत्र के भरतीय-आर्य भाषाओं में आती है।[1][2]
चित्रकला [संपादित करें]
वारली अपनी वारली चित्रकला के लिये भी प्रासीध है। वारली चित्रकला एक प्राचीन भारतीय कला है जो की महाराष्ट्र की एक जनजाति वारली द्वारा बनाई जाती है।