वर्जना

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वर्जना किसी ऐसे कार्य को करने के प्रति प्रबल निषेध है जिसके बारे में यह माना जाता है कि वो कार्य या तो साधारण व्यक्तियों के लिए बहुत पवित्र या फिर शापित है और इस तरह का व्यवहार व्यक्ति को अलौकिक दंड का पात्र बनाता है। इस तरह की रोक प्राय: हर समुदाय में उपस्थित है। सामाजिक विज्ञान में वर्जना शब्द का प्रयोग कुछ हद तक उन मानव गतिविधियों या प्रथाओं का निषेध है जिन्हें नैतिक अथवा धार्मिक मान्यताओं के आधार पर पवित्र अथवा निषिद्ध माना जाता है। "वर्जना भंग" को आमतौर पर किसी भी संस्कृति में आपत्तिजनक माना जाता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]