वंगारी माथे
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| वंगारी माथे | |
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| जन्म | वंगारी माथे 1 अप्रैल 1940 इहिथे गांव, टेटू प्रभाग, न्येरी जिला, केन्या |
| जातीयता | किकूयू |
| नागरिकता | केन्या |
| शिक्षा | बी.एस. जीव विज्ञान, एम.एस. जीव विज्ञान, पीएचडी वेटनरी एनाटोमी |
| शिक्षा प्राप्त की | बेनटिक्ट कालेज, पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय, नैरोबी विश्वविद्यालय |
| व्यवसाय | पर्यावरणविद्, राजनीतिक कार्यकर्ता |
वंगारी मुता माथे (जन्मः १ अप्रैल, १९४० गांव इहिथे, प्रभाग टेटू, जिला न्येरी, केन्या) एक केन्याई पर्यावरणविद् और राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अमेरिका और केन्या में उच्चशिक्षा अर्जित की। १९७० के दशक में माथे ने ग्रीन बेल्ट आंदोलन नामक गैर सरकारी संगठन की नीव डालकर पौधरोपण, पर्यावरण संरक्षण, और महिलाओं के अधिकारों की ओर ध्यान दिया। २००४ में "सतत विकास, लोकतंत्र और शांति के लिए के लिए अपने योगदान" की वजह से नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली अफ्रीका महिला और पहली पर्यावरणविद् बनी। वर्ष २००५ में इन्हें जवाहर लाल नेहरू पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
