लालू प्रसाद यादव
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लालू प्रसाद यादव (जन्म: १९४८) भारत के बिहार प्रांत के राजनीतिज्ञ है। इन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री पद के प्रथम दफा शपथ १० मार्च १९९० को और अगले कार्यकाल के लिये ०४ अप्रैल १९९५ को ली। वे भारत के केन्द्रिय मंत्रिमण्डल मे केन्द्रीय रेल मंत्री भी रहे हैं। श्री यादव भारत के सबसे सफल रेलमन्त्रियों में गिने जाते हैं।
अनुक्रम |
[संपादित करें] जीवन एवं राजनीतिक सफर
बिहार के गोपालगंज में एक यादव परिवार में जन्मे यादव ने राजनीति की शुरूआत जयप्रकाश आन्दोलन से की जब वे एक छात्र नेता थे और उस समय के राजनेता सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के काफी करीबी रहे थे। उन्होंने वकालत भी की हुई है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] 1977 में आपातकाल के पश्चात् हुए लोक सभा चुनाव में लालू यादव जीते और पहली बार 29 की उम्र में लोकसभा पहुँचे। 1980 से 1989 तक वे दो बार विधानसभा के सदस्य रहे और विपक्ष के नेता पद पर भी रहे। 1990 में वे बिहार के मुख्यमंत्री बने एवं 1995 में भी भारी बहुमत से विजयी रहे। लालू यादव जी के जनाधार मे एमवाई (MY) यानि मुस्लिम और यादव फैक्टर का बड़ा योगदान है और उन्होंने इससे कभी इन्कार भी नहीं किया है।
1997 में जब केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने उनके खिलाफ चारा घोटाला मामले में आरोप-पत्र दाखिल किया तो उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटना पड़ा। अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सत्ता सौंपकर वे राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष बने रहे, और अपरोक्ष रूप से सत्ता की कमान भी उनके हाथ ही रही। चारा मामले मे लालू यादव को जेल भी जाना पड़ा, और उनको कई महीने तक जेल मे भी रहना पड़ा।
2004 लोकसभा चुनाव में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के सत्ता में आने के साथ ही लालू यादव रेलमन्त्री बने। यादव के कर्यकाल में ही दशकों से घाटे में चल रही रेल सेवा फिर से फायदे में आई। भारत के सभी प्रमुख प्रबंधन संस्थानों के साथ-साथ दुनिया भर के बिजनेस स्कूलों में लालू यादव के कुशल प्रबंधन से हुआ भारतीय रेलवे का कायाकल्प एक शोध का विषय बन गया है।
[संपादित करें] शौक
लालू प्रसाद यादव ने मुख्यतः राजनीतिक और आर्थिक विषयों पर काफी लेख लिखे हैं। विभिन्न आन्दोलनकारियों की जीवनियाँ पढना और राजनीतिक चर्चा करना उनका शौक है। वे बिहार क्रिकेट एसोसियेशन के अध्यक्ष भी है। लालू यादव ने एक फिल्म में भी काम किया जिसका नाम उनके नाम पर ही है।
[संपादित करें] लालू का अन्दाज
अपनी बात कहने का लालू यादव का खास अन्दाज है, यही अन्दाज लालू यादव को बाकी राजनेताओं से अलग करता है। पत्रकार बस इन्तजार करते रहते हैं कि कब लालू यादव कुछ बोलें और ये लोग छापे। बिहार की सड़को को हेमा मालिनी के गालों की तरह बनाने का वादा हो या रेलवे मे कुल्हड़ की शुरुवात, लालू यादव हमेशा से ही सुर्खियों मे रहे। इन्टरनेट मे आप लालू यादव के लतीफों का अलग ही सेक्शन पायेंगे।
[संपादित करें] आलोचना
[संपादित करें] बाह्य सूत्र
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