रेती

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रेती

रेती, किसी जलनिकाय के अन्दर या उससे बाहर की ओर विस्तारित होने वाला, एक रेखीय (कुछ हद तक) स्थलरूप है जिसके संघटक आम तौर पर रेत, गाद या छोटे कंकड़ होते हैं। एक स्पिट या संकरी रेती, रेती का एक प्रकार है। रेतियों की विशेषता इनका लंबा और संकीर्ण (रैखिक) होना है और इनकी रचना उन स्थानों पर होती है जहाँ कोई जलधारा या समुद्रीधारा दानेदार (कणिकामय) पदार्थों के निक्षेपण को प्रेरित करती है। इन निक्षेपणों के फलस्वरूप उस स्थान विशेष पर जल उथला हो जाता है और धीरे-धीरे रेती का निर्माण होता है।

रेतियां, समुद्र, झील या नदी सब स्थानों पर पाई जाती हैं। कई बार जब एक रेती किसी झील से समुद्र को अलग करती है तब इसे आयर कहा जाता है। रेतियां मुख्यत: रेत या बालू से बनी होती है इसीलिए इन्हें रेती कहा जाता है, पर इनके संधटन में वो सभी दानेदार वस्तुएं शामिल होती है जिन्हें कोई धारा बहा कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा सकती है (जैसे मिट्टी, गाद, कंकड़, बटिया, समुद्री कंकड़ और कई बार तो गोलाश्म भी)। रेती की निर्माण सामग्री के कणों का आकार लहरों के आकार और जलधारा के वेग पर निर्भर करता है पर, निर्माण सामग्री की उपलब्धता जिसे कोई जलधारा स्थानांतरित करती है भी, समान रूप से महत्वपूर्ण है।

संदर्भ[संपादित करें]