रुंगा-कुटा विधियाँ

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संख्यात्मक विश्लेषण में रुंगा-कुटा विधियाँ (Runge–Kutta methods) साधारण अवकल समीकरणों को हल करने की पुनरावृत्तिमूलक विधियाँ हैं। इनका विकास जर्मनी के गणितज्ञों सी रुङ्गा तथा एम डब्ल्यू कुटा ने १९०० ई के आसपास किया था। यह एक विधि नहीं बल्कि इसमें कई विधियाँ हैं।

रुंगा-कुटा विधि[संपादित करें]

इसे 'क्लासिकल रुंगा-कुटा विधि' या प्रायः "RK4" भी कहा जाता है। यह चार आर्डर वाली विधि है।

मान लीजिए कि एक साधारण अवकल समीकरण (आरम्भिक मान समस्या) निम्नलिखित है:

 \dot{y} = f(t, y), \quad y(t_0) = y_0.

यह विधि निम्नलिखित सूत्र से समझी जा सकती है:

\begin{align}
y_{n+1} &= y_n + \tfrac{1}{6} h\left(k_1 + 2k_2 + 2k_3 + k_4 \right)\\
t_{n+1} &= t_n + h \\
\end{align}

n = 0, 1, 2, 3, . . . , तथा


\begin{align}
k_1 &= f(t_n, y_n),
\\
k_2 &= f(t_n + \tfrac{1}{2}h , y_n +  \tfrac{h}{2} k_1),
\\
k_3 &= f(t_n + \tfrac{1}{2}h , y_n +   \tfrac{h}{2} k_2),
\\
k_4 &= f(t_n + h , y_n + h k_3).
\end{align}
[1]

h का उचित धनात्मक मान लेकर इस विधि को बारबार प्रयोग करके t के किसी भी मान के लिए y का सन्निकट मान निकाल सकते हैं।

स्पष्‍ट रुंगा-कुटा विधियाँ (Explicit Runge–Kutta methods)[संपादित करें]

ये विधियाँ RK4 के सामान्यीकृत रूप हैं। यह निम्नलिखित रूप में है:

 y_{n+1} = y_n + \sum_{i=1}^s b_i k_i,

जहाँ

 k_1 = hf(t_n, y_n), \,
 k_2 = hf(t_n+c_2h, y_n+a_{21}k_1), \,
 k_3 = hf(t_n+c_3h, y_n+a_{31}k_1+a_{32}k_2), \,
 \vdots
 k_s = hf(t_n+c_sh, y_n+a_{s1}k_1+a_{s2}k_2+\cdots+a_{s,s-1}k_{s-1}). [2]
(टिप्पणी: अलग-अलग पुस्तकों में यही समीकरण अलग-अलग तरह से पारिभाषित किया हुआ मिलता है किन्तु वे इसके तुल्य ही होते हैं।)

किसी विशेष विधि को प्राप्त करने के लिए पहले s (चरणों की संख्याँ) तय करनी पड़ती है। इसके अनुसार गुणांक aij ( 1 ≤ j < is), bi ( i = 1, 2, ..., s) और ci ( i = 2, 3, ..., s) तय किए जाते हैं। मैट्रिक्स [aij] को रुंगा-कुटा मैट्रिक्स कहते हैं। bi तथा ci को भार (weights) एवं नोड (nodes) कहते हैं।[3] ये संख्याएँ निम्नलिखित सारणी के रूप में व्यवस्थित की जातीं हैं जिसे 'बूचर टेबुल' कहते हैं।

0
 c_2  a_{21}
 c_3  a_{31}  a_{32}
 \vdots  \vdots  \ddots
 c_s  a_{s1}  a_{s2}  \cdots  a_{s,s-1}
 b_1  b_2  \cdots  b_{s-1}  b_s

रुंगा कुटा विधि एकरूप (consistent) होगी यदि

\sum_{j=1}^{i-1} a_{ij} = c_i\ \mathrm{for}\ i=2, \ldots, s.

यदि हम किसी विधि को p आर्डर वाला बनाना चाहते हैं तो कुछ और आवश्यकताएँ इसमें जुड़ जाती हैं। उदाहरण के लिए 2-चरण तथा 2-आर्डर की विधि प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित शर्त आएगी:

b1 + b2 = 1, b2c2 = 1/2, and a21 = c2.[4]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Press et al. 2007, पृष्ठ 908; Süli & Mayers 2003, पृष्ठ 328
  2. Press et al. 2007, पृष्ठ 907
  3. Iserles 1996, पृष्ठ 38
  4. Iserles 1996, पृष्ठ 39