रिंगटोन

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रिंगटोन अथवा रिंग टोन किसी टेलीफोन पर आने वाली कॉल अथवा टेक्स्ट सन्देश का संकेत देने वाली ध्वनि को कहा जाता है. हालांकि शब्दशः यह कोई टोन (स्वर) नहीं होती, आजकल इस शब्द का सर्वाधिक प्रयोग मोबाइल फ़ोनों पर रुचि के अनुसार चुनी जा सकने वाली ध्वनियों के लिए किया जाता है.

पृष्ठभूमि[संपादित करें]

अपने नेटवर्क द्वारा आने वाली कॉल को इंगित किये जाने पर फ़ोन "रिंग" करता है तथा अपने प्रयोगकर्ता को इसकी सूचना देता है. लैंडलाइन टेलीफोन के लिए कॉल संकेत ऐसे स्विच अथवा एक्सचेंज द्वारा उत्पन्न विद्युत् करेंट हो सकता है जिससे वह जुड़ा हो. मोबाइल फोनों के लिए, नेटवर्क फोन को आने वाली कॉल का संकेत भेजता है.

टेलीफोन "रिंग" किसी आने वाली टेलीफोन कॉल को दर्शाने के लिए की जाने वाली ध्वनि होती है. इस शब्द की उत्पत्ति इस तथ्य से मानी जाती है जब शुरूआती टेलीफोनों में घंटियां तथा विद्युत्-चुम्बकीय क्लैपर लगे होते थे जिनसे रिंग ध्वनि उत्पन्न होती थी. पूर्वोल्लेखित विद्युत् संकेत विद्युत्-चुम्बकों को शक्ति देते थे जो तीव्र गति से क्लैपरों को खींचते तथा छोड़ते थे जिनसे घंटियां बजती थीं. यह विद्युत-चुम्बकीय घंटी प्रणाली अभी भी व्यापक उपयोग में है. उपभोक्ता के टेलीफोन को भेजा जाने वाला रिंगिंग संकेत उत्तरी अमेरिका में 90 वोल्ट एसी तथा 20 हर्ट्ज़ आवृत्ति का होता है. यूरोप में यह 60-90 वोल्ट एसी के आसपास तथा 25 हर्ट्ज़ आवृत्ति का होता है.

हालांकि उत्पन्न ध्वनि को अभी भी "रिंग" ही कहा जाता है, आधुनिक टेलीफोन इलेक्ट्रौनिक प्रयोग से द्रुत उतार-चढ़ाव के साथ संगीत, चहचहाने की अथवा अन्य ध्वनियां उत्पन्न करते हैं. रिंग संकेतों की विविधता का प्रयोग आने वाली कॉल की विशेषताओं के लिए किया जा सकता है (उदाहरण के लिए कम समय अंतराल के साथ की रिंग किसी विशेष नंबर से आने वाली कॉल को दर्शाने हेतु प्रयोग की जा सकती है).

कोई रिंगिंग संकेत एक विद्युत टेलीफोन सम्बन्धी संकेत होता है जो टेलीफोन द्वारा प्रयोगकर्ता को आने वाली कॉल की सूचना देता है. पीओटीएस टेलीफोन प्रणाली में ऐसा करने के लिए रिंगिंग करेंट भेजा जाता है, जो लगभग 100 वोल्ट का कम्पायमान डीसी करेंट [संयुक्त राज्य अमेरिका में 90 वोल्ट एसी तथा 20 हर्ट्ज़] होता है. कम्पायमान डीसी में क्रमिक पोलैरिटी नहीं होती है; यह शून्य से अधिकतम वोल्टेज तथा वापस शून्य तक कम्पायमान होता है. आजकल इस संकेत को अपनी यात्रा के अधिकांश भाग में डिजिटल रूप में भेजा जा सकता है, सिर्फ अंत में उसे रिंगिंग करेंट के रूप में परिवर्तित किया जाता है क्योंकि अधिकांश लैंडलाइन फोन पूर्णतया डिजिटल नहीं होते हैं. पुराने फ़ोनों में यह वोल्टेज फोन की घंटी बजाने के लिए उच्च-इम्पीडेंस वाले विद्युत्-चुम्बकों के लिए ट्रिगर का कार्य करता था.

20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तथा इसके बाद के फिक्स्ड फोन इस रिंगिंग करेंट वोल्टेज का पता लगा कर वार्ब्लिंग टोन को इलेक्ट्रौनिक्स की सहायता से ट्रिगर कर देते हैं. मोबाइल फोन पूरी तरह से डिजिटल होते हैं, इसलिए रिंग करने के लिए वे सेल बेस स्टेशनों के साथ संवाद के उपयोग में लायी जाने वाली प्रोटोकॉल से संकेत प्राप्त करते हैं.

पीओटीएस स्विचिंग प्रणाली में टेलीफोन हैंडसेट को स्विच हुक से उठाये जाने पर लाइन का इम्पीडेंस लगभग 600 ओम्स तक कम हो जाता है, इसे रिंग का "ट्रिप हो जाना" कहा जाता है. यह संकेत है कि टेलीफोन कॉल का जवाब दिया गया है, और टेलीफोन एक्सचेंज तत्काल लाइन से रिंग संकेत हटा कर कॉल जोड़ देता है. यही "रिंग-ट्रिप" अथवा "प्री-ट्रिप" नामक समस्या का कारण बनता है, यह तब होती है जब लाइन के रिंगिंग संकेत का सामना कंडक्टरों के बीच अति-निम्न प्रतिरोध से होता है, इसमें प्रयोगकर्ता के टेलीफोन के बजने से पहले ही रिंग ट्रिप हो जाती है (बहुत कम समय के लिए); यह बारिश के मौसम तथा गलत रूप से बिछाये गए तारों के मामले में सामन्य रूप से होता है.

शोध से पता चला कि लोग फ़ोन उठाने से पहले इंतजार करते हैं की वह बजना बंद हो जाये.[कृपया उद्धरण जोड़ें] इस समस्या से निपटने के लिए अंतराल की व्यवस्था की गयी, जिसके फलस्वरूप रिंग-विराम-रिंग का स्वरक्रम स्वरुप सामने आया जिसका प्रयोग आज-कल होता है. शुरूआती पार्टी लाइन प्रणालियों में इसका स्वरुप एक मोर्स कोड अक्षर के रूप में किया जाता था जिससे यह पता लग सके कि फोन किसको उठाना है, परन्तु अब, एकल लाइनों के साथ इसका एकमात्र स्वरुप एकल रिंग तथा दोहरी रिंग है, जो कि मूल रूप से मोर्स कोड अक्षर T (डैश) तथा M (डैश डैश) थे.[तथ्य वांछित]

रिंगिंग पैटर्न को रिंग स्वरक्रम के रूप में जाना जाता है. यह केवल पीओटीएस फिक्स्ड फोन पर लागू होता है, जहां उच्च वोल्टेज रिंग संकेत स्विच ऑन तथा ऑफ करके रिंगिंग पैटर्न उत्पन्न किया जाता है. उत्तरी अमेरिका में, मानक रिंग स्वरक्रम "2-4" है, जिसमें दो सेकण्ड की रिंग के बाद 4 सेकण्ड का मौन होता है. ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में, रिंग स्वरक्रम 400एमएस ऑन, 200एमएस ऑफ, 400एमएस ऑन, 200एमएस ऑफ है. ये पैटर्न विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न हो सकते हैं, तथा विश्व के अलग-अलग भागों में अन्य पैटर्न प्रयोग किये जाते हैं.

पार्टी लाइन रिंगिंग से सम्बंधित एक सेवा कुछ छोटे कार्यालयों तथा घर में बने कार्यालयों में पुनर्प्रचलित हो रही है जिससे फैक्स मशीनें तथा टेलीफोन एक ही लाइन का प्रयोग करते हुए अलग-अलग नंबर रख सकते हैं; यह क्लास वैशिष्ट्य मूल रूप से विभिन्न रिंगों का प्रयोग करता है, हालांकि कैरियर कम्पनियां इसके लिए ट्रेडमार्क नामों का प्रयोग करती हैं, जैसे "स्मार्ट रिंग", "डुएट", "मल्टिपल नंबर", "आइडेंट-ए-कॉल" तथा "रिंगमास्टर" आदि. यह सुविधा एक ही भौतिक लाइन का प्रयोग करते हुए उससे जुड़े दूसरे फोन को भिन्न नंबर प्रदान करने के लिए भी उपयोग की जाती है, इसको मुख्य रूप से एक ही कमरे में रहने वालों अथवा किशोरों द्वारा प्रयोग किया जाता है, ऐसे मामले में कम्पनियां इसके विपणन के लिए "तीन लाइन" नाम का प्रयोग करती हैं.

कॉलर आईडी संकेत पहले तथा दूसरे रिंगिंग संकेत के बीच में मौन समय अंतराल के दौरान भेजे जाते हैं.

बाधित रिंग संकेतों को ध्यान आकृष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया था तथा अध्ययनों से पता चला कि दो टोन वाली सविराम रिंग आसानी से सुनाई पड़ती है.[कृपया उद्धरण जोड़ें] इसका पार्टी लाइन में प्रयोग की जाने वाली कोडेड रिंग से कोई सम्बन्ध नहीं है.

इतिहास[संपादित करें]

500 तथा 2500 मॉडल के लैंडलाइन टेलीफोन सेटों में पाया जाने वाला "C" प्रकार के रिंगर में एटीएंडटी (AT&T) ने सात अलग प्रकार की घंटियों के संयोजन दिए. ये घंटियां क्षीण श्रवण शक्ति वाले लोगों के लिए "विशिष्ट टोन" का कार्य करतीं थीं, साथ ही कई फ़ोनों के साथ में रखे होने पर यह पहचानना आसान बनाती थीं कि कौन सा फोन बज रहा है.[1] "बेल चाइम" भी प्रस्तुत की गयी थी, जिसे दरवाजे की घंटी की तरह अथवा साधारण फोन की तरह बजने के लिए सेट किया जा सकता था.

वर्ष 1975 के एक एफसीसी निर्णय ने अन्य निर्माताओं को फोन लाइन से जोड़े जा सकने वाले उपकरण बनाने की अनुमति दी, इसके बाद निर्माताओं ने सहयंत्र के रूप में टेलीफोन रिंगर बनाने प्रारंभ कर दिए जो यांत्रिक के स्थान पर इलेक्ट्रौनिक ध्वनियां तथा संगीत बजाते थे. लोगों ने भी अपने रिंगर बनाने प्रारंभ कर दिए जो संगीतमय बधाई पत्र की चिप का प्रयोग करते हुए कॉल आने पर संगीत बजाते थे.[2] 1989 की एक पुस्तक में ऐसा ही एक रिंगर वर्णित था जिसमें एक खिलौने का कुत्ता था जो कॉल आने पर भौंकता तथा गुर्राता था.[3] इस प्रकार, इलेक्ट्रॉनिक टेलीफोन रिंगर ही मानक बन गए. इनमें से कुछ रिंगर एकल धुन बजाते थे तो कुछ दो या तीन धुनों का एक क्रम अथवा मधुर संगीत बजाते थे.[4]

पहला ऐसा व्यावसायिक मोबाइल फोन जिसमें रुचि के अनुसार सेट की जा सकने वाली रिंग टोन थीं, जापानी एनटीटी डोकोमो डिजिटल मोवा एन103 हाइपर था जिसे एनईसी ने बनाया था तथा इसे मई 1996 में जारी किया गया था.[5] इसमें मिडी (MIDI) प्रारूप में कुछ प्रीसेट गाने थे. सितंबर 1996 में, आईडीओ, वर्तमान में एयू, ने डेंसो निर्मित डिजिटल मिनिमो डी319 की बिक्री प्रारम्भ की. यह ऐसा पहला मोबाइल फोन था जिसमें कोई उपयोगकर्ता प्रीसेट गानों के स्थान पर मौलिक संगीत डाल सकता था. ये फोन जापान में लोकप्रिय हो गए: 1998 में प्रकाशित एक पुस्तक[6] जिसमें विस्तारपूर्वक वर्णन था कि फोन में कैसे लोकप्रिय गानों के मुखड़े बना कर रूचि के अनुसार बजाया जा सकता है, की 35 लाख से भी अधिक प्रतियां बिकीं.

पहली डाउनलोड की जा सकने वाली रिंगटोन सेवा का निर्माण तथा वितरण 1998 के वसंत में फिनलैंड में हुआ जब रेडियोलिंजा (फिनलैंड की एक मोबाइल प्रदाता कंपनी जिसे अब एलिसा के नाम से जाना जाता है) ने हारमोनियम नाम की अपनी सेवा प्रारंभ की, इसका आविष्कार वेसा-मत्ती पनानेन ने किया था.,[7] हारमोनियम में व्यक्तियों के लिए मोनोफोनिक रिंगटोंस बनाने के साधन के साथ ही उन्हें किसी मोबाइल सेट पर एसएमएस के द्वारा ओवर-द-एयर (ओटीए) भेजने की सुविधा भी थी. नवंबर 1998 में, डिजिटलफोन समूह (सॉफ्टबैंक मोबाइल) ने ऐसी ही सेवा जापान में भी प्रारंभ कर दी.

रिंगटोन निर्माता[संपादित करें]

एक रिंग टोन निर्माता उपयोगकर्ता को उनके निजी संगीत संग्रह से एक गीत लेकर उनके द्वारा चुने गए अंश को अलग कर उनके मोबाइल पर भेजने की सुविधा प्रदान करता है. फ़ाइलें प्रत्यक्ष कनेक्शन (जैसे यूएसबी केबल), ब्लूटूथ, टेक्स्ट संदेश या ईमेल द्वारा मोबाइल फोन पर भेजा जा सकता है.

शुरूआती रिंगटोन निर्माता हारमोनियम था, इसका विकास एक फिनिश कम्प्यूटर प्रोग्रामर वेसा-मत्ती पनानेन ने किया था तथा इसे 1997 में नोकिया स्मार्ट मैसेजिंग के साथ प्रयोग किये जाने के लिए जारी किया गया था.[8][9]

कुछ प्रदाता अपने प्रयोगकर्ताओं को अपनी स्वयं की संगीत धुनें बनाने की अनुमति देते हैं जिन्हें या तो "संगीत कम्पोज़र" की सहायता से अथवा एक सेम्पल/लूप अरेंजर की सहायता से बनाया जा सकता है (जैसे कि सोनी एरिक्सन के कई फ़ोनों में म्यूजिकडीजे होता है). ये अक्सर केवल एक विशेष फोन मॉडल या ब्रांड में उपलब्ध एनकोडिंग फौरमैट का उपयोग करते हैं. अक्सर अन्य फॉरमैट जैसे मिडी या एमपी3 भी समर्थित होते हैं; रिंगटोन के रूप में प्रयोग किये जाने से पहले इन्हें फोन पर डाउनलोड किया जाना आवश्यक होता है.

जब कोई एक रिंगटोन खरीदता है, तब एक एग्रीगेटर (कंपनी जो कि रिंगटोन बेचती है) या तो अपनी धुन बनाती है या पहले से बनी धुनों को मिला कर उपलब्ध कराती है. रिंगटोन के बनने के पश्चात इसे इसे किसी विशिष्ट फ़ाइल फॉरमैट में डाल कर व्यक्ति के मोबाइल फोन पर एसएमएस के द्वारा भेज दिया जाता है.यदि कंपनी पहले से बनी धुनों का प्रयोग करती है तो उसे उसके स्वामी को स्वत्व शुल्क का भुगतान करना होता है. सारा धन उस गीत के स्वामी को नहीं मिलता है; एक बड़ा हिस्सा सेलफोन प्रदाता को भी दिया जाता है.[10]

2005 में "स्मैशदीटोंस" (अब इसका नाम "मोबाइल17" है), पहली तृतीय पक्ष प्रदाता बनी जो रिंगटोन को ऑनलाइन बनाने की अनुमति देती थी और इसके लिए डाउनलोड किये जा सकने वाले सॉफ्टवेयर अथवा डिजिटल ऑडियो एडिटर की आवश्यकता नहीं होती थी. बाद में, एप्पल के आईफोन ने प्रयोगकर्ताओं को फोन की आईट्यून लाइब्रेरी के लिए ख़रीदे गए किसी भी गीत से रिंगटोन बनाने की अनुमति दी[11] पर इसमें कुछ कठिनाइयां थीं, जिसमें 40 सेकण्ड की सीमा शामिल थी, साथ ही फ़ाइल का एएसी फॉरमैट में होना तथा इसका नाम एक्सटेंशन .m4r होना अनिवार्य था.

वेबसाइटों की एक श्रृंखला उपलब्ध है जिनके द्वारा प्रयोगकर्ता डिजिटल संगीत अथवा अन्य ध्वनि फाइलों से रिंगटोन बना सकते हैं; ये साइटें सीधे ही उनके मोबाइलों पर उन्हें अपलोड कर देती हैं तथा गीतों की संख्या की कोई उच्चतम सीमा नहीं है.

रिंगटोन व्यापार[संपादित करें]

इस तथ्य ने, कि उपभोक्ता रिंगटोन के लिए $3 तक खर्च करने को तैयार हैं, "मोबाइल संगीत" को संगीत उद्योग का एक विशेष रूप से लाभकारी भाग बना दिया है.[12] अनुमान भिन्न हैं: मैनहट्टन स्थित विपणन और परामर्श फर्म कौन्सेक्ट का अनुमान है कि 2004 में रिंगटोनों से होने वाली वैश्विक बिक्री 4 बिलियन डॉलर की थी.[9] फॉर्च्यून पत्रिका के अनुसार, 2005 में रिंगटोन की बिक्री से दुनिया भर में 2 बिलियन डॉलर की कमाई की गयी.[13] साउंड फ़ाइलों की वृद्धि ने भी रिंगटोन को लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया. 2003 में, उदाहरण के लिए, जापानी रिंगटोन बाजार, जो कि अकेले ही 900 मिलियन यूएस डॉलर का था, में साउंड फ़ाइलों की बिक्री 66.4 मिलियन यूएस डॉलर की रही.[14] इसके अलावा 2003 में भी, वैश्विक मोबाइल रिंगटोन उद्योग 2.5 से 3.5 बिलियन यूएस डॉलर का था.[14] 2009 में, अनुसंधान फर्म एसएनएल कगन के अनुमान के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका में रिंगटोनों की बिक्री शीर्ष पर 2007 में 714 मिलियन डॉलर के साथ पहुंची.[15] एसएनएल कगन ने अनुमान लगाया कि संयुक्त राज्य में इनकी बिक्री 2008 में गिर कर 541 मिलियन डॉलर हो गयी, इसका आंशिक कारण यह था कि प्रयोगकर्ताओं ने स्वयं की रिंगटोंस बनाना सीख लिया था.[12]

बिलिंग विवाद[संपादित करें]

रिंगटोन व्यापार ने उद्योग की व्यापार प्रथाओं के सम्बन्ध में विवाद को प्रेरित किया है.

मुकदमे[संपादित करें]

जेम्स्टर[संपादित करें]

अप्रैल 2005 में, कालाहन की विधि फर्म मैकक्यून व विलिस ने सैन डिएगो निवासी पिता एवं उनकी दस वर्षीया पुत्री की और से जेम्स्टर! के विरुद्ध एक क्लास एक्शन वाद दाखिल किया.[16] इस वाद में आरोप लगाया गया कि जेम्स्टर! ने सेल्युलर टेलीफोन ग्राहकों को कपटपूर्ण व भ्रमित करने वाले विज्ञापनों के द्वारा धोखा दिया है. वादियों का तर्क था कि कहे जा रहे विज्ञापनों में विज्ञापन का टेक्स्ट सन्देश से उत्तर देने वाले ग्राहकों को एक निःशुल्क रिंगटोन देने का प्रस्ताव था, पर उन्होंने प्रयोगकर्ताओं को यह नहीं बताया कि ऐसा करने से वे एक मासिक सेवा के ग्राहक बन जायेंगे.[17] इस वाद में चार लोग और जुड़ गए तथा नवम्बर 2009 में इसका निपटारा कर दिया गया.[18][19]

सेटरफील्ड बनाम साइमन एवं स्कस्टर[संपादित करें]

जून 2007 में सेटरफील्ड बनाम साइमन एवं स्कस्टर मुकदमा संख्या सी 06-2893 सीडब्ल्यू, 2007 यूएस जिला लेक्सिस (एन.डी. कैल. जून 26, 2007) में क्लास एक्शन में एक निर्णय (जिसे बाद में बदल दिया गया) हुआ, इसमें मोबाइल फ़ोनों पर एक एसएमएस का प्रसारण शामिल था जो एक लोकप्रिय लेखक के "मोबाइल क्लब" का प्रसार करता था, जिसे एक सात वर्षीय बच्चे द्वारा प्रयोग किया जाता था. बचाव पक्ष, वह प्रकाशन कंपनी जिसने उस प्रसार संदेशों का अनुबंध लिया था तथा वह प्रदाता कंपनी जिसने वास्तव में वह सन्देश भेजा था, ने तर्क दिया कि नामांकित ग्राहक, जो कि उस बच्चे की माता थी, ने उन प्रसार किये जाने वाले संदेशों को प्राप्त करने की स्वीकृति दी थी, ऐसा करने के लिए उसने निःशुल्क रिंगटोन प्राप्त करने के लिए एक ऑनलाइन फॉर्म में एक खाने को टिक किया था जिसमें लिखा था कि "हां! मैं नेक्स्टवंस के सहयोगियों तथा ब्राडों से प्रचार प्राप्त करना चाहूंगा...."

न्यायाधीश क्लौडिया विल्केन ने निर्णय दिया कि वह टेक्स्ट सन्देश टीसीपीए के अंतर्गत नहीं आता है, प्रथम, क्योंकि जिस प्रकार से वे सन्देश भेजे गए, वे "ऑटोमेटिक टेलीफोन डायलिंग प्रणाली" की वैधानिक परिभाषा में सही नहीं बैठते, तथा द्वितीय क्योंकि वादी ने प्रचार सन्देश प्राप्त करने की स्वीकृति एक व्यापक शाब्दिक स्वीकृति प्रावधान के अंतर्गत दी, जिसे एक निःशुल्क रिंगटोन डाउनलोड प्राप्त करने के उद्देश्य से किया गया था. नाइंथ सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने इस फैसले को पलटते तथा साइमन एवं स्कस्टर के विरुद्ध संभवतः 90 मिलियन डॉलर के मुक़दमे को बहाल कर दिया. अंत में न्यायाधीश क्लौडिया विल्केन ने अगस्त 6, 2010 को एक समझौता अनुमोदित किया जिससे क्लास एक्शन दाखिल करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को 175 डॉलर प्राप्त हुए.[20][21]

पब्लिक यूटिलिटीज़ आयोग की शिकायत[संपादित करें]

जुलाई 20, 2005 को, यूटिलिटी कंज्यूमर्स एक्शन नेटवर्क, जो कैलिफोर्निया स्थित गैर-लाभकारी उपभोक्ता समर्थन संगठन है, ने कैलिफोर्निया पब्लिक यूटिलिटीज़ आयोग (सीपीसीयू) के समक्ष सिंगुलर वायरलेस विरुद्ध एक शिकायत दाखिल की, जिसमें उनपर अनाधिकृत रूप से गैर-संचार सम्बन्धी सेवाओं, जैसे रिंगटोंस, का शुल्क लेने का आरोप लगाया गया.[22] यूसीएएन ने दावा किया कि सिंगुलर ने अपने उपभोक्ताओं को सूचना दिए बिना उनसे जेम्स्टर! तथा अन्य मिलती-जुलती रिंगटोन सेवाओं का शुल्क लिया, उनसे इस सेवा में आने के लिए पूछे बिना तथा ऐसे शुल्कों के लिए स्वीकृति का प्रमाण के बिना ही शुल्क लगा दिया गया.[23] इसके अतिरिक्त यूसीएएन ने सिंगुलर पर आरोप लगाया कि उन्होंने कई सीपीसीयू आवश्यकताओं का उल्लंघन किया है, उन्होंने उपभोक्ताओं से लगातार गैर-संचार सेवाओं के विषय में पूछते हुए ऐसे प्रभार उनके वायरलेस फोन शुल्क में जोड़ दिए जिनकी कोई जिम्मेदारी सिंगुलर पर नहीं है तथा वे ग्राहकों को उनके प्रश्नों के विषय में कोई सहायता नहीं दे सकते हैं.[23][24]

रिंगटोन के विरुद्ध प्रतिक्रियाएं[संपादित करें]

सेल फोन संस्कृति में रिंगटोन के सम्बन्ध में शिष्टाचार एक सर्वाधिक विवाद का विषय रहा है. हालांकि प्रायः इसका उद्देश्य आनेवाली कॉल की जानकारी प्राप्तकर्ता को देने हेतु इसकी कर्णप्रियता के लिए बजाय जाता है, परन्तु प्राप्तकर्ता के आसपास के लोग इसके बस्जने की आवाज़ को व्यवधान भी मान सकते हैं. नौकरी देने वाले नियोक्ता कार्यस्थल पर रिंगटोन पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए जाने जाते रहे हैं; एक ऑस्ट्रेलियाई कंपनी तो इस मामले में इतनी आगे चली गयी कि उसने अपने कर्मचारियों पर उतनी बार जुर्माना लगाया जितनी बार उनकी रिंगटोन किसी मीटिंग के दौरान बजी. सेल फोन रखने वाले पेशेवरों पर किये गए एक अन्य सर्वेक्षण में यह पाया गया कि 18 प्रतिशत लोगों का यह मत है कि सेल फोन के इस्तेमाल संबंधी सबसे बुरा तरीका किसी सार्वजनिक यातायात वाहन में चलते हुए फोन की रिंगटोन सूची में अंकित सभी रिंगटोन को एक एक करके बजाना है.[25] रिंगटोन के सम्बन्ध में अन्य प्रतिक्रिया यह है कि इनके माध्यम से एल अलग ही तरह की संस्कृति विकसित हो गयी है. लोगों ने स्वयं को किसी खास चयनित रिंगटोन के साथ जोड़ना शुरू कर दिया है जो उनकी पहचान बन सके ठीक वैसे ही जैसे वह अपने मोबाइल फोन के साथ करते थे. "उन लोगों के साथ भी ऐसा ही था जो अपने फोन पर कोई कॉल प्राप्त करते थे, संगीतमय रिंगटोन सार्वजनिक स्थलों के हालत के अनुसार इसी प्रकार से डिजाइन की जाती हैं, जिससे कि वह वहां उपस्थित अन्य लोगों को जो संभावित रूप से इसके कारण व्यवधान के शिकार हो सकते हैं और अगल बगल खड़े लोगों को भी अच्छी लगें" (लिकोप्पे 148) अब लोग सिर्फ अपने फोन की पसंद के माध्यम से ही नहीं बल्कि इससे भी आगे अपनी रिंगटोन के माध्यम से अपने आसपास वालों को यह बताते हैं कि उन्हें किस प्रकार का संगीत पसंद है. एक प्रकार से, लोग इसके द्वारा भीड़ से अलग होने का एक सन्देश देते हैं. हालांकि, इस विषय पर भी विवाद है कि रिंगटोन का चुनाव इस प्रकार किया जाना चाहिए कि वह लोगों के ध्यान को कम से कम आकर्षित करे और भीड़भाड़ वाले स्थानों के लिए उपयुक्त हो. "कुछ उपयोगकर्ता जानबूझकर साझा सांस्कृतिक संसाधनों के के समुच्चय से अपनी रिंगटोन का चुनाव करते हैं...जिसके सम्बन्ध में वे यह जानते हैं कि इसे अधिकतर लोग पहचानते होंगे. संगीतमय रिंगटोन का ऐसा चुनाव इस तथ्य से प्रेरित होता है कि इसके फलस्वरूप उन्हें अपने साथ उपस्थित लोगों से कैसी प्रतिक्रिया मिलेगी" (लिकोप्पे 148). चूंकि धुनें सरलता से पहचानी जा सकती हैं, इसलिए इस बात की सम्भावना अधिक है कि लोग इसे नज़रंदाज़ करेंगे और इसके कारण उनका ध्यान भंग नहीं होगा.[26]

रिंगटोन के प्रकार[संपादित करें]

मोनोफोनिक
एक मोनोफोनिक रिंगटोन सामान्य रूप से संगीतमय स्वरों की एक श्रंखला होती है, जिसमें स्वर एक के बाद एक आते हैं.
पॉलीफोनिक
एक पॉलीफोनिक रिंगटोन में कई स्वर एक साथ हो सकते हैं. पहली पॉलीफोनिक रिंगटोन में अनुक्रमिक रिकॉर्डिंग शैली, जैसे, एमआईडीआई (MIDI) का प्रयोग किया गया था.इस प्रकार की रिकॉर्डिंग यह प्रकट करती हैं कि किसी निर्धारित समय पर किस सिंथेटिक वाद्य यन्त्र को स्वर देना है और वाद्य यन्त्र का वास्तविक स्वर प्लेबैक उपकरण पर निर्भर करेगा. बाद में, कम्पोजीशन देता के साथ समन्वयित उपकरणों को भी शामिल किया जा सकता है, जो प्रत्येक फोन के अन्तर्निहित स्वर कोष से परे और भी अधिक विविध स्वर उपलब्ध कराता है.
ट्रू टोन
एक ट्रूटोन ("रियलटोन", "मास्टरटोन", "सुपरफोनिक रिंगटोन" या "ऑडियो रिकॉर्डिंग" के नाम से भी प्रचलित) साधारण रूप से एक श्रव्य रिकॉर्डिंग होती है, आदर्शतः यह साधारण प्रारूप में होती है जैसे एमपी3 (MP3) या एएसी (AAC).ट्रूटोन, जो प्रायः गानों से ली गयी पंक्तियां होती हैं, अब रिंगटोन के रूप में प्रचलित हो गयी हैं. पहली ट्रूटोन सेवा एयू (au) द्वारा दिसंबर 2002 में शुरू की गयी थी.[27] ट्रूटोन के रूप में वितरित सबसे पहला गाना केमिस्ट्री का "माई गिफ्ट टू यू" था.
सिंगटोन
एक 'सिंग टोन" एक रिंगटोन है जिसे कराओके पद्धति से पृष्ठभूमि में चलते हुए गाने के साथ, उपयोगकर्ता की रिकॉर्ड की गयी आवाज़ के साथ मिलाकर (जिसे समय और सुर दोनी के लिए समायोजित किया जाता है), बनाया गया है.
वीडियो रिंगटोन
एक वीडियो रिंगटोन वीडियो सामग्री का एक भाग होता है जिसे रिंगटोन के रूप में प्रयोग किया जाता है(आदर्शतः 3G फ़ोनों में). कोई भी वीडियो प्रयोग किया जा सकता है लेकिन आमतौर पर संगीत वीडियो के हिस्सों का ही प्रयोग होता है. इस प्रकार के प्रयोग का सर्वोत्तम उदहारण वह दृश्य एवम श्रव्य गाने होते हैं जो बिना रुके बार बार बजते रहते हैं. वीडियो और ऑडियो के द्वारा कॉल करने वाले की पहचान करने के लिए फोन में दर्ज संपर्कों हेतु निजीकृत रिंगटोन का प्रयोग भी संभव है.

रिंगटोन संकेतन प्रारूप[संपादित करें]

  • 3GP: एक मल्टीमीडिया कंटेनर प्रारूप है जिसका प्रयोग एक वीडियो रिंगटोन के लिए किया जा सकता. यह 3G यूएमटीएस (3G UMTS) मल्टीमीडिया सर्विसेज़ के लिए थर्ड जनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट 3GPP के द्वारा परिभाषित है. इसका प्रयोग 3G मोबाइल फ़ोनों पर किया जाता है लेकिन इसका प्रयोग कुछ 2G और 4G फ़ोनों पर भी किया जा सकता है.
  • एएसी (AAC): कुछ फोन जैसे कि सोनी एरिक्सन W810i ".m4a" एएसी प्रारूप वाली रिंगटोन ही चला पाते हैं. आईफोन (iPhone) ".m4r" एएसी प्रारूप की रिंगटोन ही चला पता है. "m4r" प्रारूप ".m4a" के समान ही होता है इनमें एक मात्र अंतर यह होता है कि ".m4r" फ़ाइल में डीआरएम (DRM) शैली के कॉपी प्रोटेक्शन की भी सुविधा होती है.
  • एएमआर (AMR): यह बोली विशेषज्ञ ऑडियो कम्प्रेशन प्रारूप है और mp3 के मानक से पूर्व नोकिया द्वारा प्रयोग किया जाता था.
  • eMelody:: पुराने monophonic एरिक्सन प्रारूप.
  • आईमेलोडी (iMelody): अधिकांश नए फोन जिनमे नोकिया की स्मार्ट मैसेजिंग नहीं है, मोनोफोनिक प्रारूप का प्रयोग कर रहे हैं.
  • केडब्ल्यूएस (KWS): क्योसेरा का रिंगर प्रारूप.
  • एमआईडी / एमआईडीआई (MID/MIDI): प्रचलित स्वर प्रारूप.
  • मोर्स कोड: .मोरसे एक्सटेंशन वाली टेक्स्ट फ़ाइल मोर्स कोड गानों में परिवर्तित की जा सकती हैं.
  • एमओटी (MOT): मोटोरोला के फोन के लिए एक प्राचीन रिंगर प्रारूप.
  • एमपी3 (MP3): अधिकांश फोन वही रिंगटोन बजा पाते हैं जो mp3 प्रारूप में होती हैं.
  • नोकिया / एससीकेएल (SCKL) / ओटीटी (OTT): नोकोया स्मार्ट मैसेजिंग प्रारूप. नोकिया फ़ोनों में रिंगटोन एक लिखित संदेश के रूप में प्राप्त हो रही हैं. रिंगटोन उपकरण इस प्रकार के लिखित सन्देश बना सकते हैं. इसके द्वारा इसका प्रयोग कोई भी व्यक्ति जिसके पास कोई भी ऐसा फोन हो जो अपनी रिंगटोन बिना किसी डेटा केबल के लोड कर सके. नोकिया के अतिरिक्त अन्य फोन भी हैं जो इसका प्रयोग करते हैं.
  • ओजीजी (OGG) वॉर्बिस: ऍनड्रौयड पावर फोन में यह डिफॉल्ट होता है.
  • पीडीबी (PDB): पाम डेटाबेस. यह वह प्रारूप है जिसके द्वारा पीडीए (PDA) फोन पर रिंगटोन लोड की जाती हैं जैसे क्योसेरा 6035 और हैण्डस्प्रिंग ट्रियो.
  • पीएमडी (PMD): क्विल कौम और जापानी कम्पनी फेथ द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित प्रारूप जो एमआईडीआई (MIDI), प्रतिदर्शित ऑडियो (PCM), स्थिर ग्राफिक्स, एनिमेशन, टेक्स्ट, कम्पन और एलइडी (LED) को भी शामिल कर सकता है.
  • क्यूसीपी (QCP): क्वेलकॉम प्योर वॉयस सॉफ्टवेयर द्वारा बनाया गया फ़ाइल प्रारूप. यह साधारण सांगीतिक रिकॉर्डिंग के लिए विशेषरूप से उपयुक्त होता है.
  • आरटीटीटीएल (RTTTL): रिंगटोन के लिए एक प्रचलित प्रारूप.
  • आरटीएक्स (RTX): यह आरटीटीटीएल (RTTTL) के समान ही होता है इसमें कुछ और भी उन्नत विशेषताएं होती हैं. आरटीएक्स पर औक्टेव्स भी अलग अलग होते हैं.
  • सैमसंग1 & सैमसंग2: सैमसंग कीप्रेस प्रारूप.
  • सीमेंस कीप्रेस: यह एक सीमेंस टेक्स्ट फ़ाइल प्रारूप को बना सकता है और पढ़ सकता है.
  • सीमेंस एसइओ (SEO): सीमेंस एसइओ (SEO) बाइनरी प्रारूप.
  • एसएमएएफ (SMAF): यामाहा संगीत प्रारूप जो एमआईडीआई (MIDI) को इंस्ट्रूमेंट साउंड डेटा (अका (aKa) मॉड्यूल फाइल्स) के साथ जोड़ता है. फाइलों के नामों के साथ एक्सटेंशन "एमएमएफ" (MMF)या "एमएलडी" (MLD) होता है.
  • एसआरटी (SRT): सिपुरा टेक्नोलॉजी वीओआईपी (VoIP) फोन के लिए सिपुरा रिंगटोन.

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • नोकिया धुन
  • रिंगबैक टोन
  • रिंगल (संगीत)
  • टीन बज़

संदर्भ[संपादित करें]

  1. सी-टाइप रिंगर्स - रखरखाव. बेल सिस्टम अभ्यास, अंक 4 (सितम्बर 1978), 501-250-303 अनुभाग
  2. सोकोलोव्सकी, स्टीव (1989). "अपना फोन अनुकूलित करें", अध्याय 8 "टेलीफोन मेलोडी रिंगर". टैब (TAB) पुस्तकें, ब्लू रिज समिट, पीए (PA) ISBN 0-8306-9354-8.
  3. सोकोलोव्सकी, स्टीव (1989). "अपना फोन अनुकूलित करें", अध्याय 20 "एनिमेटेड टेलीफोन रिंगर". टैब (TAB) पुस्तकें, ब्लू रिज समिट, पीए (PA) ISBN 0-8306-9354-8.
  4. बिग्लो कार, और वाइन्डर (2001). "अंडरस्टैंडिंग टेलीफोन इलेक्ट्रॉनिक्स", चौथा संस्करण. न्युनेस. ISBN 0-7506-7175-0.
  5. (जापानी) asahi.com, 6 सितंबर 2008 को पुनःप्राप्त (कैश)
  6. (Japanese में) ケータイ着メロ ドレミBOOK [Mobile Ringtones Do-Re-Mi Book]. July 1998. 
  7. टाइम मैगज़ीन यूरोप: द स्विट सॉन्ग ऑफ़ सक्सेस
  8. मोबाइल इंटरटेनमेंट फोरम से मोबाइल रिंगटोन व्यवसाय के प्रवर्तक को पहली बार एमईएफ (MEF) विशेष मान्यता पुरस्कार मिला - "वेस्कु" पानानेन, 4 जून 2004 प्रेस रिलीज
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  10. गोपीनाथ, एस. (2005). वैश्वीकरण के श्रवण तर्क या रिंगटोन. फर्स्ट मनडे, 10(12), 3.
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  13. Mehta, Stephanie N. (December 12, 2005). "Wagner's ring? Way too long.". Fortune. p. 40. http://money.cnn.com/magazines/fortune/fortune_archive/2005/12/12/8363130/index.htm. 
  14. गोपीनाथ, सुमंत. "वैश्वीकरण का श्रवण तर्क या रिंगटोन्स." फर्स्ट मनडे 10.12 (2005): 3. प्रिंट.
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  26. लिकोप, क्रिस्चन. मोबाइल फोन की घंटी. न्यूयॉर्क शहर: एमआईटी (MIT) प्रेस, 2008. 142-149. प्रिंट.
  27. (जापानी) केडीडीआई (KDDI) (ऑ) आधिकारिक वेबसाइट पर 2002 खबर जारी, 7 सितंबर 2008 को पुनःप्राप्त

बाहरी लिंक्स[संपादित करें]

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