राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान

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राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (रानप्र / National Innovation Foundation (NIF)), जो भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा समर्थित है, की स्थापना डॉ॰ आर.ए. माशेलकर, अध्यक्ष, ग्लोबल रिसर्च अलायंस एवं पूर्व महानिदेशक, सीएसआईआर, की अध्यक्षता में फरवरी, २000 में हुई। ज़मीनी नवप्रवर्तनों और विशिष्ट पारम्परिक ज्ञान की पहचान, उनका सम्मान और उन्हें पुरस्कृत करने हेतु ऐसी संस्था की आवश्यकता लम्बे समय से महसूस की जा रही थी। उल्लेखनीय है कि वर्ष १९८९ में मुट्ठी भर स्वयंसेवकों ने हनी बी नेटवर्क की शुरुआत की थी। हनी बी नेटवर्क ने समाज के असंगठित क्षेत्रों में गैर-सहायता प्राप्त सृजनात्मक और नवप्रवर्तनशील प्रयासों की खोज, उनके पुनरोत्पादन और प्रोत्साहन हेतु एक मुहिम छेड़ी। हनी बी दर्शन की बुनियाद पर स्थापित रानप्र ने इस पहल को आगे बढ़ाया है।

रानप्र ने आर्थिक तौर पर विपन्न लेकिन ज्ञान से सम्पन्न गरीब लोगों के लिए एक संस्थागत मंच उपलब्ध कराया है। रानप्र एक नवप्रवर्तनशील भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए रानप्र समसामयिक गैर-सहायता प्राप्त प्रौद्योगिकीय नवप्रवर्तकों के साथ ही साथ विशिष्ट पारम्परिक ज्ञानधारकों के, व्यावसायिक व गैर-व्यावसायिक आधार पर, बौद्धिक सम्पदा अधिकारों की रक्षा, दस्तावेज़ीकरण, मूल्य परिवर्धन का काम करता है।

उद्देश्य[संपादित करें]

  • ज़मीनी नवप्रवर्तनों की खोज, उनका पुनरोत्पादन एवं प्रोत्साहन द्वारा भारत को नवप्रवर्तनात्मक और सृजनात्मक समाज बनाने तथा वहनीय प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेतृत्व के रूप में स्थापित करने में मदद करना।
  • समाज की सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय आवश्यकताओं के अनुरूप हरित तृणमूल (ज़मीनी) नवप्रवर्तनों का क्रम-विकास और प्रसार, सेवाभाव के साथ एक समयबद्ध ढंग से, सुनिश्चित करना।
  • व्यावसायिक और/या गैर-व्यावसायिक माध्यमों द्वारा, मूल्य परिवर्धन के बग़ैर या साथ में ज़मीनी नवप्रवर्तनों एवं पारम्परिक ज्ञान के वर्तमान स्तर में अभिवृद्धि का प्रयास करना।
  • देश में ज़मीनी नवप्रवर्तनों पर सार्वजनिक नीति को प्रभावित करना तथा शोध, डिज़ाइन (अभिकल्पना) और विकास प्रयासों का संचालन, समन्वय और समर्थन करना जिससे अनौपचारिक क्षेत्र में किसानों, शिल्पियों, कारीगरों इत्यादि में प्रौद्योगिकीय प्रतियोगी भावना पैदा हो और बनी रहे।
  • जहाँ कहीं आवश्यकता हो, ज्ञानधारकों के बौद्धिक सम्पदा अधिकारों का संरक्षण और किसी तीसरे पक्ष को उनकी प्रौद्योगिकी हस्तांतरित करने से पहले पूर्वसूचित सहमति (प्रायर इंफॉर्म्ड कंसेंट - पीआईसी) के लिए प्रयास करना।
  • औपचारिक विज्ञान व्यवस्थाओं और अनौपचारिक ज्ञान व्यवस्थाओं के सर्वोत्तम के बीच मजबूत सम्बन्धों का निर्माण और विभिन्न हितधारकों को आपस में जोड़ने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी तथा अन्य माध्यमों द्वारा एक ज्ञान संजाल (नेटवर्क) बनाना।
  • नवप्रवर्तनों तथा पारम्परिक ज्ञान के अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना और इनके प्रति व्यापक सामाजिक चेतना पैदा करना। साथ ही शैक्षणिक पाठ्यक्रमों, विकास की नीतियों एवं कार्यक्रमों में इन्हें समावेशित करने के प्रयास करना।

सांगठनिक संरचना[संपादित करें]

रानप्र को संचालित करने वाली एक प्रबंध परिषद है, जिसके सदस्यों में अनेक विख्यात व्यक्ति हैं। रानप्र की प्रबंध परिषद के अध्यक्ष 'सीएसआईआर' के पूर्व महानिदेशक डॉ॰ आर.ए. माशेलकर हैं और कार्यकारी उपाध्यक्ष भारतीय प्रबंध संस्थान, अहमदाबाद के प्रोफेसर अनिल के. गुप्ता हैं।

मुख्य कार्य[संपादित करें]

ज़मीनी नवप्रवर्तनों की खोज, उन्हें पुरस्कृत करने और उनके उद्भवन, के अपने उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु 'रानप्र' ने नवप्रवर्तनों को उद्यम नमूनों में परिवर्तित करने के लिए पाँच समर्पित विभागों की स्थापना की है :

  • खोज एवं दस्तावेजीकरण
  • व्यवसाय विकास और लघु उद्यम
  • मूल्य परिवर्धन और शोध एवं विकास
  • बौद्धिक संपदा प्रबंधन
  • प्रसार एवं सूचना प्रौद्योगिकी प्रबंधन

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]