राजनय
राष्ट्रों अथवा समूहों के प्रतिनिधियों द्वारा किसी मुद्दे पर चर्चा एवं वार्ता करने की कला व अभ्यास (प्रैक्टिस) राजनय (डिप्लोमैसी) कहलाता है।
प्राचीन भारत में राजनय [संपादित करें]
प्राचीन भारत के राजवंशों व राज्यों में राजनय की सुदीर्घ परंपरा रही है। स्टेटक्राफ्ट व राजनय पर प्राचीनतम रचना अर्थशास्त्र है, जिसका श्रेय कौटिल्य (अपि च चाणक्य नाम से ख्यात) को जाता है, जो कि चन्द्रगुप्त मौर्य, मौर्य राजवंश के संस्थापक का प्रधान सलाहकार था, (चंद्रगुप्त ने 4थी शताब्दी ई.पू. में शासन किया)। अर्थशास्त्र राजत्व की कला पर एक संपूर्ण रचना है। इसमें राजनय के सिद्धांत भी हैं, जिसमें बताया है कि परस्पर स्पर्धी राज्यों के बीच किस प्रकार बुद्धिमान राजा गठजोड़ बनाए और अपने शत्रुओं को गतिरोध में डाले। उस समय राजदरबारों को भेजे गये दूत दीर्घ काल तक रूका करते थे। अर्थशास्त्र में दूतों के साथ व्यवहार संबंधी निर्देश हैं। कहा है कि - राजा के लिए सबसे बड़ी नैतिकता है कि उसका राज्य समृद्धि को प्राप्त करे आदि।
इन्हें भी देखें [संपादित करें]
वाह्य सूत्र [संपादित करें]
- संयुक्त राष्ट्रसंघ
- बदलने होंगे विदेश नीति के सारे औजार (एनके सिंह)
- Disarmament Insight This blog is aimed at negotiators, policy wonks, researchers and anyone curious about disarmament and human security
- Diplomacy of Small States. An international conference dealing with the issues of foreign policy, negotiation tactics, diplomatic missions, crisis and humanitarian diplomacy of small states. See also conference
- Diplomatic Dictionary
- Diplomacy Quotes