रवीन्द्रनाथ ठाकुर का सृष्टिकर्म काव्य, उपन्यास, लघुकथा, नाटक, प्रबन्ध, चित्रकला और सङ्गीत आदि अनेकानेक क्षेत्रों फैला हुआ है।
| उपन्यास |
रचनाकाल |
अन्य तथ्य |
| बौ-ठाकुराणीर हाट |
१८८३ |
रवीन्द्रनाथ ठाकुर का प्रथम ग्रन्थ रूप में प्रकाशित उपन्यास। यशोर के राजा प्रतापादित्य और बाकला के जमींदार रामचन्द्र के विवाद को आधार बनाकर ऐतिहासिक उपन्यास। १३१६ बङ्गाब्द में बौ-ठाकुराणीर हाट को आधार बनाकर उनका प्रायश्चित्त नाटक रचित है। प्रायश्चित्त १३३६ बङ्गाब्द में पुनर्लिखित होकर परित्राण नाम से मुद्रित हुआ। |
| राजर्षि |
१८८७ |
त्रिपुरा के राजपरिवार के इतिहास को लेकर रचित ऐतिहासिक उपन्यास। १२९७ बङ्गाब्द में इस उपन्यास के प्रथमांश के आधार पर बिसर्जन नामक नाटक की रचना हुई। |
| चोखेर बालि |
१९०३ |
सामाजिक-मनस्तात्त्बिक उपन्यास। रबीन्द्रनाथेर अन्यतम श्रेष्ठ उपन्यास। २००३ साले ऋतुपर्ण घोष एइ उपन्यास अबलम्बने चोखेर बालि चलच्चित्रटि निर्माण करेन। |
| नौकाडुबि |
१९०६ |
सामाजिक उपन्यास। १३१०-११ बङ्गाब्दे बङ्गदर्शन पत्रिकाय प्रकाशित हय। |
| प्रजापतिर निर्बन्ध |
१९०८ |
हास्यरसात्मक उपन्यास। १३११ बङ्गाब्दे रबीन्द्र-ग्रन्थाबली ('हितबादीर उपहार') संकलने चिरकुमार सभा नामे प्रकाशित हय। परे चिरकुमार सभा नामे एइ उपन्यासेर नाट्यरूपटि १३३२ बङ्गाब्दे प्रकाशित हय। |
| गोरा |
१९१० |
एपिक उपन्यास। रबीन्द्रनाथेर दीर्घतम उपन्यास। देश पत्रिकार बिचारे बिंश शताब्दीर श्रेष्ठ बांला उपन्यास। |
| घरे बाइरे |
१९१६ |
राजनैतिक उपन्यास। चलित भाषाय लेखा रबीन्द्रनाथेर प्रथम उपन्यास। १९८४ साले सत्यजित् राय एइ उपन्यास अबलम्बने घरे बाइरे चलच्चित्रखानि निर्माण करेन। |
| चतुरङ्ग |
१९१६ |
सामाजिक-मनस्तात्त्बिक उपन्यास। साधुभाषाय लिखित रबीन्द्रनाथेर सर्बशेष उपन्यास। रबीन्द्रनाथेर अन्यतम श्रेष्ठ उपन्यास बले बिबेचित हय। २००८ साले सुमन मुखोपाध्याय एइ उपन्यास अबलम्बने चतुरङ्ग चलच्चित्रखानि निर्माण करेन। |
| योगायोग |
१९२९ |
सामाजिक-मनस्तात्त्बिक उपन्यास। बिचित्रा मासिकपत्रे धाराबाहिकरूपे प्रकाशित हय (आश्बिन, १३३४ - चैत्र, १३३५)। पत्रिकाय प्रकाशकाले नाम छिल तिन-पुरुष। |
| शेषेर कबिता |
१९२९ |
रोम्यान्टिक-मनस्तात्त्बिक काब्यिक उपन्यास। रबीन्द्रनाथेर अन्यतम श्रेष्ठ उपन्यास। |
| मालञ्च |
१९३४ |
सामाजिक-मनस्तात्त्बिक उपन्यास। नरनारीर जटिल सम्पर्क निये रचित रबीन्द्रनाथेर एकटि संक्षिप्त उपन्यास। |
| चार अध्याय |
१९३४ |
राजनैतिक उपन्यास। एइ उपन्यासे रबीन्द्रनाथ सशस्त्र बिप्लबबादेर बिरुद्धे बितृष्णा प्रकाश कराय बितर्केर सृष्टि हय। उत्पल दत्त उपन्यासटिर नाट्यरूप मञ्चायन करेछिलेन। |
गीतिनाट्य, नाटक, नृत्यनाट्य [संपादित करें]
साँचा:रवीन्द्रनाथ ठाकुर