रविशंकर शुक्ल
रविशंकर शुक्ल (जन्म २ अगस्त १८७७ सागर,मध्यप्रदेश -- मृत्यु ३१ दिसंबर १९५६ दिल्ली) एक वरिष्ठ कांग्रेसी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, २७ अप्रेल १९४६ से १४ अगस्त १९४७ तक सीपी और बेरार (CP & Berar) के प्रमुख, १५ अगस्त १९४७ से ३१ अक्टुबर १९५६ तक सीपी और बेरार के प्रथम मुख्यमंत्री और १ नवंबर १९५६ को अस्तित्व मे आये नये राज्य मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री थे। अपने कार्यकाल के दौरान ३१ दिसंबर १९५६ को आप का स्वर्गवास हो गया।
अनुक्रम |
जीवनी [संपादित करें]
पंडित रवि शंकर शुक्ल का जन्म सीपी और बेरार के सागर शहर मे २ अगस्त १८७७ को हुआ था। आपके पिता का नाम पंडित जगन्नाथ शुक्ल और माता का नाम श्रीमती तुलसी देवी था। रवि शंकर जी ने ४ वर्ष की आयु मे सागर के सुन्दरलाल पाठशाला मे दाखिला लिया। ब्रिटिश राज मे यह पाठशाला सीपी मे स्थित ६ शालाओ मे से एक थी। इस ही पाठशाला से ८ वर्ष की आयु मे आपकी प्राथमीक शीक्षा पूर्ण हुई। माध्यमिक शीक्षा के पूर्ण होने के बाद पंडित जगन्नाथ शुक्ल राजनांदगाँव चले गये और अपने भाई पंडित गजाधर शुक्ल के साथ बेंगाल नागपुर कॉटन मिल चलने मे सहभागी बने। कुछ वर्ष मिल चलाने के बाद वह रायपुर चले गये। इस दौरान रवि शंकर जी ने अपनी स्कुली शीक्षा रायपुए हाई स्कूल से पूर्ण कर ली। अब वह १७ वर्ष के थे। इंटर की परीक्षा आपने जबलपुर के रॉबर्टसन कॉलेज से उत्तर्णि की। आपने स्नातक की पढ़ाई नागपुर के हिसलोप कॉलेज से पूर्ण करी। नागपुर मे पढ़्ते हुए शुक्ल जी राष्ट्रीय आंदोलन के निकट आये। १८९८ मे संपन्न हुये कांग्रेस के १३वे अधिवेशन मे भाग लेने आप अपने अध्यापक के साथ अमरावती गये थे। नागपुर से ही आपने विधि की पढ़ाई पुरी करी। तदपश्चात आप सरायपाली आ गये सुखा राहत कार्य का निरिक्षण करने। अपनी ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा के लिये शुक्ल जी को पदोन्नत कर नायाब तहसीलदार बना दिया गया। सन १९०१ मे आपने सरकारी नौकरी छोड़ कर जबलपुर के हितकारिणी स्कूल अध्यापन कार्य शुरु किया। [1]
विविध [संपादित करें]
- दिल्ली स्थित भारत के संसद भवन परिसर में रविशंकर शुक्ल की प्रतीम विद्यमान है। [2]
- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित विश्वविद्यालय का नाम पंडित रवि शंकर शुक्ल के नाम पर है।
संदर्भ [संपादित करें]
बाह्य सूत्र [संपादित करें]
| विकिमीडिया कॉमन्स पर रविशंकर शुक्ल से सम्बन्धित मीडिया है। |