रज़िया सुल्तान

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रज़िया सुल्तान
उत्तर भारत की सम्राज्ञी
शासन १५४०-१५४५
जन्म १२०५
जन्म स्थान १२४०
मृत्यु १४ अक्टूबर, १२४०
मृत्यु स्थान कैथल, हरियाणा
समाधी तुर्कमान गेट चांदनी चौक, दिल्ली; कैथल, हरियाणा
पूर्वाधिकारी रूकुनुद्दीन फ़ीरोज़शाह
उत्तराधिकारी मुईज़ुद्दीन बहरामशाह
जीवन संगी अल्तुनिया
राज घराना गुलाम वंश
पिता शम्स-उद-दिन इल्तुतमिश
माता शाह तुर्कान
धर्म इस्लाम

रज़िया अल-दिन(१२०५-१२४०) (फारसी / उर्दु: رضیہ سلطانہ), शाही नाम “जलॉलात उद-दिन रज़ियॉ” (फारसी /उर्दु: جلالۃ الدین رضیہ), इतिहास में जिसे सामान्यतः “रज़िया सुल्तान” या “रज़िया सुल्ताना” के नाम से जाना जाता है, दिल्ली सल्तनत की सुल्तान थी। रज़िया ने १२३६ से १२४० तक दिल्ली सल्तनत पर शासन किया। वह इल्तुतमिश की पुत्री थी। तुर्की मूल की रज़िया को अन्य मुस्लिम राजकुमारियों की तरह सेना का नेतृत्व तथा प्रशासन के कार्यों में अभ्यास कराया गया, ताकि ज़रुरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके।.[1] रज़िया सुल्ताना मुस्लिम एवं तुर्की इतिहास कि पहली महिला शासक थीं।

शासक की भूमिका[संपादित करें]

रज़िया को उसके पिता शम्स-उद-दिन इल्तुतमिश की मृत्यु (१२ अप्रैल १२३६) के पश्चात दिल्ली का सुल्तान बनाया गया। इल्तुतमिश, पहला ऐसा शासक था, जिसने अपने बाद किसी महिला को उत्तराधिकारी नियुक्त किया। (स्रोतों के अनुसार, पहले उसके बडे बेटे को उत्तराधिकारी के रुप में तैयार किया गया, परन्तु दुर्भाग्यवश उसकी अल्प आयु में मृत्यु हो गयी).लेकिन, मुस्लिम वर्ग को इल्तुतमिश का किसी महिला को वारिस बनाना नामंज़ूर था, इसलिए उसकी मृत्यु के पश्चात उसके छोटे बेटे रक्नुद्दीन फ़िरोज़ शाह को राजसिंहासन पर बैठाया गया।

रक्नुद्दीन, का शासन बहुत ही कम समय के लिये था, इल्तुतमिश की विधवा, शाह तुर्कान का शासन पर नियंत्रण नहीं रह गया था। विलासी और लापरवाह रक्नुद्दीन के खिलाफ जनता में इस सीमा तक आक्रोश उमड़ा, कि ९ नवंबर १२३६ को रक्नुद्दीन तथा उसकी माता, शाह तुर्कान की हत्या कर दी गयी।[2] उसका शासन मात्र छह माह का था। इसके पश्चात सुल्तान के लिए अन्य किसी विकल्प के अभाव में मुसलमानों को एक महिला को शासन की बागडोर देनी पड़ी।। और रजिया सुल्तान दिल्ली की शासिका बन गई।

शासन कार्यों में रजिया की रुचि अपने पिता के शासन के समय से ही थी। गद्दी संभालने के बाद रज़िया ने रीतिरिवाज़ों के विपरीत पुरुषों की तरह सैनिकों का कोट और पगडी पहनना पसंद किया। बल्कि, बाद में युद्ध में बिना नकाब पहने शामिल हुई।

रज़िया अपनी राजनीतिक समझदारी और नीतियों से सेना तथा जनसाधारण का ध्यान रखती थी। वह दिल्ली की सबसे शक्तिशाली शासक बन गयीं थीं।

रज़िया और उसके सलाहकार, जमात-उद-दिन-याकुत, एक हब्शी के साथ विकसित हो रहे अंतरंग संबंध की बात भी मुसलमानों को पसंद नहीं आई। रज़िया ने इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।[3], किंतु उसका इस संबंध के परिणाम को कम आंकना अपने राज्य के लिये घातक सिद्ध हुआ।

कुछ स्रोतों के अनुसार[कृपया उद्धरण जोड़ें], रज़िया और याकुत प्रेमी थे; अन्य स्रोतों के अनुसार वे दोनों करीबी दोस्त/विश्वास पात्र थे। इस सबसे रज़िया ने तुर्की वर्ग में अपने प्रति ईष्या को जन्म दे दिया था, क्योंकि, याकुब, तुर्क नहीं था और उसे रज़िया ने अश्वशाला का अधिकारी नियुक्त कर दिया था। भटिंडा के राज्यपाल मल्लिक इख्तियार-उद-दिन-अल्तुनिया ने अन्य प्रान्तीय राज्यपालों, जिन्हें रज़िया का अधिपत्य नामंजूर था, के साथ मिलकर विद्रोह कर दिया।

रज़िया और अल्तुनिया के बीच युद्ध हुआ जिसमें याकुत मारा गया और रज़िया को बंदी बना लिया गया। मरने के डर से रज़िया अल्तुनिया से शादी करने को तैयार हो गयी। इस बीच, रज़िया के भाई, मैज़ुद्दीन बेहराम शाह, ने सिंहासन हथिया लिया। अपनी सल्तनत की वापसी के लिये रज़िया और उसके पति, अल्तुनिया ने बेहराम शाह से युद्ध किया, जिसमें उनकी हार हुई। उन्हें दिल्ली छोड़कर भागना पड़ा और अगले दिन वो कैथल पंहुचे, जहां उनकी सेना ने साथ छोड़ दिया। वहां जाटों से हुए संघर्ष में १४ अक्टूबर १२४० को दोनों मारे गये। बाद में बेहराम को भी अयोग्यता के कारण गद्दी से हटना पड़ा।

रज़िया की पैतृक सम्पति[संपादित करें]

रज़िया सुल्तान के सिक्के

रजिया की कब्र पर विवाद[संपादित करें]

दिल्ली के तख्त पर राज करने वाली एकमात्र महिला शासक रजिया सुल्तान व उसके प्रेमी याकूत की कब्र का दावा तीन अलग अलग जगह पर किया जाता है।

तुर्कमान गेट, दिल्ली[संपादित करें]

दिल्ली के तुर्कमान गेट स्थित रज़िया सुलतान व याक़ूत की कब्र

कैथल, हरियाणा[संपादित करें]

टोंक, राजस्थान[संपादित करें]

राजस्थान के टोंक के दरियाशाह इलाके में स्थित है

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

शासन १५४०-१५४५ जन्म १२०५ जन्म स्थान १२४० मृत्यु १४ अक्टूबर १२४०

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संदर्भ[संपादित करें]

साहित्य[संपादित करें]

  • जामिला बृजभूषण, सुल्तान रज़िया, हर लाइफ़ एण्ड टाइम्स: ए रिअप्रेज़ल, साउथ एशिया बुक्स (१९९०) ISBN 81-85425-09-4
  • रफ़ीक ज़कारिया, रज़िया, द क्वीन ऑफ इंडिया, ऑक्स्फ़ोर्ड विश्वविद्यालय प्रेस (१९६६)
पूर्वाधिकारी
रूकुनुद्दीन फ़ीरोज़शाह
गुलाम वंश
12361240
उत्तराधिकारी
मुईज़ुद्दीन बहरामशाह
पूर्वाधिकारी
रूकुनुद्दीन फ़ीरोज़शाह
दिल्ली की सुल्तान
12361260
उत्तराधिकारी
मुईज़ुद्दीन बहरामशाह