रक्षा मंत्रालय (भारत)

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रक्षा मंत्रालय का प्रमुख कार्य है रक्षा और सुरक्षा संबंधी मामलों पर नीति निर्देश बनाना और उनके कार्यान्वयन के लिए उन्हें सुरक्षा बलों के मुख्यालयों, अंतर सेना संगठनों, रक्षा उत्पाद प्रतिष्ठानों और अनुसंधान व विकास संगठनों तक पहुंचाना। सरकार के नीति निर्देशों को प्रभावी ढंग से तथा आवंटित संसाधनों को ध्यान में रखकर उन्हें कार्यान्वित करना भी उसका काम है। रक्षा मंत्रालय चार विभागों का मिला जुला रूप है। इसमें रक्षा विभाग (डीओडी), रक्षा उत्पाद विभाग (डीडीपी), रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग (डीडीआर एंड डी) और पूर्व सैनिकों के कल्याण और वित्त प्रभाग के विभाग शामिल हैं।

विभाग के प्रमुख कार्य इस प्रकार है -

  • रक्षा विभाग एकीकृत रक्षा स्टाफ और तीनों सेनाओं तथा विभिन्न अंतर सेवा संगठनों की जिम्मेदारियों का वहन करता है। रक्षा बजट, स्थापना कार्य, रक्षा नीति, संसद से जुड़े मुद्दे, बाहरी देशों के साथ रक्षा सहयोग तथा समस्त क्रियाकलापों का समन्वय इसी विभाग के दायित्व हैं।
  • रक्षा उत्पादन विभाग का प्रमुख सचिव इसका प्रमुख होता है और यह रक्षा उत्पादन, आयातित भंडार के स्वदेशीकरण, उपकरणों और अतिरिक्त कलपुर्जों तथा हथियार कारखाना बोर्ड और सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उद्यमों की विभागीय उत्पादन इकाइयों के नियंत्रण संबंधी कार्यों को निपटाता है।
  • रक्षा, शोध तथा विकास विभाग का प्रमुख सचिव होता है जो रक्षा मंत्री का सलाहकार भी होता है। इसका काम सैनिक साजो-सामान के वैज्ञानिक पक्ष, संचालन तथा सेना द्वारा इस्तेमाल में लाए जाने वाले उपकरणों से संबंधित शोध, डिजाइन और विकास की योजनाएं बनाना है।
  • भूतपूर्व सैनिक/रक्षाकर्मी कलयाण विभाग का प्रमुख एक अतिरिक्त सचिव होता है। इसके जिम्मे पेंशनयाफ्ता भूतपूर्व सैनिकों, भूतपूर्व कर्मचारी स्वास्थ्य योजना, पुनःनियोजन और केंद्रीय सैनिक बोर्ड महानिदेशालय तथा तीनों रक्षा सेवाओं के पेंशन नियमों से जुड़े मुद्दों का निष्पादन है।

कारगिल समिति की रिपोर्ट के आधार पर मंत्रियों के समूह द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार 1 अक्टूबर 2001 को इंटिग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (आईडीएस) की स्था्पना की गई। आईडीएस के लिए स्टाफ तीन सेनाओं, एमई, डीआरडीओ, सश्क्त सेना मुख्यालय, सिविल सेवाओं तथा रक्षा विभाग से मुहैया कराया गया है। वर्तमान में इंटिग्रेटेड डिफेंस स्टाफ सीओएससी के सलाहकार के रूप में कार्यरत है। वर्तमान में आईएसडी अध्यक्ष सीओएसी के सलाहकार स्टाफ के रूप में कार्य कर रहा है।

रक्षा मंत्री को रक्षा संबंधी गतिविधियों में मदद देने के लिए अनेक समितियां होती हैं। स्टाफ समिति का प्रमुख एक ऐसा मंच होता है जो तीनों सेनाओं की गतिविधियों से संबद्ध मामलों पर विचार का स्थांन होता है और यह मंत्रालय को सलाह देता है। स्टाफ का पद सबसे लंबी सेवा वाले सेना प्रमुख को दिया जाता हे और यह तीनों प्रमुखों के बीच बारी-बारी से आता है।

रक्षा मंत्रालय का वित्त विभाग वित्तीय मामलों से जुड़े सभी मुद्दों पर विचार करता है। रक्षा सेवाओं का रक्षा सलाहकार इसका प्रमुख होता है तथा यह रक्षा मंत्रालय से पूर्णतः संबद्ध होता है और सलाहकार की भूमिका निभाता है।


बाहरी सूत्र[संपादित करें]

http://bharat.gov.in/sectors/defence/index.php