यौन आकर्षण
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यौन आकर्षण का अर्थ किसी व्यक्ति की किसी दुसरे व्यक्ति को अपनी ओर यौन या कामोद्दीपक (कामुक) रुप स आकर्षित करने की क्षमता से है। यौन आकर्षण के कौनसे पहलूओं का मनुष्यों पर सर्वाधिक प्रभाव होता है, ये अलग-अलग समय में संस्कृतियों और क्षेत्रों अनुसार बदलता रहा है। कौनसे कारक कितने प्रभावशाली होते हैं इसका निर्धारण स्थानीय उप-संस्कृतियों, यौन क्षेत्रों, या केवल व्यक्ति की वरीयताओं के द्वारा निर्धारित किया जा सकता है। ये वरीयताएँ जटिल प्रकार के मनोवैज्ञानिक, आनुवंशिक और सांस्कृतिक कारकों के परिणामस्वरुप आते हैं. एक व्यक्ति क दुसरे के प्रति यौन आकर्षण दोनों लोगों पर निर्भर करता है।
यौन आकर्षण का एक महत्वपुर्ण पहलू शारिरिक आकर्षण भी है जिस पर यौन आकर्षण निर्भर करता है। किसी संबंध को आरंभ करने से पहले इन बातों का अवश्य हमारे मन पर अवश्य प्रभाव पड़ता है:
- दृश्य धारणा (दूसरा व्यक्ति कैसा लगता(ती) है और काम करता(ती) है);
- वाक परिक्षण (ऑडिशन) (दुसरे व्यक्ति की आवाज़ कैसी लगती है)
- ओलफैक्शन (दूसरे व्यक्ति पर कैसी गंध आ रही है, स्वाभाविक रूप से या कृत्रिम, गलत गंध विकर्षक हो सकती है)