यादव

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चंद्रवंशी महाराजा यदु के वंशज यादव कहलाते हैं। यादव कुल यदुकुल भारतीय इतिहास के सब से लम्बे लिखित इतिहास वाले कुलों में से एक है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] चन्द्रवंश में वैसे तो बहुत सारे वंश हुए और ख़त्म हो गये पर सबसे अधिक विस्तार यदु महाराजा और पुरु महाराजा के कुल का हुआ।पर प्रधान वंश यादव वंश ही माना जाता था और है। भारतवर्ष के प्राचीन इतिहास महाभारत ग्रन्थ में वर्णित कुरु, पाण्डव, दुर्योधन आदि राजा पुरु वंश से सम्बन्ध रखने वाले है। तथा कृष्ण, बलराम, वसुदेव, कृतवर्मा, कंस इत्यादि राजा यादव वंश से सम्बन्ध रखने वाले है। प्रमाणिक इतिहास ग्रन्थ महाभारत के महानायक भगवान श्री कृष्ण इस कुल के सबसे अधिक प्रसिद्ध सदस्य है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] भारत के महान सम्राट ययाति ने शुक्र की पुत्री देव्यानी और असुरों के राजा विश्वपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा से विवाह किया। प्रथम पत्नी देवयानी से यदु और तुर्वसु हुए। शर्मिष्ठा से तीन पुत्र दुहयु, अनु और पुरु हुए। यदु के पुत्र क्रोषट और उनके पुत्र यादव हुये। यादव के नाम पर इनके वंशज यादव कहलाते हैं। वेद और पुराणों में यादव जाति को पवित्र कहा गया है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] श्रीमद्भागवत महापुराण में कहा गया है कि यादव के नाम लेने से सभी पाप मिट जाते हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

यादव राजा[संपादित करें]