मोहन भागवत
| मोहन भागवत | |
|---|---|
| जन्म | 1950 चंद्रपुर, भारत |
| धर्म | हिंदुत्व |
मोहन मधुकर भागवत (जन्म 1950) एक पशु चिकित्सक और 2009 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक हैं. उन्हें एक व्यावहारिक नेता के रूप में देखा जाता है. केएस सुदर्शन ने अपनी सेवानिवृत्ति पर उन्हें अपने उत्तराधिकारी के रूप में चुना. [1]
अनुक्रम |
प्रारंभिक जीवन [संपादित करें]
मोहनराव मधुकरराव भागवत का जन्म महाराष्ट्र में चंद्रपुर नामक एक छोटे नगर में हुआ था. वे संघ कार्यकर्ताओं के परिवार से हैं.[1] उनके पिता मधुकर भागवत चंद्रपुर क्षेत्र के प्रमुख थे और उन्होंने गुजरात के प्रांत प्रचारक के रूप में कार्य किया था.[1] मधुकर जी ने ही लाल कृष्ण आडवाणी का संघ से परिचय कराया था. उनके एक भाई संघ की चंद्रपुर नगर इकाई के प्रमुख हैं. वे तीन भाइयों और एक बहन में से सबसे बड़े हैं.
उन्होंने चंद्रपुर के लोकमान्य तिलक विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा और जनता कॉलेज चंद्रपुर से बीएससी प्रथम वर्ष की शिक्षा पूर्ण की. उन्होंने पंजाबराव कृषि विद्यापीठ, अकोला से पशु चिकित्सा और पशुपालन में स्नातक की उपाधि प्राप्त की. 1975 के अंत में, जब देश तत्कालीन प्रधानमन्त्री इंदिरा गाँधी द्वारा लगाए गए आपातकाल से जूझ रहा था, तब वे पशु चिकित्सा में अपना स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम अधूरा छोड़कर संघ के पूर्णकालिक स्वयंसेवक बन गए.[1]
करियर [संपादित करें]
संघ के साथ संबंध [संपादित करें]
आपातकाल के दौरान भूमिगत रूप से कार्य करने के बाद 1977 में भागवत महाराष्ट्र में अकोला के प्रचारक बने और संगठन में आगे बढ़ते हुए नागपुर और विदर्भ क्षेत्र के प्रचारक भी रहे.[1]
1991 में वे संघ के स्वयंसेवकों के शारीरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अखिल भारतीय प्रमुख बने और उन्होंने 1999 तक इस दायित्व का निर्वहन किया. उसी वर्ष उन्हें, एक वर्ष के लिए, पूरे देश में पूर्णकालिक रूप से कार्य कर रहे संघ के सभी प्रचारकों का प्रमुख बनाया गया.
वर्ष 2000 में, जब राजेन्द्र सिंह जी और हो.वे. शेषाद्री जी ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से क्रमशः संघ प्रमुख और सरकार्यवाह का दायित्व छोडने का निश्चय किया, तब के एस सुदर्शन को संघ का नया प्रमुख चुना गया और मोहन भागवत तीन वर्षों के लिए संघ के सरकार्यवाह चुने गए.
21 मार्च 2009 को मोहन भागवत संघ के सरसंघचालक मनोनीत हुए. वे अविवाहित हैं और उन्हें भारत में और विदेशों में व्यापक भ्रमण किया है. वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख चुने जाने वाले सबसे कम आयु के व्यक्तियों में से एक हैं और उन्हें एक स्पष्टवादी, व्यावहारिक और दलगत राजनीति से संघ को दूर रखने के एक स्पष्ट दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है.
| पूर्वाधिकारी के. एस. सुदर्शन |
संघ के सरसंघचालक 21 मार्च 2009 – |
उत्तराधिकारी पदस्थ |
विचार [संपादित करें]
मोहन भागवत को एक व्यावहारिक नेता के रूप में देखा जाता है और उन्होंने हिंदुत्व के विचार को आधुनिकता के साथ आगे ले जाने की बात कही है.[2] उन्होंने बदलते समय के साथ चलने पर बल दिया है, लेकिन साथ ही संगठन का आधार समृद्ध और प्राचीन भारतीय मूल्यों में दृढ़ बनाए रखा है.[3] वे कहते हैं कि इस प्रचलित धारणा के विपरीत कि संघ पुराने विचारों और मान्यताओं से चिपका रहता है, इसने आधुनिकीकरण को स्वीकार किया है और इसके साथ ही यह देश के लोगों को सही दिशा भी दे रहा है.[3]
हिंदू समाज में जाति असमानताओं के सवाल पर, भागवत ने कहा है कि अस्पृश्यता के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा है कि अनेकता में एकता के सिद्धांत के आधार पर स्थापित हिंदू समाज को अपने ही समुदाय के लोगों के विरुद्ध होने वाले भेदभाव के स्वाभाविक दोष पर ध्यान देना चाहिए और इस समुदाय के लोगों को समाज में प्रचलित इस तरह के भेदभावपूर्ण रवैये को दूर करने का प्रयास करना चाहिए तथा इसकी शुरुआत प्रत्येक हिंदू के घर से होनी चाहिए.[4]
बाहरी लिंक [संपादित करें]
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आधिकारिक वेबसाइट
- बेएरिया हिंदू संगम 2006 में
- हिंदू संगम में
- राष्ट्र रक्षा संचलन
- "ज्योतिपुंज" पुस्तक के विमोचन समारोह में
सन्दर्भ [संपादित करें]
- ↑ 1.0 1.1 1.2 1.3 1.4 मोहन भागवत: 30 से अधिक वर्षों से एक पशु चिकित्सक और संघ के प्रचारक, 21 मार्च 2009, टाइम्स ऑफ इंडिया, [1]
- ↑ संघ ने मोहन भागवत को अपना नया प्रमुख घोषित किया: 'व्यावहारिक' और आडवाणी के दोस्त, रविवार, 22 मार्च, 2009, इंडियन एक्सप्रेस
- ↑ 3.0 3.1 संघ बदलते समय के साथ आगे बढ़ता है: भागवत, रविवार, 20 नवंबर, 2005, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस
- ↑ समाज से भेदभाव मिटाएं, सोमवार, 29 जनवरी, 2007, हिंदू [2]