मुंह के छाले

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Oral ulcer
वर्गीकरण व बाहरी संसाधन
Aphtha2.jpg
Mouth ulcer on the lower lip
आईसीडी- 528.9
रोग डाटाबेस 22751
मेडलाइन+ 001448
एमईएसएच D019226

मुंह का छाला (/ˈʌl-sɚ/, लैटिन ulcus से या अमरीकी अंग्रेज़ी में: कैंकर सोर्स) श्लेष्मल झिल्ली या होंठों पर या मुंह के आस-पास स्थित उपकला में दरार के कारण मुंह के भीतर दिखाई देने वाले एक खुले घाव का नाम है. इनसे जुड़े कारणों की बहुतायत के साथ मुंह के छालों के विविध प्रकार होते हैं, जिनमें निम्नलिखित कारण शामिल हैं: भौतिक या रासायनिक चोट, सूक्ष्मजीवों से संक्रमण, चिकित्सीय स्थितियां या औषधियां, कैंसरयुक्त और गैर-विशिष्ट प्रक्रियायें. एक बार निर्मित हो जाने पर, जलन तथा/या द्वितीयक संक्रमण के द्वारा छाला बना रहता है. मुंह के छाले के दो आम प्रकार एफ्थस छाले और बुखार के छाले या फीवर ब्लिस्टर्स हैं. होंठों के आस-पास बुखार के छाले हर्पस सिम्प्लेक्स वायरस के कारण होते हैं.[1][2]

कारण[संपादित करें]

आघात[संपादित करें]

हल्की शारीरिक चोट[संपादित करें]

मुंह में लगनेवाली चोट मुंह के छालों का एक आम कारण है. दांत का एक नुकीला किनारा लगना, दुर्घटनावश चबा लेना (विशिष्ट रूप से यह तीक्ष्ण श्वानीय दांत या प्रज्ञा दंत के साथ आम हो सकता है), तीक्ष्ण, अपघर्षक या अत्यधिक नमकीन भोजन, अच्छी तरह न लगाई गई कृत्रिम दंतावली, दंत्य पट्टिका या टूथब्रश से होने वाले घाव मुंह की श्लेषकीय पंक्ति को चोट पहुंचा सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप छाला हो सकता है. यदि चोट के स्त्रोत को हटा दिया जाए, तो सामान्यतः ये छाले एक मध्यम गति से ठीक हो जाते हैं (उदाहरण के लिये, यदि अच्छी तरह न लगाई गई कृत्रिम दंतावली को हटा दिया जाए या बदल दिया जाए).[1].

किसी दंत्य कार्य, जिसमें मुंह के नर्म ऊतकों का दुर्घटनावश अपघर्षण आम है, के बाद भी इन छालों का उत्पन्न हो जाना आम होता है. नर्म श्लेषकीय ऊतकों में दुर्घटनावश लगनेवाली चोटों की संख्या को कम करने के लिये एक दंत चिकित्सक कोई दंत्य कार्य करने से पूर्व पेट्रोलियम जेली की एक रक्षात्मक परत चढ़ा सकता है.

रासायनिक घाव[संपादित करें]

ऐस्पिरिन या अल्कोहल जैसे रसायन, जो मुंह के श्लेषक पर रखे जाते हैं या उसके संपर्क में आते हैं, ऊतकों को परिगलित कर सकते हैं और एक छाले-युक्त सतह का निर्माण कर सकते हैं. सोडियम लॉरिल सल्फेट (SLS), अधिकांश टूथपेस्टों का एक मुख्य अंतर्घटक, मुंह के छालों की बढ़ती हुई घटनाओं में शामिल रहा है.

संक्रमण[संपादित करें]

विषाणुजनित, कवकीय और जीवाण्विक प्रक्रियाओं के कारण मुंह के छाले हो सकते हैं. मुंह के रोगजनक छालों के उत्पन्न होने का एक कारण अपने हाथों को धोये बिना अपने फटे होंठों को छूना है. ऐसा होने का कारण यह है कि आपके हाथों के जीवाणु आपके फटे होठों से उत्पन्न छोटी, खुली दरारों से प्रवेश कर जाते हैं.[1]

विषाणुजनित[संपादित करें]

हर्पस सिम्प्लेक्स वायरस पुनरावर्ती हर्पेटिफॉर्म छालों का सबसे आम कारण है, जिससे पूर्व सामान्यतः दर्दनाक फफोले अनेक बार आते हैं, जो फूट जाते हैं. वेरिसेला ज़ॉस्टर (चिकन पॉक्स, शिंगल्स), कॉक्सैकि अ वायरस और इससे जुड़े उप-प्रकार प्रस्तुतिकरण, कुछ अन्य विषाणुजनित प्रक्रियाएं हैं, जिनके परिणामस्वरूप मुंह के छाले हो सकते हैं. HIV प्रतिकारक-क्षमता में कमी उत्पन्न करता है, जिससे अवसरवादी संक्रमणों या अर्बुद को प्रचुर मात्रा में उत्पन्न होने की अनुमति मिलती है.[2]

जीवाण्विक[संपादित करें]

छालों का कारण बननेवाली जीवाण्विक प्रक्रियाएं माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरक्युलॉसिस (तपेदिक) और ट्रेपोनेमा पैलिडम (उपदंश) के कारण उत्पन्न हो सकती हैं.[2]

अन्यथा सामान्य जीवाण्विक वनस्पतियों, जैसे वायुजीवी स्ट्रेप्टोकॉकी, नेसेरिया , एक्टिनोमाइसेस , स्पाइरोकेटस और बैक्टेरॉइड्स प्रजातियों के संयोजनों द्वारा की जाने वाली अवसरवादी गतिविधियां छालों की प्रक्रिया को लंबा खींच सकती हैं.[3]

कवकीय[संपादित करें]

कॉक्सिडायॉइड इमिटिस (वैली फीवर), क्रिप्टोकॉकस नियोफॉर्मान्स (क्रिप्टोकॉकिस), [[ब्लास्टोमाइसेस डर्मेटिटिडिस|ब्लास्टोमाइसेस डर्मेटिटिडिस]] ("नॉर्थ अमेरिकन ब्लास्टोमाइकॉसिस") कुछ कवकीय प्रक्रियायें हैं, जिनके कारण मुंह के छाले होते हैं.[2]

एककोशी जीव[संपादित करें]

एंटामिबा हिस्टोलिटिका, एक परजीवी एककोशी जीव, को कभी कभी पुटकों के निर्माण के माध्यम से मुंह के छालों का कारण माना जाता है.

प्रतिरक्षा तंत्र[संपादित करें]

अनेक शोधकर्ता एफ्थस छालों को अनेक भिन्न बीमारियों की प्रक्रियाओं, जिनमें से प्रत्येक का उपचार प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा किया जाता है, के अंतिम उत्पाद के रूप में देखते हैं.[2]

ऐसा माना जाता है कि एफ्थस छाले तब बनते हैं, जब हमारा शरीर ऐसे रसायनों के प्रति जागरूक हो जाता है और उन पर आक्रमण कर देता हैं, जिनकी पहचान वह नहीं कर पाता.

प्रतिकारक-क्षमता में कमी[संपादित करें]

बार-बार मुंह के छाले होने की घटनाएं प्रतिकारक-क्षमता में कमी का एक संकेत हो सकती हैं, जो मुंह की श्लेष्म्क झिल्ली में इम्युनोग्लोब्युलिन के निम्न स्तर को सूचित करती है. कीमोथेरपी, HIV और मोनोन्युक्लियॉसिस, सभी प्रतिकारक-क्षमता में कमी के कारण हैं, जिसके साथ ही मुंह के छाले एक आम अभिव्यक्ति बन जाते हैं.

स्व-प्रतिरक्षात्मकता[संपादित करें]

स्व-प्रतिरक्षात्मकता भी मुंह के छालों का कारण होती है. श्लेष्मल झिल्ली पेम्फिगॉइड, एपिथेलियल बेसमेंट मेम्ब्रेन के प्रति एक स्व-प्रतिकारक प्रतिक्रिया, के कारण मुंह की श्लेष्मल झिल्ली में विशल्कन/व्रणोत्पत्ति होती है.

एलर्जी[संपादित करें]

पारदमिश्र जैसे एलर्जेन के संपर्क में आने के कारण श्लेष्मल झिल्ली में छाले उत्पन्न हो सकते हैं.

आहार-संबंधी[संपादित करें]

विटामिन C की कमी के कारण स्कर्वी नामक रोग हो सकता है, जो घावों को भरने की प्रक्रिया को प्रभावित कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप छाले निर्मित हो सकते हैं.[2] इसी प्रकार विटामिन B12, ज़िंक आदि की कमी[4] को भी मुंह के छालों से जोड़ा जाता रहा है.

कोएलिएक रोग छालों का एक आम कारण है, जिससे ग्रस्त होने पर गेहूं, राई या जौ का सेवन करने के परिणामस्वरूप मुंह में दीर्घकालिक छाले हो सकते हैं. यदि इसका कारण लस के प्रति संवेदनशीलता हो, तो बचाव का अर्थ है, अधिकांश ब्रेड, पास्ता, भुने हुए पदार्थों, बीयर आदि से परहेज करते हुए लस-मुक्त भोजन ग्रहण करना और उपलब्धता के अनुसार भोजन में विविध लस-मुक्त प्रकारों को स्थानापन्न करना. यह भी कहा जाता है कि डाएट कोला और शर्कराविहीन च्युइंग गम आदि में पाई जाने वाली कृत्रिम शर्करा (एस्पार्टेम/न्यूट्रीस्वीट/आदि) भी मुंह के छालों का एक कारण है.

फ़्लोवेंट[संपादित करें]

फ़्लोवेंट का प्रयोग करने के बाद मुंह न धोने के कारण भी मुंह के छाले हो सकते हैं.[तथ्य वांछित]

कैंसर[संपादित करें]

मुंह के कैंसर के कारण भी छाले हो सकते हैं क्योंकि घाव का केंद्र रक्त के प्रवाह और परिगलनों को खो देता है. तंबाकू के द्वारा होने वाला स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा इन्हीं में से एक है.

मुंह के छालों से जुड़ी चिकित्सीय स्थितियां[संपादित करें]

निम्नलिखित चिकित्सीय स्थितियां मुंह के छालों से जुड़ी होती हैं:

रोकथाम[संपादित करें]

आघात से जुड़े मामलों के लिये, कष्ट के स्त्रोत से बचना छालों की रोकथाम करेगा, लेकिन चूंकि इस प्रकार का आघात सामान्यतः दुर्घटनावश होता है, अतः इस प्रकार की रोकथाम सामान्यतः व्यावहारिक नहीं होती.

जिन व्यक्तियों में दुर्घटनावश मुंह में लगनेवाली चोट (काटना आदि) के बाद अवसरवादी जीवाण्विक संक्रमणों की घटनाओं का स्तर उच्च हो, उन्हें चोट को संक्रमण से बचाने के लिये 2 दिनों तक प्रत्येक 12 घण्टों में घाव को किसी जीवणु-रोधी माउथवॉश से एक मिनट तक प्रत्यक्ष रूप से धोना चाहिए[तथ्य वांछित]; इस विलयन को रखने के लिये किसी छोटे बरतन का प्रयोग करना महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिकांश जीवाणु-रोधी माउथवॉश मुंह में पूरे एक मिनट तक रहने पर स्वाद की संवेदना की विलंबित दुर्बलता और अन्यथा वांछनीय फ्लोरा की संभावित हानि जैसे हानिकारक प्रभाव उत्पन्न करेंगे. लगभग 1 मिलीलीटर मात्रा पर्याप्त होती है. आदर्श रूप से, प्रथम उपचार 3 घंटों के भीतर कर लिया जाना चाहिए.

उपचार[संपादित करें]

लक्षणात्मक उपचार मुंह के छालों से निपटने का प्राथमिक तरीका है. यदि उनका कारण ज्ञात हो, तो उस स्थिति के उपचार की भी अनुशंसा की जाती है. पर्याप्त मौखिक स्वच्छता भी लक्षणों से राहत देने में सहायक हो सकती है. विशिष्ट एंटीहिस्टामाइन, एन्टासिड, कॉर्टिकोस्टेरॉइड या मुंह के दर्दनाक छालों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से बनाए गए अनुप्रयोग और साथ ही पैरासेटामॉल या आइब्युप्रोफेन जैसे दर्दनाशक और स्थानीय संवेदनहीनताकारक लॉज़न्ज, पेंट या मुंह धोने के लिए प्रयोग किये जाने वाले पदार्थ जैसे बेन्ज़ोकैनाइन सहायक हो सकते हैं और मसालेदार या गर्म भोजन से परहेज करना दर्द को कम कर सकता है. लवण-जल (गर्म नमकीन पानी) से मुंह को धोना सहायक हो सकता है. छाले पर थोड़ी मात्रा में सिरका लगाना एक सदियों पुराना उपाय है, जो कुछ देर के लिये दर्द से राहत देता है. तीन सप्ताह से अधिक समय तक रहनेवाले छालों के उपचार के लिये किसी चिकित्सक से संपर्क करने की आवश्यकता हो सकती है.[5]

यह भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "Mouth ulcers". North East Valley Division of General Practice. http://www.disability.vic.gov.au/bhcv2/bhcarticles.nsf/pages/Mouth_ulcers?open. अभिगमन तिथि: 2006-06-18. 
  2. Sapp, J. Phillip; Lewis Roy Eversole, George W. Wysocki (2004). Contemporary Oral and Maxillofacial Pathology. Mosby. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-323-01723-1. 
  3. घाव-डाइरेक्टेद ड्राई डौसेज फोर्मस ऑफ़ एंटीबैक्टेरियल एजेंट्स फॉर द ट्रीटमेंट ऑफ़ एक्यूट मुकोसल इन्फेक्शन ऑफ़ द ओरल कैविटी, अमेरिकी पेटेंट कार्यालय पूर्ण पाठ और छवि डाटाबेस, 19 जून 2001.
  4. Orbak R, Cicek Y, Tezel A, Dogru Y (March 2003). "Effects of zinc treatment in patients with recurrent aphthous stomatitis". Dent Mater J 22 (1): 21–9. PMID 12790293. 
  5. Van Voorhees, BW (2007-01-18). "Mouth Ulcers - Treatment". MedlinePlus. http://www.nlm.nih.gov/medlineplus/ency/article/001448.htm#Treatment. अभिगमन तिथि: 2008-05-08. 

बाहरी लिंक[संपादित करें]