मामलुक साम्राज्य

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मामलुक साम्राज्य (1250-1517) के बीच मिस्र तथा पश्चिमी अरब पर शासन करने वाला एक साम्राज्य था । तेरहवीं सदी के उत्तरार्ध में इनकी लड़ाई मंगोलों से हुई थी जिसमें वे विजयी रहे थे । इसके आलावा धर्मयुद्धों में भी इमकी भूमिका रही थी । मंगोलों द्वारा बग़दाद के लूटे जाने (1257) के बाद काहिरा में इनका एक ख़लीफ़ा भी होता था ।

यह साम्राज्य एक समय ग़ुलाम के रूप में रहे लोगों द्वारा शासित था - ये ग़ुलाम मुखयतः तुर्क होते थे जिन्हें मामलुक कहा जाता था । उत्तरी भारत में भी लगभग इसी समय (50 साल पहले) ग़ुलाम वंश स्थापित हुआ था जिनके शासक तुर्क नस्ल के ग़ुलाम थे ।

पृष्ठभूमि[संपादित करें]

नवीं सदी से ही अब्बासी ख़िलाफ़त में तुर्क ग़ुलामों का चलन था । कैस्पियन सागर के पश्चिम तथा पूर्व दोनों जगहों पर तुर्क रहते थे । पूर्व के तुर्क ईरानी (या अफ़ग़ान) राजाओं द्वारा ख़रीदे जाते थे जबकि पश्चिमी तुर्क सीरियाई और अरब अमीरों द्वारा । इनके काम राजाओं की रक्षा करने से लेकर सैन्य नेतृत्व तथा घरेलू कामों तक के होते थे । ये अपनी सेवा से प्रसन्न करके आज़ादी पा सकते थे और अपने स्वामी (अमीर) द्वारा चुने गए तुर्क ग़ुलाम लड़कियों से शादी कर सकते थे । कई जगहों पर इनका वंध्याकरण भी कर दिया जाता था जिससे ये परिवार बना पाने में असमर्थ थे । इनको ग़िलमान (अरबी में ग़ुलाम शब्द का बहुवचन) या मामलुक कहते थे । ख़लीफ़ा अल मुतसिम (833-42) ने इनकी क्षमता को देखकर इनको बहुत सराहा और

सुविधाएँ दीं जिनका अरब मूल के अमीरों ने बहुत विरोध किया ।