मापन प्रणालियाँ

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मापन प्रणाली एक इकाइयों का समूह है, जो कि प्रत्येक उस वस्तु के परिमाण को दर्शाने हेतु प्रयोग होता है, जिसे मापा जा सकता है. क्योंकि यह व्यापार और आंतरिक वाणिज्य हेतु महत्वपूर्ण थीं, इसलिये, इन्हें इन्हें संशोधित , नियमित कर मानकीकृत किया गया था. वैज्ञानिक दृष्टि से, जब शोध किये गये, तो पता चला, कि कुछ इकाइयां मानक होतीं हैं, जिनसे कि अन्य सभी को व्युत्पन्न किया जा सकता है. पूर्व में यह राज्यों के शासकों द्वारा निर्धारित कर लागू किये जाती थीं. इसलिये ये आवश्यक रूप से सर्वानुकूल, या आपस में सामन्जस्य रखने वाली नहीं होती थीं.

चाहे हम यह राय बनायें, कि मिस्र निवासियों ने मापन कला की खोज की थी; परन्तु वे यूनानी ही थे, जिन्होंने मापन कला खोजी थी. यूनानियों की ज्यामिती का ज्ञान, और उनके आरम्भिक भार एवं मापों के प्रयोग, जल्दी ही वैज्ञानिक स्तर पर उनकी मापन प्रणाली को स्थान देने लगे. इसकी तुलना में रोमन प्रणाली, जो कि बहुत बाद में आयी, उतनी समृद्ध नहीं थी. [1]

फ्रांसीसी क्रांति ने एक वैज्ञानिक प्रणाली को जन्म दिया, और इससे परम्परागत प्रणालियों को एक वैज्ञानिक स्तर की प्रणाली में बदने पर जोर दिया जाने लगा. अधिकांश प्रणालियों में लम्बाई, [भार]] और समय मौलिक मात्राएं होतीं हैं. या जैसा अब विज्ञान में मना जाता है, कि भार के स्थन पर द्रव्यमान अधिक मौलिक होता है. प्रणालियों में अन्तर्सम्बंध सुधारने हेतु, बदलाव किये जाते रहे हैं.


बाद में विज्ञान के विकासों से पता चला, कि विद्युत आवेश या विद्युत धारा को भी मूल इकाइयों में सम्मिलित किया जाना चाहिये, जिनसे अन्य सभी मापन विद्या की इकाइयाँ परिभाषित हो सकती हैं. अन्य इकाइयां, जैसे शक्ति, गति, इत्यादि को मूल इकाइयों के समूह से व्युत्पन्न किया जा सकता है. उदा० गति=दूरी/समय. इतिहास में, एक मात्रा को कई इकाइयों से मापा जाता रहा है, जैसे कि लम्बाई के लिये इंच, गज, मील, नॉटिकल मील, फुट, इत्यादि. इनके अंतरण कारक दस की साधारण घात भी नहीं हैं, नाही साधारण फ़्रैक्शन हैं. समान सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के सदस्यों की भी समान इकाइयां नहीं थी, ना ब्रिटिश राज में अब संयुक्त राज्य ही रहा था. जहां तक ब्रिटिश व्युत्पन्न सोसाइटियों थीं, लगभग आधी ने ब्रिटिश राज से इंकार कर दिया, जैसे कि संयुक्त राज्य.


मीट्रिक और अन्य हाल की प्रणालियों में, एक मूल मात्रा हेतु एक ही इकाई प्रयोग की जाती है. प्रायः द्वितीयक इकाइयां (गुणक और उप-गुणक) प्रयोग होते हैं, जो कि मूल इकाई को दस की घात से दुणा कर देते हैं. जैसे लम्बाई की मूल इकाई है मीटर; एक 1.234 m की लम्बाई 1234.0 मिलिमीटर होगी, या 0.001234 किलोमीटर.

मीट्रिक प्रणाली[संपादित करें]

चित्र:MetricImperialUSCustomaryUnits.jpg
एक शिशु बोतल, जो तीन मापन प्रणालियों में माप देती है—इम्पीरियल, U.S. परंपरागत और मीट्रिक


इम्पीरियम और U.S. परंपरागत इकाइयां[संपादित करें]

प्राकृतिक इकाइयां[संपादित करें]

गैर-मानक इकाइयां

असामान्य मापन इकाइयां, जो कभी कभी पुस्तकों, समाचार पत्रों इत्यादि में मिल जातीं हैं, इनमें से कुछ हैं:

क्षेत्रफ़ल[संपादित करें]

ऊर्जा[संपादित करें]

द्रव्यमान[संपादित करें]

उर्ध्वाधर लम्बाई[संपादित करें]

आयतन[संपादित करें]

मुद्रा की इकाइयां[संपादित करें]

ऐतिहासिक मापन प्रणालियां[संपादित करें]

मध्य-पूर्वीय मापन प्रणालियां[संपादित करें]

दक्षिण एशियाई मापन प्रणालियाँ[संपादित करें]

पूर्व एशियाई मापन प्रणालियाँ[संपादित करें]

यूनानी-रोमन मापन प्रणालियाँ[संपादित करें]

मध्य कालीन यूरोपीय मापन प्रणालियाँ[संपादित करें]

मध्य कालीन यूरोपियाई मापन प्रणालियाँ, मध्य काल (या यूरोपियाई डार्ल एजेज़ के काल में), खेती बाहुल्य जीवन यापन के कारण बने। इन्हें अंग्रेजी में फ्यूडल मापन प्रणालियाँ भी कहा जाता है। माप अस्थिर और लगभग थे।

पूर्वी यूरोपियाई[संपादित करें]

पूर्वी यूरोप में परंपरागत भार एवं माप, अधिकांशतः यूनानी मूल के ही थे:

पश्चिम और उत्तरी यूरोपियाई[संपादित करें]

पश्चिमी और उत्तरी यूरोप में परंपरागत भार एवं माप, अधिकांशतः रोमन मूल के ही थे:

अन्य ऐतिहासिक मापन प्रणालियाँ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

अंतरण कारक[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Quoted from the Canada Science and Technology Museum website
  2. M. Ismail Marcinkowski, Measures and Weights in the Islamic World. An English Translation of Professor Walther Hinz's Handbook “Islamische Maße und Gewichte“, with a foreword by Professor Bosworth, F.B.A. Kuala Lumpur, ISTAC, 2002, ISBN 983-9379-27-5. This work is an annotated translation of a work in German by the late German orientalist Walther Hinz, published in the Handbuch der Orientalistik, erste Abteilung, Ergänzungsband I, Heft 1, Leiden, The Netherlands: E. J. Brill, 1970.

बाहरी कड़ियां[संपादित करें]