मानसिक रोग
| मानसिक रोग {{{other_name}}} वर्गीकरण एवं बाह्य साधन |
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| एम.ईएसएच | D001523 |
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मनोरोग (Mental disorder) किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य की वह स्थिति है जिसे किसी स्वस्थ व्यक्ति से तुलना करने पर 'सामान्य' नहीं कहा जाता। स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में मनोरोगों से ग्रस्त व्यक्तियों का व्यवहार असामान्य अथवा दुरनुकूली (मैल एडेप्टिव) निर्धारित किया जाता है और जिसमें महत्वपूर्ण व्यथा अथवा असमर्थता अन्तर्ग्रस्त होती है। इन्हें मानसिक रोग, मनोविकार, मानसिक बीमारी अथवा मानसिक विकार भी कहते हैं।
मनोरोग मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन की वजह से पैदा होते हैं तथा इनके उपचार के लिए मनोरोग चिकित्सा की जरूरत होती है।[1]
अनुक्रम |
[संपादित करें] प्रमुख मानसिक रोग
मानसिक विकार बहुत तरह के होते हैं। ये विकार व्यक्तित्व, मनोदशा (मूड), खाने की आदतों, चिन्ता आदि से सम्बन्धित हो सकते हैं। इस प्रकार मानसिक रोगों की सूची बहुत बड़ी है। कुछ् मुख्य मनोरोगों की सूची नीचे दी गयी है-
- भय (फोबिया),
- मनोदशा विकार (मूड डिस्आर्डर),
- ज्ञानात्मक विकार (काग्निटिव डिस्आर्डर),
- व्यक्तित्व विकार,
- खंडित मनस्कता (शाइज़ोफ्रेनिया) और
- द्रव्य संबंधी विकार (सबस्टैंस रिलेटेड डिस्आर्डर) ; जैसे मद्यसार (ऐलकोहाल) पर निर्भरता
- अवसाद (Depression)
- आईईडी (Intermittent explosive disorder)
- चिंता
- चित्तविभ्रम
- द्विध्रुवी विकार
- बहुव्यक्तित्व विकार
- मनोविक्षिप्ति
- मानसिक मन्दन
- संविभ्रम
- अंतराबंध या स्किजोफ्रीनिया
- उत्पीड़न भ्रांति
[संपादित करें] मनोरोगों के मुख्य कारण
मनोरोगों के कारण कई प्रकार के होते हैं। इनमें से मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं :
[संपादित करें] जैविक कारण
आनुवंशिक : मनोविक्षिप्ति या साइकोसिस (जैसे स्कीजोफ्रीनिया, उन्माद, अवसाद इत्यादि), व्यक्तित्व रोग, मदिरापान, मंदबुद्धि, मिर्गी इत्यादि रोग उन लोगों में अधिक पाये जाते हैं, जिनके परिवार का कोई सदस्य इनसे पीड़ित हों तो संतान को इनका खतरा लगभग दोगुना हो जाता है।
- शारीरिक गठन
स्थूल (मोटे) व्यक्तियों में भावात्मक रोग (उन्माद, अवसाद या उदासी इत्यादि), हिस्टीरिया, हृदय रोग इत्यादि अधिक होते हैं जबकि लंबे एवं दुबले गठन वाले व्यक्तियों में विखंडित मनस्कता (स्कीजोफ्रीनिया), तनाव, व्यक्तित्व रोग अधिक पाये जाते हैं।
- व्यक्तित्व
अपने में खोये हुए, चुप रहने वाले, कम मित्र रखने वाले किताबी-कीड़े जैसे गुण वाले, स्कीजायड व्यक्तित्व वाले लोगों में स्कीजोफ्रीनिया अधिक होता है, जबकि अनुशासित तथा सफाई पसंद, समयनिष्ठ, मितव्ययी जैसे गुणों वाले खपती व्यक्तित्व के लोगों में खपत रोग (बाध्य विक्षिप्त) अधिक पाया जाता है।
[संपादित करें] शरीरवृत्तिक कारण :
किशोरावस्था, युवावस्था, वृद्धावस्था, गर्भ-धारण जैसे शारीरिक परिवर्तन कई मनोरोगों का आधार बन सकते हैं।
[संपादित करें] वातावरण जनित कारण :
[संपादित करें] शारीरिक खान-पान संबंधी कारण :
कुछ दवाओं, रासायनिक तत्वों, धातुओं, मदिरा तथा अन्य मादक पदार्थों इत्यादि का सेवन मनोरोगों की उत्पत्ति का कारण बन सकता हैं।
[संपादित करें] मनोवैज्ञानिक कारण :
आपसी संबंधों में तनाव, किसी प्रिय व्यक्ति की मृत्यु, सम्मान को ठोस, कार्य को खो बैठना, आर्थिक हानि, विवाह, तलाक, शिशु जन्म, कार्य-निवृत्ति, परीक्षा या प्यार में असफलता इत्यादि भी मनोरोगों को उत्पन्न करने या बढ़ाने में योगदान देते हैं। समाजीक हालात
[संपादित करें] सामाजिक-सांस्कृतिक कारण :
सामाजिक एवं मनोरंजक गतिविधियों से दुराव, अकेलापन, राजनीतिक, प्राकृतिक या सामाजिक दुर्घटनाएं (जैसे कि लूटमार, आतंक, भूकंप, अकाल, बाढ़, सामाजिक बोध एवं अवरोध, महंगाई, बेरोजगारी इत्यादि) मनोरोग उत्पन्न कर सकते हैं।
[संपादित करें] तथ्य
- मनोरोग चिकित्सक द्वारा दवाएं बतायी गई हैं तो इनका सेवन अवश्य करना चाहिए
- दूसरी बीमारियों की तरह यह रोग भी आंतरिक स्तर पर जैविक असंतुलन की वजह से होता है
- निगरानी में दवाएं लेना कारगर होता है, अब तो नई दवाओं के उपलब्ध होने के बाद लंबी अवधि तक दवाएं लेने के मामले कम हो रहे हैं
- दवाओं के सेवन से मनोविकारों में काफी कमी होती है, खासतौर से तब जबकि इलाज शुरूआती चरण में आरंभ हो जाए
- यदि चिकित्सक ने दवा लेने की सलाह दी हो तो यह अवश्य लेनी चाहिए
- मनोविकारों के उपचार में दी जाने वाली दवाएं रासायनिक असंतुलन को बहाल करती हैं, कुछ दवाओं से नींद आती है लेकिन वे नींद की गोलियां नहीं होतीं
- अवसाद जैसे मनोविकार भी मधुमेह या उच्च रक्तचाप की तरह के रोग ही होते हैं, और इनके लिए भी विषेशज्ञ की देखरेख में इलाज कराने की आवश्यकता होती है।
[संपादित करें] गलत धारणाएं
- मानसिक विकार कोई रोग नहीं हैं बल्कि बुरी आत्माओं की वजह से पैदा होते हैं
- दवाओं के सेवन से बचना चाहिए
- आपको यह रोग अपनी कमजोरी से हुआ है, और इससे बचाव करना चाहिए
- दवाएं नुकसानदायक होती हैं, ये निर्भरता बढ़ाती हैं और ं जीवनभर लेनी पड़ती हैं
- ज्यादातर मनोविकारों का कोई इलाज नहीं होता
- बच्चों को दवाएं नहीं दी जानी चाहिएं
- इलाज के लिए नींद की गोलियां दी जाती हैं
- अवसाद जैसे मर्ज अपने आप ठीक होते हैं या प्रभावित व्यक्ति के प्रयासों से
[संपादित करें] संदर्भ
- ↑ असाध्य नहीं मनोरोग।हिन्दुस्तान लाइव।(हिन्दी)।७ अक्तूबर, २००९।डॉ. गौरव गुप्ता
[संपादित करें] इन्हें भी देखें
[संपादित करें] बाहरी सूत्र
- मन की दुनिया (गूगल पुस्तक; लेखक - यतीश अग्रवाल)
- मानसिक विकार
- असाध्य नहीं मनोरोग (हिन्दुस्तान लाइव) (हिन्दी)।७ अक्तूबर, २००९ - डॉ. गौरव गुप्ता
- मानसिक चिकित्सा तंत्र के मनोविकार (हिन्दुस्तान लाइव)
- रोड रेज गंभीर मनोविकार
- मानस-रोगों के वैद्य तुलसीदास (मधुमती)
- भारत का मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम