मानव भूगोल
मानव भूगोल, भूगोल की प्रमुख शाखा हैं जिसके अन्तर्गत मानव की उत्पत्ति से लेकर वर्तमान समय तक उसके पर्यावरण के साथ सम्बन्धों का अध्यन किया जाता हैं। मानव भूगोल की एक अत्यन्त लोकप्रिय और बहु अनुमोदित परिभाषा है, मानव एवं उसका प्राकृतिक पर्यावरण के साथ समायोजन का अध्ययन।[1] मानव भूगोल में पृथ्वी तल पर मानवीय तथ्यों के स्थानिक वितरणों का अर्थात् विभिन्न प्रदेशों के मानव-वर्गों द्वारा किये गये वातावरण समायोजनों और स्थानिक संगठनों का अध्ययन किया जाता है। मानव भूगोल में मानव-वर्गो और उनके वातावरणों की शक्तियों, प्रभावों तथा प्रतिक्रियाओं के पारस्परिक कार्यात्मक सम्वन्धों का अध्ययन, प्रादेशिक आधार पर किया जाता है।[2]
मानव भूगोल का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यूरोपीय देशों, पूर्ववर्ती सोवियत संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा भारत के विश्वविद्यालयों में इसके अध्ययन में अधिकाधिक रूचि ली जा रही है। पिछले लगभग ४० वर्षों में मानव भूगोल के अध्ययन क्षेत्र का वैज्ञानिक विकास हुआ है और संसार के विभिन्न देशों में वहाँ की जनसंख्या की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक उन्नति के लिये संसाधन-योजना में इसके ज्ञान का प्रयोग किया जा रहा है।
मानव भूगोल के विषय [संपादित करें]
- आर्थिक भूगोल
- राजनीतिक भूगोल
- जनसंख्या भूगोल
- सांस्कृतिक भूगोल
- कृषि भूगोल
- परिवहन भूगोल
- प्रादेशिक भूगोल
- नगरीय भूगोल
- ग्रामीण भूगोल
- अधिवास भूगोल
- प्रजातिय भूगोल
- भाषा भूगोल
- निर्वाचन भूगोल
- गणितीय भूगोल
- जनसंख्या भूगोल
- वाणिज्यिक भूगोल
- व्यावहारिक भूगोल
- अनुप्रयुक्त भूगोल
- औद्योगिक भूगोल
- सैन्य भूगोल
- परिवहन भूगोल
- पर्यटन भूगोल
- चिकित्सा भूगोल