मानव जाति विज्ञान

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मानव जाति विज्ञान (यूनानी शब्द ἔθνος एथनॉस, अर्थ "लोग, राष्ट्र, नस्ल") मानव शास्त्र की एक शाखा है जो मानवों के सजातीय, नस्ली और/या राष्ट्रीय वर्गों के उद्गमों, वितरण, तकनीकी, धर्मं, भाषा तथा सामाजिक संरचना की तुलना तथा विश्लेषण करती है।[1]

वैज्ञानिक शाखा के रूप में[संपादित करें]

मानव जाति शास्त्र, संस्कृति के प्रत्यक्ष संपर्क द्वारा एकल समूहों का अध्ययन, की तुलना में मानव जाति विज्ञान उन शोधों को स्वीकार करता है जो मानव जाति विज्ञानियों ने एकत्रित किया है और फिर उनके आधार पर भिन्न संस्कृतियों की समानताओं और असमानताओं की तुलना करता है। वाक्यांश, मानव जाति विज्ञान का श्रेय एडम फ्रेंज कॉल्लर को दिया जाता है जिन्होंने 1783 में वियना में प्रकाशित अपनी पुस्तक Historiae ivrisqve pvblici Regni Vngariae amoenitates में इसका प्रयोग किया था और इसे परिभाषित किया था।[2] भाषाई और सांस्कृतिक भिन्नता में कॉल्लर की रूचि अपने पड़ोसी, बहु भाषी किंगडम ऑफ हंगरी की परिस्थिति और इसके स्लोवाक्स लोगों के बीच उनकी जड़ें होने के कारण तथा सर्वाधिक सुदूर बालकन्स में ओट्टोमैन साम्राज्य की क्रमिक पराजय के फलस्वरूप शुरू हुए स्थानांतरण के कारण पैदा हुआ।[3]

मानव इतिहास का पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक अपरिवर्तनशीलताओं का निरूपण तथा "मानव स्वभाव" के व्यापकीकरण का निरूपण, एक सिद्धांत जिसकी 19वीं शताब्दी से अनेकों दार्शनिकों (हेगेल, मार्क्स, संरचनात्मकतावाद आदि) द्वारा आलोचना की जा रही है, मानव जाति विज्ञान के उद्देश्यों में से एक रहा है, जैसे कि कौटुम्बिक व्यभिचार का प्रतिबन्ध और सांस्कृतिक परिवर्तन. विश्व के कुछ भागों में मानव जाति विज्ञान, जांच के स्वतंत्र मार्ग और शैक्षणिक सिद्धांत के मार्ग पर विकसित हुआ है और इसके साथ ही सांस्कृतिक मानव शास्त्र संयुक्त राज्य अमेरिका में और सामाजिक मानव शास्त्र ग्रेट ब्रिटेन में अधिक प्रभावशाली हो गया है। इन तीनों शब्दों में मध्य अंतर बहुत अधिक अस्पष्ट है। 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से ही मानव जाति विज्ञान को एक शैक्षिक क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है, विशेषतः यूरोप में और इसे कभी-कभी मानव समूहों के तुलनात्मक अध्ययन के रूप में भी समझा जाता है।

15वीं शताब्दी में अन्वेषकों द्वारा किये गए अमेरिका के अन्वेषण ने पश्चिमी की नयी विचारधारा के निरूपण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी, जैसे कि, "अन्य" के सम्बन्ध में धारणा. इस शब्द का प्रयोग "असभ्य" के साथ किया गया था, जिसे निर्दयी जंगली या "शरीफ असभ्य" के रूप में देखा जाता है। इस प्रकार, सभ्यता का निर्दयता के प्रति दोहरा विरोध किया जा रहा था, जो एक प्राचीन विरोध था और जिसमे सार्वजनिक रूप से सहभाजित और भी अधिक मानव जातिवाद संघटित था। मानव जाति विज्ञान की प्रगति, उदहारण के लिए क्लौडे लिवाइस स्ट्रॉस के संरचनात्मक मानव शास्त्र के साथ, ने रेखीय प्रगति के सिद्धांतों की आलोचना का मार्ग प्रशस्त किया, या "इतिहास संपन्न समाजों" और "इतिहास रहित समाजों" के मध्य आभासी विरोध का मार्ग प्रशस्त किया और संचयी विकास द्वारा गठित इतिहास के सीमित दृष्टि कोण पर बहुत अधिक निर्भर होकर न्याय किया।

लेवी-स्ट्रॉस प्रायः, मानव जाति विज्ञान के प्रारंभिक उदहारण के रूप में नरभक्षण पर मॉंटैग्ने द्वारा लिखे गए निबंध की ओर संकेत करते थे। एक संरचनात्मक तरीके द्वारा, लेवी-स्ट्रॉस का उद्देश्य मानव समाज में सार्वलौकिक अपरिवर्तनशीलताओं को खोजना है, उनका मत था कि इसमें कौटुम्बिक व्यभिचार पर प्रतिबन्ध प्रमुख था। हालांकि, अनेकों 19वीं और 20वीं शताब्दी के सामाजिक विचारकों, जिसमे मार्क्स, नीत्ज्शे, फोको, एलथसर और डेल्यूज़ भी शामिल थे, द्वारा ऎसी सांस्कृतिक सार्वलौकिकता के दावों की आलोचना की गयी है।

1950 के दशक के प्रारंभ में मार्सेल ग्रिऔले, जर्मेन डायटरलेन, क्लौडे लेवी-स्ट्रॉस और जीन रॉच के साथ, फ्रेंच स्कूल ऑफ एथोनोलौजी, शाखा के विकास में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण था।

विद्वान[संपादित करें]

  • मानव जाति विज्ञान के विद्वानों की सूची

यह भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. Newman, Garfield, et al. (2008). Echoes from the past: world history to the 16th century. Toronto: McGraw-Hill Ryerson Ltd. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-07-088739-X. 
  2. मैगो स्मिटेक और बोज़िदर जेज़ेर्निक, "स्लोवेनिया में मानवविज्ञान परंपरा". इन: हैन एफ. वर्मुलेन और आर्तुरो अल्वारेज़ रोल्डन, एड्स. फिल्ड वर्क एंड फुटनोट्स: स्टडीज़ इन द हिस्ट्री ऑफ़ यूरोपियन एन्थ्रोपोलॉजी. 1995.
  3. घेयोर्घिटा गियना (Gheorghiţă Geană), "डिस्कवरिंग द होल ऑफ़ मैनकाइंड: जेनसिस ऑफ़ एंथ्रोपोलॉजी थ्रू द हेगेलियन लुकिंग-ग्लास." इन: हैन एफ. वर्मुलेन और आर्तुरो अल्वारेज़ रोल्डन, एड्स. फिल्ड वर्क एंड फुटनोट्स: स्टडीज़ इन द हिस्ट्री ऑफ़ यूरोपियन एन्थ्रोपोलॉजी.' 1995.

ग्रन्थसूची[संपादित करें]

  • जोहान जॉर्ज एडम फोरस्टर वॉयेज राउंड द वर्ल्ड इन हिज़ ब्रिटैनिक मेजेस्टी स्लूप, रेज़लूशन, कमांडेड बाई कैप्टेन जेम्स कूक, ड्यूरिंग द इयर्स 1772, 3, 4, एंड 5 (2 खंड), लंदन (1777)
  • लेवी-स्ट्रास, क्लाउड, द इलिमेंट्री स्ट्रक्चर्स ऑफ़ किंग्शिप, (1949), स्ट्रक्चरल एंथ्रोपोलॉजी (1958)
  • मार्सेल मौस, Essai sur le don के रूप में मूल प्रकाशित हुआ। 1925 में Forme et raison de l'échange dans les sociétés archaïques, उत्कृष्ट उदाहरण अंग्रेजी संस्करण में द गिफ्ट: द फॉर्म एंड रीज़न फॉर एक्सचेंज इन आर्केइक सोसाइटिज़ के रूप में गिफ्ट अर्थव्यवस्था पर प्रकट होता है।
  • मेंब्युरी-लुईस, डेविड, एक्वे-शवंते सोसाइटी . (1967), द पॉलिटिक्स ऑफ़ एथनिसिटी: इन्डिजनस पीपल्स इन लैटिन अमेरिकन स्टेट्स (2003)[1].
  • क्लास्ट्रेस, पियरे, सोसाइटी अगेंस्ट द स्टेट (1974),
  • पॉप, मिहाई और ग्लौको संगा, Problemi generali dell'etnologia europea ला रिसेर्सा फोकलोरिका, नंबर 1, ला कल्चर पापोलेर Questioni teoriche (अप्रैल, 1980), पीपी 89-96

बाहरी लिंक्स[संपादित करें]