माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस हिन्दी २००३

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माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस २००३ - हिन्दी
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ऊपर दाएं से दक्षिणावर्ती वर्ल्ड, पब्लिशर, पावर-पॉइंट, एक्सैल - उपलब्ध चित्र अंग्रेज़ी संस्करणों के हैं।
विकासकर्ता माइक्रोसॉफ्ट
स्थिर संस्करण

सर्विस पैक -३ (SP3) बहुभाषी भाषाओं हेतु इंटरफेस पैक

/ १८ सितंबर २००७
प्रचालन तंत्र विंडोज़ २००० सर्विस पैक-३, विंडोज़ एक्सपी व अगले संस्करण
प्लेटफॉर्म माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़
प्रकार ऑफिस सूट
लाइसेंस प्रोप्राइटरी ई.यू.ए.ले.
जालस्थल माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस ऑनलाइन मुखपृष्ठ

एम. एस.ऑफ़िस 2003 हिंदी, माइक्रोसॉफ़्ट की ऑफ़िस श्रृंखला में नवीनतम संस्करण था जिसे १६ फ़रवरी २००४ को नई दिल्ली में लांच किया गया। कंप्यूटर के क्षेत्र में अब तक हिंदी का प्रयोग फ़ॉन्ट स्तर पर ही किया जाता था और इसका उपयोग भी शब्दसंसाधन तक ही सीमित था, लेकिन ऑफ़िस हिंदी के आगमन से हिंदी सच्चे अर्थों में कंप्यूटर के क्षेत्र में विश्‍व की अन्य विकसित भाषाओं के समकक्ष आ गई। वस्तुत: माइक्रोसॉफ़्ट ने इसके साथ पहली बार हिंदी को ऑपरेटिंग सिस्टम में समाहित किया, जिसके फलस्वरूप कंप्यूटर संबंधी सभी अनुप्रयोगों में हिंदी का प्रयोग सहजता और सरलता से किया जा सकता है। कंप्यूटर में अंग्रेज़ी के व्यापक उपयोग के कारण आम लोगों में यह धारणा बन गई थी कि अंग्रेज़ी ही कंप्यूटर की मूल भाषा है। लेकिन इसके आ जाने से हिन्दी कंप्यूटिंग के क्षेत्र में कुछ विशेष सुविधाओं का प्रवेश हो गया। जैसे किसी भी सॉफ़्टवेयर पर फ़ाइल का नाम हिन्दी में रखा जा सकता था, अकारादि क्रम से शब्दों की अनुक्रमणिका बनाई जा सकती थी और इस कारण हिंदी में कोश निर्माण भी किया जा सकता था।

आरंभ और विकास[संपादित करें]

हिन्दी इन्टरफ़ेस

विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम का निर्माण और विकास माइक्रोसॉफ़्ट कॉर्पोरेशन ने किया है और इसके अंतर्गत एम. एस.ऑफ़िस के विभिन्न अनुप्रयोगों का विकास भी माइक्रोसॉफ़्ट के तत्वावधान में ही किया गया है, किंतु आरंभ में विश्‍व की कुछेक भाषाओं को ही इसमें स्थान दिया गया था। लेकिन यह एहसास होने पर कि विश्‍व में तीसरे स्थान पर बोली जाने वाली भाषा आज भी हिंदी है और इसकी और अधिक उपेक्षा से माइक्रोसॉफ़्ट के व्यापारिक हितों को भी नुक्सान पहुँच सकता है, माइक्रोसॉफ़्ट ने वर्ष 1998 में वर्ड 2000 के दक्षिण पूर्वेशिया संस्करण में हिंदी को सीमित स्थान देकर इसकी शुरुआत की। उस समय तक भारत की अनेक कंपनियों ने हिंदी और अनेक भारतीय भाषाओं में विभिन्न प्रकार के फ़ॉन्ट बनाने का काम शुरु कर दिया था। यही कारण है कि आरंभ में माइक्रोसॉफ़्ट की इस शुरुआत पर लोगों ने इतना ध्यान नहीं दिया, किंतु कुछ समय के बाद ऑफ़िस एक्स पी के लोकार्पण के बाद कंप्यूटर जगत् में एक हलचल सी मच गई। ऑफ़िस एक्स पी के माध्यम से पहली बार हिंदी को ऑपरेटिंग सिस्टम में समाहित किया गया था और उपयोगकर्ता सरलता और सहजता के साथ कंप्यूटर पर अपने सभी कार्य हिंदी में संपन्न कर सकते थे किंतु ये सभी कार्य विंडोज़ 2000 और उससे ऊपर के सिस्टम में ही संभव थे। इसका प्रमुख कारण यह था कि माइक्रोसॉफ़्ट ने यूनिकोड के विश्‍वव्यापी मानक को अपनाया था, जिसका न्यूनतम आधार विंडोज़ 2000 था। इस वर्ष ऑफिस हिन्दी का ऑफिस हिन्दी 2007 के नाम से नया संस्करण भी प्रस्तुत कर दिया गया है।

प्रमुख विशेषताएँ[संपादित करें]

फ़ाइल का नाम हिन्दी में
ऑटो करेक्ट हिन्दी में

इसकी सबसे महत्वपूर्ण परिणति यह हुई है कि अब विंडोज़ हिंदी का संपूर्ण इंटरफ़ेस ही हिंदी में रूपांतरित हो गया है अर्थात् इसका मेनू, सबमेनू, सहायता आदि भी हिंदी में हो गए हैं। इससे अंग्रेज़ी न जानने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए काफ़ी सुविधा हो गई है। अब फ़ाइलों के नाम हिंदी में रखे जा सकते हैं। हिंदी और अंग्रेज़ी में तथा हिंदी के विभिन्न कुंजीपटलों के बीच स्विच करने के लिए एक भाषा पट्टी दी गई है। इस पट्टी की सहायता से उपयोगकर्ता हिंदी के विभिन्न कुंजीपटलों में से अपनी पसंद के कुंजीपटल का चुनाव कर सकते हैं। इनमें प्रमुख कुंजीपटल हैं: रेमिंगटन, इन्स्क्रिप्ट और ध्वन्यात्मक लिप्यंतरण कुंजीपटल। रेमिंगटन कुंजीपटल उन उपयोगकर्ताओं के लिए सहज है जो टाइपराइटर पर काम करना के अभ्यस्त रहे हैं। इन्स्क्रिप्ट कुंजीपटल कंप्यूटर का तर्कसंगत कुंजीपटल है, जिसे देवनागरी के वर्णक्रम के अनुरूप बनाया गया है।

मूलत: कंप्यूटर पर हिंदी में काम करने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए यह बहुत उपयुक्‍त है। ध्वन्यात्मक लिप्यंतरण कुंजीपटल रोमन लिपि के माध्यम से काम करने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए आदर्श है। इसमें हिंदी की बारहखड़ी की पद्धति का पूरा उपयोग किया गया है। यदि आप कृष्ण टाइप करना चाहते हैं तो जैसे ही आप k टाइप करेंगे तो क का कि की कु कू के कै को कौ कृ कं क: की पूरी बारहखड़ी नीचे दिखाई पड़ने लगेगी और उसके नीचे k kaa ki kee ke kai ko kau kR k^ kH दिखाई पड़ने लगेगा। इसे देखकर उपयोगकर्ता कृष्ण के कृ को सहजता से टाइप कर सकेगा। इसके बाद जब वह s टाइप करेगा तो स की पूरी बारहखड़ी के अलावा s से बनने वाले श (sh) और ष (Sh) के रोमन अक्षर भी दिखाई पड़ने लगेंगे और अंत में n टाइप करते ही ण (N) भी दिखाई पड़ने लगेगा।

इसके अतिरिक्त ऑटो करेक्ट, ऑफ़िस हिंदी की अन्यतम विशेषता है। ऑटो करेक्ट और स्पेल चेकर में मुख्य अंतर यही है कि स्पेल चेकर केवल अशुद्धियों को रेखांकित करता है और ऑटो करेक्ट उन्हें ठीक भी कर देता है। हिंदी में थिसॉरस का प्रवेश भी पहली बार ऑफ़िस हिंदी में ही किया गया है। दाहिने क्‍लिक से आप किसी भी शब्द के पर्याय, विलोम और संबद्ध शब्दों को देख सकते हैं। हिंदी में अकारादि क्रम से अनुक्रमणिका तैयार करने का कार्य सॉर्टिंग के माध्यम से वर्ड, एक्सेस और एक्सेल के माध्यम से सहजता से किया जा सकता है। इसका उपयोग कोश निर्माण, पुस्तकालय और वरीयता सूची आदि के लिए किया जा सकता है। खोजें और बदलें के माध्यम से आप हिंदी या अंग्रेज़ी के किसी भी शब्द या वाक्य को खोजकर पूरे पाठ में एक साथ भी बदल सकते हैं। वर्ड आर्ट डीटीपी की खास विशेषता मानी जाती है। अब यह विशेषता ऑफ़िस हिंदी में भी सुलभ हो गई है। वाटर मार्क या जलचिह्न का उपयोग करेंसी नोट या गोपनीय दस्तावेजों में किया जाता है। यह सुविधा भी ऑफ़िस हिन्दी में उपलब्ध करा दी गई है। कुल मिला कर यह कि ऑफ़िस हिंदी के आगमन से आज कंप्यूटर के क्षेत्र में कोई वर्जित प्रदेश नहीं रह गया है।

संदर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]