मल्कानगिरि
| मल्कानगिरी | |
| — शहर — | |
|
|
|
| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |
| देश | |
| राज्य | उड़ीसा |
| ज़िला | मल्कानगिरी |
| जनसंख्या | 23,110 (2001 के अनुसार [update]) |
| क्षेत्रफल • ऊँचाई (AMSL) |
• 170 मीटर (558 फी॰) |
निर्देशांक: मल्कानगिरी शहर दक्षिणी उड़ीसा के मलकनगिरी जिला का मुख्यालय है। यह जिला 6115 वर्ग किमी. के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। उड़ीसा का यह नवनिर्मित जिला 1992 में राज्य के पुनर्गठन के बाद अस्तित्व में आया। लगभग पूरा जिला घने जंगलों से घिरा हुआ है। पोटेरू, सबेरी, सिलेरू, कोलाब और मछकुंडा यहां से बहने वाली प्रमुख नदियां हैं। प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध यह जिला बालीमेला हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा बोंडा हिल्स, भैरवी मंदिर, अम्माकुंडा, मान्यमकोंडा, मोटू, सतीगुडा बांध आदि लोकप्रिय दर्शनीय स्थल हैं।
अनुक्रम |
प्रमूख आकर्षण [संपादित करें]
बालीमेला [संपादित करें]
यह ब्लॉक मलकनगिरी से 35 किमी. की दूरी पर स्थित है। आन्ध्र प्रदेश और उड़ीसा सरकार के सौजन्य से नगर के पास हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट स्थापित किया गया है। यहां की सिलेरी नदी पर बना बालीमेला बांध आसपास के क्षेत्र की सिंचाई का मुख्य स्रोत है।
सतीगुडा बांध [संपादित करें]
मलकनगिरी नगर से 8 किमी. की दूरी पर स्थित सतीगुडा बांध से पूरे साल आसपास की कृषि भूमि सींची जाती है। यह बांध 943 मीटर लंबा और 17 मीटर ऊंचा है। बांध के चारों तरफ की पहाड़ियां इसे एक आदर्श पिकनिक स्थल बनाती हैं। बांध के जल में बोटिंग का आनंद लिया जा सकता है। साथ ही निकट बना भगवान शिव का गुफामंदिर यहां आने वाले लोगों के आकर्षण के केन्द्र में होता है।
बोंडा हिल्स [संपादित करें]
यह पहाड़ियां मलकनगिरी के खोइरपुटपुट ब्लॉक के अन्तर्गत आती हैं। चारों ओर से घने जंगलों से घिरा यह स्थान यहां के आदिवासी मूल समुदाय का घर है। माना जाता है कि देवी सीता का स्नान करते वक्त मजाक उडाने पर इन लोगों को उन्होनें श्राप दे दिया था। जनवरी माह में यहां पटखंडा यात्रा पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व में तलवार की पूजा की जाती है और उसके पांडवों से संबंधित माना जाता है।
अम्माकुंड [संपादित करें]
यह लोकप्रिय पर्यटन स्थल जिला मुख्यालय से 70 किमी. दूर कोइरपुट ब्लॉक में स्थित है। यह स्थान प्राकृतिक झरने और तंग घाटी के लिए जाना जाता है जो एक नदी के नीचे गिरने के फलस्वरूप बनता है। घने जंगलों और छोटी-छोटी पहाड़ियों से घिरा यह स्थान प्रकृति की आंचल में कुछ समय व्यतीत करने के लिए एकदम उपयुक्त है।
मन्यमकोंडा [संपादित करें]
भगवान महाप्रभु के मंदिरों के लिए लोकप्रिय यह स्थान मलकनगिरी से 90 किमी. की दूरी पर है। मार्च-अप्रैल के महीने में यहां बडा यात्रा नामक विशाल पर्व आयोजित किया जाता है जिसमें हजारों की तादाद में लोग एकत्रित होते हैं। यह पर्व मौली मां मंदिर से प्रारंभ होकर मन्यमकोंडा में जाकर समाप्त होता है। इस पर्व में कानम राजू, पोटा राजू और बाल राजू नामक देवों की पूजा होती है। कानम राजू को भगवान कृष्ण, पोटा राजू को भीम और बाल राजू को अर्जुन से संबंधित माना जाता है।
मोटू [संपादित करें]
यह स्थान समुद्र तल से 150 फीट की ऊंचाई पर मलकनगिरी के एकदम दक्षिणी छोर पर स्थित है। जहां सबरी और सिलेरू नदी का संगम होता है। यह ताल्लुक मुख्यालय भगवान जगन्नाथ के खूबसूरत मंदिर के कारण जिले का एक लोकप्रिय तीर्थस्थल भी माना जाता है। यहां का मूगी प्वाइंट भी काफी चर्चित है।
भैरवी मंदिर [संपादित करें]
मलकनगिरी से 3 किमी. दूर यह मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है। पहाड़ी की देवी मलकनगिरी की पूजा यहां मलकनगिरी के राजा द्वारा की जाती थी। यहां देवी के भक्तों का हरदम आना-जाना लगा रहता है। मंदिर के निकट ही राजा रानी हिल में मलकनगिरी के राजा के महल के अवशेष देखे जा सकते हैं।
आवागमन [संपादित करें]
- वायु मार्ग
विशाखापट्टनम विमानक्षेत्र मलकनगिरी का नजदीकी एयरपोर्ट है जो देश के अनेक प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई आदि शहरों से यहां के लिए नियमित फ्लाइट्स हैं।
- रेल मार्ग
दक्षिण पूर्व रेलवे का कोरापुट रेलवे स्टेशन मलकनगिरी का नजदीकी रेलवे स्टेशन है। यह रेलवे स्टेशन मलकनगिरी को देश के अनेक हिस्सों से जोड़ता है।
- सड़क मार्ग
मलकनगिरी उड़ीसा और पड़ोसी राज्यों के अनेक शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन निगम की बसें अनेक शहरों से यहां के लिए चलती रहती हैं।