मयूरशर्मा

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तालगुण्ड स्तंभ मयूरशर्मा के जीवन की झलक दिखाता है।

मयूरशर्मा (कन्नड़: ಮಯೂರಶರ್ಮ) (या मयूरशर्मन, मयूरवर्मा) (३४५ - ३६५ ई०) कर्नाटक के आधुनिक शिमोगा जिला के तालगुण्डा का एक ब्राह्मण पंडित था। इसने बनवासी के कदंब वंश की स्थापना की थी। यह वंश ही था जिसने सबसे पहले आधुनिक कर्न्टक की भुमि पर राज्य किया था।[1][2] इसने अपना नाम मयूरवर्मन कर लिया था, जिससे वह ब्राह्मण से क्षत्रिय लगे। इस वंश के शसन पूर्व कर्नाटक भुमि पर बाहर का शसन था और तब इस वंश ने स्वतंत्र राज्य बसाया और स्थानीय भाषा कन्नड़ को राजभाशा के रूप में अपनाया। कन्नड़ भाशा के प्राचीनतम शिलालेख व अभिलेख इसी वंश के मिलते हैं।[3]


संदर्भ[संपादित करें]

  1. Kamath (2001), p30
  2. Moraes (1931), pp9-10
  3. Ramesh (1984), p2, pp10-11
  • George M. Moraes (1931), The Kadamba Kula, A History of Ancient and Medieval Karnataka, Asian Educational Services, New Delhi, Madras, 1990 ISBN 81-206-0595-0
  • Dr. Suryanath U. Kamat, A Concise history of Karnataka from pre-historic times to the present, Jupiter books, MCC, Bangalore, 2001 (Reprinted 2002) OCLC: 7796041
  • K.V. Ramesh, Chalukyas of Vatapi, 1984, Agam Kala Prakashan, Delhi ISBN 3987-10333

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]