मानववाद
मानववाद या मनुष्यवाद दर्शनशास्त्र में उस विचारधारा को कहते हैं जो मनुष्यों के मूल्यों और उन से सम्बंधित मसलों पर ध्यान देती है। अक्सर मानववाद में धार्मिक दृष्टिकोणों और अलौकिक विचार-पद्धतियों को हीन समझा जाता है और तर्कशक्ति, न्यायिक सिद्धांतों और आचारनीति (ऍथ़िक्स) पर ज़ोर होता है।[1] मानववाद की एक "धार्मिक मानववाद" नाम की शाखा भी है जो धार्मिक विचारों को मानववाद में जगह देने का प्रयत्न करती है।
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[संपादित करें] अन्य भाषाओँ में
अंग्रेज़ी में "मानववाद" को "ह्यूमनिज़्म" (humanism) कहते हैं।
[संपादित करें] इतिहास
मानववाद भिन्न रूपों में विश्व की हर प्रमुख सभ्यता में पाया गया है। भारत में १००० ईसापूर्व में चार्वाक दर्शन की विचारधारा में धार्मिक विचारों से हटकर मनुष्यों के विवेक और तर्कशक्ति पर ज़ोर दिया गया। चीन, प्राचीन यूनान और अन्य संस्कृतियों में भी मानववादी मिलते हैं। आधुनिक युग में कार्ल सेगन जैसे कई वैज्ञानिक मानववाद से जुड़े हुए रहे हैं।
[संपादित करें] इन्हें भी देखें
[संपादित करें] सन्दर्भ
- ↑ Humanism: beliefs and practices, Jeaneane D. Fowler, Sussex Academic Press, 1999, ISBN 9781898723707.