मधुकर दत्तात्रेय देवरस

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मधुकर दत्‍तात्रेय देवरस (11 दिसम्बर, 1915 - 17 जून, 1996)) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक थे। वे 'बाला साहब देवरस' नाम से अधिक प्रसिद्ध हैं।

जीवनी[संपादित करें]

श्री बाला साहब देवरस का जन्‍म 11 दिसम्‍बर 1915 को नागपुर में हुआ था। उनके पिता सकारी कर्मचारी थे और नागपुर इतवारी मे आपका निवास था। यहीं देवरस परिवार के बच्चे व्यायामशाला जाते थे 1925 मे संघ की शाखा प्रारम्भ हुई और कुछ ही दिनों बाद बालसाहेब ने शाखा जाना प्रारम्भ कर दिया।

स्थायी रूप से उनका परिवार मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के आमगांव के निकटवर्ती ग्राम कारंजा का था। उनकी सम्‍पूर्ण शिक्षा नागपुर में ही हुई। न्यू इंगलिश स्कूल मे उनकी प्रारम्भिक शिक्षा हुई। संस्कृत और दर्शनशास्त्र विषय लेकर मौरिस कालेज से बालसाहेब ने 1935 मे बी0ए0 किया। दो वर्ष बाद उनहोंने विधि (ला) की परीक्षा उत्तीर्ण की। विधि स्नातक बनने के बाद बालसाहेब ने दो वर्ष तक 'अनाथ विद्यार्थी बस्ती गृह' मे अध्यापन कार्य किया। इसके बाद उन्हें नागपुर मे नगर कार्यवाह का दायित्व सौंपा गया। 1965 में उन्हें सरकार्यवाह का दायित्व सौंपा गया जो 6 जून 1973 तक उनके पास रहा।

श्रीगुरू जी के स्‍वर्गवास के बाद 6 जूल 1973 को सरसंघचालक के दायित्‍व को ग्रहण किया। उनके कार्यकाल में संघ कार्य को नई दिशा मिली। उन्‍होने सेवाकार्य पर बल दिया परिणाम स्‍वरूप उत्‍तर पूर्वाचल सहित देश के वनवासी क्षेत्रों के हजारों की संख्‍या में सेवाकार्य आरम्‍भ हुए।

सन् १९७५ में भारत की तत्‍कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर संघ पर प्रतिबन्‍ध लगा दिया। हजारों संघ के स्‍वयंसेवको को मीसा तथा डी आई आर जैसे काले कानून के अन्‍तर्गत जेलों में डाल दिया गया और यातनाऐं दी गई। परमपूज्‍यनीय बाला साहब की प्रेरण एवं सफल मार्गदर्शन में विशाल सत्‍याग्रह हुआ और 1977 में आपातकाल समाप्‍त होकर संघ से प्रतिबन्‍ध हटा।

स्‍वास्‍थ्‍य कारणों से जीवन काल में ही सन् 1994 में ही सरसंघचालक का दायित्‍व उन्‍होने प्रो. राजेन्‍द्र प्रसाद उपाख्‍य रज्‍जू भइया को सौप दिया। 17 जून 1996 को उनका स्‍वर्गवास हो गया।

उनके छोटे भाई भाऊराव देवरस ने भी संघ परिवार एवं भारतीय राजनीति में महती भूमिका निभाई।