मदिकेरी

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मदिकेरी
राजा की सीट की एक कुहरे भरी सुबह, मदिकेरी में
राजा की सीट की एक कुहरे भरी सुबह, मदिकेरी में
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य कर्नाटक
ज़िला कोडगु
महापौर
जनसंख्या 32,286 (2001 के अनुसार )

Erioll world.svgनिर्देशांक: 12°25′15″N 75°44′23″E / 12.4208°N 75.7397°E / 12.4208; 75.7397 समुद्र तल से 1525 मीटर की ऊंचाई पर बसा मदिकेरी कर्नाटक के कोडगु जिले का मुख्यालय है। मदिकेरी को दक्षिण का स्कॉटलैंड कहा जाता है। यहां की धुंधली पहाड़ियां, हरे वन, कॉफी के बगान और प्रकृति के खूबसूरत दृश्य मदिकेरी को अविस्मरणीय पर्यटन स्थल बनाते हैं। मदिकेरी और उसके आसपास बहुत से ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भी हैं। यह मैसूर से 125 किमी. दूर पश्चिम में स्थित है और कॉफी के उद्यानों के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है।

1600 ईसवी के बाद लिंगायत राजाओं ने कुर्ग में राज किया और मदिकेरी को राजधानी बनाया। मदिकेरी में उन्होंने मिट्टी का किला भी बनवाया। 1785 में टीपू सुल्तान की सेना ने इस साम्राज्य पर कब्‍जा करके यहां अपना अधिकार जमा लिया। चार वर्ष बाद कुर्ग ने अंग्रेजों की मदद से आजादी हासिल की और राजा वीर राजेन्द्र ने पुनर्निमाण कार्य किया। 1834 ई. में अंग्रेजों ने इस स्थान पर अपना अधिकार कर लिया और यहां के अंतिम शासक पर मुकदमा चलाकर उसे जेल में डाल दिया।

भूगोल[संपादित करें]

मदिकेरी की स्थिति 12°25′N 75°44′E / 12.42°N 75.73°E / 12.42; 75.73[1] पर है। यहां की औसत ऊंचाई है 1062 मीटर (3484 फीट)।

दर्शनीय स्थल[संपादित करें]

अब्बे झरना[संपादित करें]

अब्बे जल प्रपात,मदिकेरी का प्रमुख आकर्षण

यह खूबसूरत जलप्रपात मदिकेरी से लगभग 5 किमी. की दूरी पर है। एक निजी कॉफी बागान के भीतर यह झरना स्थित है। पर्यटक बड़ी संख्या में इस स्थान पर आते हैं। मॉनसून के दिनों में यहां की सुंदरता देखते ही बनती है।

मदिकेरी किला[संपादित करें]

प्रारंभ में यह किला मिट्टी का बना था। टीपू सुल्तान के इसका पुर्ननिर्माण करके इसमें पत्थरों का इस्तेमाल किया। टीपू सुल्तान के 18वीं शताब्दी में यहां कुछ समय के लिए शासन किया था। किले के अंदर लिंगायत शासकों का महल है।

राजा की सीट[संपादित करें]

यह वह स्थान है जहां से कोडागू के राजा ढलते सूर्य को देखते थे। यहां से दूर-दूर फैले हर धान के खेतों, घाटियों, भूरे-नीले घाटों के दृश्य देखे जा सकते हैं। राजा की सीट के साथ ही चोटी मरियम्मा नामक एक प्राचीन मंदिर है।

भागमंडल[संपादित करें]

चित्र:Misty madikeri.jpg
धुंध भरी सुबह में मदिकेरी

मदिकेरी से 40 किमी. दूर भागमंडल को दक्षिण काशी भी कहा जाता है। जब से भगन्द महर्षि ने यहां शिवलिंग स्थापित करवाया इसे भागमंडल के नाम से जाना जाता है। तालकावेरी यहां से 8 किमी. दूर है। भागमंडल के समीप ही महाविष्णु, सुब्रमन्यम और गणपति मंदिर भी हैं।

नगरहोल राष्ट्रीय पार्क[संपादित करें]

नागरहोल अभयारण्य में हाथी वृन्द

अगर आप वन्य जीवों से रूबरु होना चाहते है तो मदिकेनी से 93 किमी. दूर नागरहोल राष्ट्रीय पार्क जरुर जाएं। यहां हिरन, बिशन, हाथी, जंगली भालू, भेडिये के अलावा बंदर की विभिन्न प्रजातियों और विशाल टाईगरों को देखा जा सकता है। 284 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैला यह पार्क उष्णकटिबंधीय पतझड़ वनों से घिरा हुआ है।

ओंकारेश्वर मंदिर[संपादित करें]

कांची कामाक्षी मंदिर के मंडप के निकट दशहरा का जलूस

भगवान शिव और विष्णु को समर्पित यह मंदिर कोडागू राजा लिंगराज ने 1820 में बनवाया था। यह मंदिर मस्जिदाकार शैली में बनवाया गया है। मंदिर में एक केंद्रीय गुम्बद और चार मीनारें हैं जो बासव अर्थात पवित्र बैलों से घिरी हरुइ हैं। मंदिर के सामने एक टैंक बना है जो मंदिर को और आकर्षक बनाता है।

इरप्पु झरना[संपादित करें]

मदिकेरी से 91 किमी. दूर इरप्पु तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिद्ध है जिसका संबंध रामायण के नायक राम से है। रामतीर्थ नदी के किनारे पर ही भगवान शिव का मंदिर है। शिवरात्रि के मौके पर हजारों तीर्थ यात्री इस नदी में डुबकी लगाते हैं।

तालकावेरी[संपादित करें]

मदिकेरी से 48 किमी. दूर तालकावेरी कावेरी नदी की उदगम स्थली है इसलिए धार्मिक दृष्टि से इसका बहुत महत्व है। यह ब्रह्मगिरी पहाड़ के ढलान पर स्थित है। समुद्र तल से इस स्थान की ऊंचाई 4500 फीट है।

हरंगी बांध[संपादित करें]

मदिकेरी से लगभग 36 किमी. दूर हरंगी अपने ट्री हाउसों के लिए लोकप्रिय है। उत्तरी कुर्ग के कुशलनगर के समीप स्थित हरंगी बांध एक दर्शनीय पिकनिक स्थल है। कावेरी नदी पर बना यह बांध 2775 फीट लंबा और 174 फीट ऊंचा है।

नल्कनाद महल[संपादित करें]

मदिकेरी की सड़कें

कोडागू की सबसे ऊंची पहाड़ी के तल पर बना नल्कनाद महल अतीत की याद दिलाता एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है। मदिकेरी से 45 किमी. दूर यह महल 1792 में डोडा वीरराज द्वारा बनवाया गया था। दो खंड का यह महल आकर्षक चित्रकारी और वास्तुकारी से सबको मोहित कर देता है।

आवागमन[संपादित करें]

वायु मार्ग

मंगलौर विमानक्षेत्र मदिकेरी का नजदीकी घरेलू एयरपोर्ट है जो 135 किमी. दूर है। यहां से बैंगलोर के लिए सीधी फ्लाइट है।

रेल मार्ग

मदिकेरी का नजदीकी रेल मुख्यालय मैसूर है। मैसूर भारत के प्रमुख शहरों से ट्रेन के माध्यम से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग

मदिकेरी बेहतर सड़क नेटवर्क से कर्नाटक के प्रमुख शहरों से जुड़ा है। राज्य परिवहन निगम की बसों से मदिकेरी पहुंचा जा सकता है।

संदर्भ[संपादित करें]