भाषा दर्शन

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भाषा के दार्शनिक पक्ष पर मध्ययुग में भारत के अनेक विद्वानों ने ग्रन्थ रचे हैं। भर्तृहरि का वाक्यपदीय भाषादर्शन का महान ग्रन्थ है।

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