भारत रत्न
| भारत रत्न | ||
| सम्मान की जानकारी | ||
|---|---|---|
| प्रकार | नागरिक | |
| श्रेणी | सामान्य | |
| स्थापना वर्ष | १९५४ | |
| अंतिम अलंकरण | २००८ | |
| कुल अलंकरण | ४१ | |
| अलंकरणकर्ता | भारत सरकार | |
| विवरण | सूर्य की प्लैटिनम छवि के संग भारत रत्न देवनागरी लिपि में खुदा हुआ, एक पीपल के पत्ते पर |
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| प्रथम अलंकृत | सर्वपल्ली राधाकृष्णन | |
| अंतिम अलंकृत | पं.भीमसेन जोशी | |
| सम्मान श्रेणी | ||
| कोई नहीं ← भारत रत्न → पद्म विभूषण | ||
भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।[1][2][3] यह सम्मान राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है। इन सेवाओं में कला, साहित्य, विज्ञान या सार्वजनिक सेवा शामिल है। इस सम्मान की स्थापना २ जनवरी १९५४ में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी। अन्य अलंकरणों के समान इस सम्मान को भी नाम के साथ पदवी के रूप में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता।[4] [5] प्रारम्भ में इस सम्मान को मरणोपरांत देने का प्रावधान नहीं था, यह प्रावधान १९५५ में बाद में जोड़ा गया। बाद में यह १० व्यक्तियों को मरणोपरांत प्रदान किया गया। एक वर्ष में अधिकतम तीन व्यक्तियों को ही भारत रत्न दिया जा सकता है।
अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कारों में पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री,का नाम लिया जा सकता है ।
अनुक्रम |
पदक [संपादित करें]
मूल रूप में इस सम्मान के पदक का डिजाइन ३५ मिमि गोलाकार स्वर्ण मैडल था। जिसमें सामने सूर्य बना था, ऊपर हिन्दी में भारत रत्न लिखा था, और नीचे पुष्प हार था। और पीछे की तरफ़ राष्ट्रीय चिह्न और मोटो था। फिर इस पदक के डिज़ाइन को बदल कर तांबे के बने पीपल के पत्ते पर प्लेटिनम का चमकता सूर्य बना दिया गया। जिसके नीचे चाँदी में लिखा रहता है "भारत रत्न", और यह सफ़ेद फीते के साथ गले में पहना जाता है। hhjkgjgjhffjhgjh jhgjhgfh hjg
सम्मानित व्यक्तित्व [संपादित करें]
१९९२ में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस को इस पुरस्कार से मरणोपरान्त सम्मानित किया गया था। लेकिन उनकी मृत्यु विवादित होने के कारण पुरस्कार के मरणोपरान्त स्वरूप को लेकर प्रश्न उठाया गया था। इसीलिए भारत सरकार ने यह पुरस्कार वापस ले लिया। यह पुरस्कार वापस लिये जाने का यह एकमेव उदाहरण है|
भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री श्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को जब भारत रत्न देने की बात आयी तो उन्होंने जोर देकर मना कर दिया, कारण कि जो लोग इसकी चयन समिति में रहे हों, उनको यह सम्मान नहीं दिया जाना चाहिये। बाद में १९९२ में उन्हें मरणोपरांत दिया गया। [6]
पं. भीमसेन के जीवन मे म्त्यु 25 जनवरी 2011 अंकित करे
सन्दर्भ [संपादित करें]
- ↑ पायली, मूलमट्टोम वार्के (१९७१). द कॉन्स्टीट्यूशन ऑफ इण्डिया. नई दिल्ली: एस चांद एण्ड कंपनी लि.. pp. ११४. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-219-2203-8.
- ↑ महाजन, विद्याधर (१९७१). द कॉन्स्टीट्यूशन ऑफ इण्डिया. लखनऊ, उत्तर प्रदेश: ईस्टर्न बुक कंपनी. pp. 169.
- ↑ होएबर्ग, डेल; इन्दु रामचन्दानी (२०००). स्टूडेन्ट्स ब्रिटैनिका इण्डिया. नई दिल्ली: ब्रिटैनिका विश्वकोश (भारत). भाग.३, पृ.१९८. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-85229-760-2.
- ↑ बसु, दुर्गा दास (1988). Shorter Constitution of India. नई दिल्ली: प्रेन्टिस हॉल ऑफ़ इंडिया.
- ↑ बसु, दुर्गा दास (1993). Introduction to the Constitution of India. नई दिल्ली: प्रेन्टिस हॉल ऑफ़ इंडिया.
- ↑ वे जिन्होंने भारत रत्न लेने से मना कर दिया द टाइम्स ऑफ इंडिया, २० जनवरी, २००८
बाहरी कड़ियाँ [संपादित करें]
- भारत रत्न सम्मानित लोगों की सूची (अंग्रेजी में)
- भारत रत्न पुरस्कार वापस लिये जाने का एकमेव उदाहरण (अंग्रेजी में)
- भारत रत्न (प्रश्नमंच)
- भारत रत्न (प्रश्नमंच)