भारत के लोकसभा अध्यक्ष

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

लोकसभा का अध्यक्ष संसद के निम्न सदन का सभापति होता है। उसकी भूमिका उन अन्य देशों के स्पीकरों के समान है जो सरकार की वेस्टमिंस्टर प्रणाली का अनुसरण करते हैं। लोकसभा-अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा चुनावों के बाद, लोकसभा की सर्वप्रथम बैठक में ही कर लिया जाता है, जो कि संसद के सदस्यों में से ही पाँच साल के लिए चुना जाता है। उससे अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी मूल पार्टी से इस्तीफा दे दे, ताकि कार्यवाही में निष्पक्षता बनी रहे। भारत के लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार है।


लोकसभा-अध्यक्ष की शक्तियाँ और कार्य[संपादित करें]

लोकसभा-अध्यक्ष लोकसभा के सत्रों की अध्यक्षता करता है, और सदन के कामकाज का संचालन करता है। वह निर्णय करता है कि कोई विधेयक, धन विधेयक है या नहीं। वह सदन का अनुशासन और मर्यादा बनाए रखता है और इसमें बाधा पहुँचाने वाले सांसदों को दंडित भी कर सकता है। वह विभिन्न प्रकार के मोशनों और संकल्पों, जैसे अविश्वास प्रस्ताव, स्थगन प्रस्ताव, सेंसर मोशन, को लाने की अनुमति देता है और अटेंशन नोटिस देता है। अध्यक्ष ही यह तय करता है कि सदन की बैठक में क्या एजेंडा लिया जाना है। लोकसभा-अध्यक्ष के चुनाव की तिथि राष्ट्रपति द्वारा तय की जाती है।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]