ब्लॉग

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चिट्ठा अथवा ब्लॉग[(BLOG):अंग्रेजी] , यह वेबब्लॉग(weblog) शब्द का सूक्ष्म रूप है। चिट्ठे एक प्रकार के व्यक्तिगत जालपृष्ठ (website) होते हैं जिन्हें दैनन्दिनी की तरह लिखा जाता है। हर चिट्ठे में कुछ लेख, फोटो और बाहरी कड़ियां होती हैं। इनके विषय सामान्य भी हो सकते हैं और विशेष भी। चिट्ठा लिखने वाले को चिट्ठाकार तथा इस कार्य को चिट्ठाकारी कहा जाता है।

अनुक्रम

[संपादित करें] चिट्ठा क्या है?

इस विषय पर विद्वानों की अलग अलग राय है। चिट्ठे को विचारों का दर्शक ,पत्रकारिता की तरफ बढाया गया अन्तर्जाल पर एक कदम(भारत सरकार ब्लॉगरों को पत्रकार मानती है), दिनचर्या की दयनंदनी ,विचारों को व्यक्त करने का मंच माना जाता है, कोई इसमें अपने पेशे के बारे में लिखता है तो कोई अपनी शौक के बारे में। आज जब अंतर्जाल ने दुनिया को एक वैश्विक ग्राम में बदल कर दिया है, ब्लॉग के ज़रिये आपके विचारों को व्यक्त करने का एक नया और प्रभावशाली माध्यम मिल गया है। इस तरह से आपको अपनी तरह के, या अपने से जुदा, दूसरे कई चिट्ठाकार मिलता हैं जिनकी संगत, से शैली और सोच विचार में दिनों दिन परिवर्तन आता है, चिट्ठे से लिखने की कला का भी विकास होता है। निश्चित रूप से चिट्ठों से विचारों के लेन्देन के लिये आम आदमी को सशक्त माध्यम मिलगया है।


[संपादित करें] चिट्ठाकारी का इतिहास

[संपादित करें] चिट्ठे के रूप

चिट्ठे के विभिन्न रूपों के ज़रिये विचारों का संप्रेषण संभव है। साधारणत चिट्ठाकारी के लिये निम्न तकनीकों का प्रयोग होत है:

चिट्ठे के द्वारा आप अपनी रचना धर्मिता को नए आयाम देते हैं। ब्लॉग में क्या लिखें यह तो पूर्णतः चिट्ठाकार पर निर्भर करता है। कुछ लोग राजनीति और सामयिक घटनाक्रम पर अपनी राय ज़ाहिर करते हैं, तो कुछ गूढ़ तकनीकी विषयों पर परिचर्चा करते हैं। कई तरह के ब्लॉग दुनिया के तमाम विषयों में हैं।

ब्लॉग की सबसे बड़ी खासियत संभवतः यह है यह चिरकाल तक लोगों के लिए पढ़ने के लिए उपलब्ध रहेगा। यह नहीं कि पेपर बैक संस्करण की तरह प्रकाशित हुआ और समय के साथ नष्ट हो गया। जब तक इंटरनेट सांस लेता रहेगा और ब्लॉग जीवित है, ब्लॉग रचना आम लोगों की पहुँच में सदा सर्वदा रहेगी।


चिट्ठे के विभिन्न तत्व


[संपादित करें] यह भी देखे

[संपादित करें] बाहरी कडियाँ

वैयक्तिक औज़ार