ब्लैक जुलाई
| Black July pogrom | |
|---|---|
![]() Location of Sri Lanka |
|
| स्थान | Sri Lanka |
| हथियार | छाकू, लाठी, अग्नि, बंदूक |
| करने वाले | सिंहाल |
साँचा:श्री लंका में युद्ध् साँचा:श्री लंका में तमिल विरोधी दंगें
ब्लॅक जुलाई जुलाई 23, 1983 के दिन श्रीलंका में तमिलों के विरुद्ध सिन्हालों द्वारा किए गए दंगों का नाम है।[1] 400-3000 की मौत का अनुमान हैं।[2] बहुत तमिलों को मौत के घाट उतार दिया गया। हजारों के घरों को तबाह क्र गिय गया। इस कारण सैकडों तमिलों ने विदेशी शरण मांगनें श्रीलंका छोड़ दियें। LTTE के हमले में श्रीलंका के ४३ सैनिकों के मौत के बाद येह दंगें शुरु हुए थें।
ब्लॅक जुलाई श्रीलंका में तमिल उग्रवदियों एवं श्रीलंका सरकार के मध्य गृहयुद्ध का कारण बना.[3][4][5] श्रीलंका के तमिल लोगों के लिए यह स्मरण का दिन बन गया है.
अनुक्रम |
Background [संपादित करें]
ब्रिटिश सरकार colonial period ने बहुत श्रीलंकाई तमिलों(अधिक्तर जाफना से) मिशनरी द्वारा स्थापित शिक्षा सुविदायों एवं बांटो और राज करने का प्रत्यय का उप्योग करके अल्पसंख्यक तमिलों को सरकार में तारतम्यहीन शक्ति प्रधान किया, तमिलों को सिविल सेवाओं सेवाओं एवं अन्य पदों के लिए चुना गया। जब श्री लंका को 1948 में स्वतन्त्रता प्राप्त हुइ, बहुसंख्यक सरकारी पद तमिलों के हाथों में थें, जब कि उनकी जन संख्या अल्प्संख्यक थी । निर्वाचित नेताओं ने सिन्हालों को नियन्त्र्ण में रखने का येह एक छाल समझा, तथा इस स्थिति को बदलने कि कोशिश शुरु हो गये। सन्1956 के Sinhala Only Act के अनुसार तमिल एवं अनग्रेजी पर प्रतिबंद लगा दिया गया। तमिलों के इस प्रत्यय के विरोध करने के कारण सिन्हाल भडक गये तथा 1958 में भयानक दंगे शुरु हो गये।1960s के दशक्, विरोध और इनपर् सरकारी निरोध बढती बैर का कारण बना। 1971 में, policy of standardization के कारण शत्रुता बढ गई. {[United National Party]] में 1977 के चुनवों में विजय के कारण दो समुदाय फिर बिड गये.[6]1981 में जाफना के प्रसिद्ध पुस्तकालय को जला कर बरबाद कर दिया गया। जाफना के प्रसिद्ध पुस्तकालय में तमिल उग्रवादी संघटन के बैठक होथें थें। 1983 तक बढती तमिल उग्रवादियों एवं सरकार के बीच मुठभेड के घटनाएँ हुए और दोनों और लोगों के लापता होने एवं यातनाएं देनें के आरोप लगाये गये।
जुलाई1983 में [संपादित करें]
ब्लैक जुलाई के घटनाओं का आरंभ् तब हुआ जब Liberation Tigers of Tamil Eelam (the Tamil Tigers or the LTTE) संघटन के सदस्य जुलाई 23 के सायंकाल जाफना के समीप् श्रीलंका के फौजी काफिले पर आक्रमण किया। सिन्हाला रक्षकबल पर येह नवीनतम आक्रमण था । काफिले के प्रमुख एक जीप था जिसके नीचे एक बम विस्फोट के कारण दो सैनिक घायल हुए। साथियों के मदद करने के कारण जब सैनिक काफिले के गाडियों से उतर रहे थे, तमिल टागरों ने घात लगाना शुरु कर दिया grenades एवं automatic weapons के जरिये। लडाई में एक अफ्सर् एवं 12 सैनिक् तुरंत् मारे गये और दो बुरी तरह से घायल हो गये, जिस कारण 15 मारे गये टाइग्रों के अलावा .[7] किट्टू, एक तमिल टाईगर ने इस हमले के संचालक होन स्वीकर लिया।[8]
घात की समाचार को दबाने के लिए सिंहाला सर्कार ने १५ सैनिकों के लाशों को कोलोम्बो के कनात्ते श्मशान में चुपचाप अंतिम संस्कार कराया गया,[8], ताकि तमिलों के खिलाफ हमलें न हो.[कृपया उद्धरण जोड़ें]. असल में मारे गए सैनिकों के अंतिम संस्कार गाँव में किया जाया करता था.[8] जुलाई 15 के दिन जब अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तब सिन्हालों की एक दल वहां पहुँच कर फैले गए घात की समाचार पर कोप प्रकट कर रहे थे [9] दंगें शुरू हो गए थे और सिंहलों के दल निर्दोष तमिल नागरिकों पे लूट मार आरम्भ कर दिया था. अंडरवर्ल्ड् के अपराधी दल भी शामिल होगये। चुनाव मतदाता पंजीकरण सूचियों के सहायता से सिंहाला दलों ने केवल तमिल घरों एवं दुकानों पर वर करना शुरू कर दिया ,इस बीच रक्षक बालों को देरी से तैनात किया. इसी कारण दंगों में शामिल दलों को सरकारी मदद मिलने का अनुमान लगाया गया .भय बीत तमिल प्रजा कोलोम्बो शेहेर छोड़ने लगे. बहुत सरे सिंहाला एवं मुस्सल्मान तमिलों की सहायता करने आगे बढे. तमिलों ने मंदिर,मस्जिद,सरकारी भवनों और सिंहल घरों में शरण लिए.[10][11][12]
24 के संध्याकाल पर श्री लंका की सरकार ने कर्फ्यू की घोषणा किया, लेकिन रक्षक बालों ने कर्फ्यू लागो करने से साफ़ इनकार कर रहे थे या थो अक्षम पाए गए थे[10] Tश्री लंका की सेना पुलिस की सहायता करने बुलाया गया. इसके विपरीत अगले दिन् हिंसा जारी थी. श्री लंका के अन्य क्षेत्रों में भी हिंसा आरम्भ हो चूका था, अधिकतम तमिल बहुसंख्यक क्षेत्र जैसे कंडी, जहां कर्फ्यू सायंकाल के 6 पर लागू था, मतले , नवालापितिया , बादुल्ला नुवाराएलिया. वाहनों को जलाया गया और अन्दर लोगों को बहार खींच कर मारा या मार दिया गया. [10].
दंगों में भयानक संघटन में से एक वेलिकादा जेल नरसंहार में हुआ था[10] जो वेलिकादा के उच्च सुरक्षा कारगर जुलाई 25 के दिन हुआ था । 37 तमिल संदिग्ध अलगाववादियों को सिंहाला जेल बंधियों ने लाठी और चाकू का उपयोग करके मौत के घाट उतर दिए । सिंहाला जेल अधिकारीयों पे आरोप हैं कि चाबियों दे दी गयी लेकिन आगामी अन्वीक्षण में यह अप्रामानिथ घोषित किया गया .[10] जुलाई 28 में दुबारा दंगों में 15 खैदी मारे गए [13]
उनके बहुसंख्यक क्षेत्रों में तमिलों के विरुद्ध हिंसा के कारण जुलाई 26 तक कर्फ्यू को पुरे देश में घोषित किया गया । लेकिन पुलिस एवं सेना तैनात होने के कारण 26 के संध्याकाल तक हिंसा कम होती गयी और दंगाइयों के विरुद्ध कार्रवाई लेने लगे ।[14] जाफना के घातक हमले में मारे गए सैनिकों का अंतिम संस्कार रात के कुर्फ्यु के समय किया गया ।.[14] अगले दिन कोलोम्बो के दिन के समय कुर्फ्यु को उठा लिया गया although लेकिन तैगरों के हमलों के दर से दोनों समुदायों के बीच मुटभेड अभी जारी थें ।.[14] 29 जुलाई को दंगों के एक दल ने हिंसा शुरू की लेकिन पुलिस कि फायरिंग में 15 दंगायें मारे गए [13] २४ घंटों का कुर्फ्यु लगाया गया और रक्षक बालों ने शेहेर को फिर से शांतिपूर्वक बनाने में सफल रहे
सरकारी प्रतिक्रिया [संपादित करें]
साँचा:अधिक जानकारी के लिए श्रीलंका में तमिलों और सिन्हालों के बीच तनाव इन दंगों के पूर्व उपस्थित था, और तमिल उग्रवादी दलों के स्थापना के बाद सिन्हालों के तमिल-विरुद्ध भावनाएं बढ़ गयी. हालांकी यह सिंहली सैनिकों के मारे जाने और गुप्त दफन की खबर से स्वभाविक रूप से भड़क गए थे, बाद में तमिल-विरोधी संघों के इकट्ठा होकर और भड़काया गया.[15] दंगों के शुरुवात में पुलिस और फौज ने दंगों को रोखने की कोई कोशिश नहीं की थी.[16] लेकिन जुलाई 26 तक पुलिस और फौज ने परिस्थितियाँ संभालने की कोशिशें शुरू कर दी और अधिकतर हिंसा रुख गयी. सरकार ने निषेधाज्ञा को लागू कर के हिंसा को श्रीलंका के और जगहों तक बढ़ने से रोक दी. जुलाई 29 में एक घठने में पुलिस 15 सिंहली लुटेरों को गोलियों से वार कर के मार दिया.
हालाँकि दंगों को ना रोकने के लिए तमिल राजनीतिज्ञों ने सरकार को दोषी ठहराया, सरकार के मुताबिक दंगाई दलों को रोकने के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण कदम उठाये गए थें. दंगों की शुरुवात के बाद तुरंत कर्फ्यू की घोषणा की गयी थी. सरकार के मुताबिक, दंगाई दल अच्छी तरह से आयोजित थें और रेल, इमारतें और बसें पहले शिकार थें. उस समय के प्रधानमंत्री रणसिंहा प्रेमदासा ने तमिलों आश्रय और भोजन का आयोजन के लिए एक कमिटी की स्थापना किया था. यह आश्रय पांच स्कूल भवनों और एक हवाई अड्डे में स्थित था. जब शरणार्थियों की संख्या 20000 से 50000 बढ़ गयी, तब भारत सरकार ने जहाजों द्वारा मदद भेजी.
चश्मदीद गवाहों का वर्णन [संपादित करें]
दंगाई दलों ने पहले सरकारी सम्पत्ती पर वार किया. भूत और भविष्य के कयी अवसरों की तरह बोरेल्ला कनात्ता के कब्रिस्तान में इक्कट्ठा हुए थें जहां श्री लंका के सैनिकों के अंतिम संस्कार होने को था. वे सरकार से अपनी नाराजगी जता रहे थें. उसके बाद तमिल जाती के खिलाफ बढक उठ गए.
लूट-मार और फसाद का आयोजन अच्छी तरह से की गयी थी. कोलोम्बो के सडकों पे तमिलों के लिए तलाश हो रही थी. तमिल नागरिकों को पहचानने के बाद उन्हें, गाडी समेत, ज़िंदा जला दिया था.
दंगाई भीड़ ने बसों को भी ना छोड़ा. तमिलों को बाहर ढकेल कर उन्हें चाकू, लाठी और आग से वार कर के मार दिया. एक नोर्वे के पर्यटक ने सिन्हालों के एक दल को तमिल यात्रियों के एक मिनीबस को जलाते हुए देखा था. [15][17]
सिन्हालों ने श्री लंका के अन्य शेहेरों में, जैसे अनुराधापुरा, कांडी, हट्टन, नुवारा एलिया, बादुल्ला, गिनिगाठेना, आदी, तमिलों पे वार करना शुरू कर दिया.[15]
Casualty estimates [संपादित करें]
The estimates of casualties vary. While the government initially stated just 250 Tamils were killed, various NGOs and international agencies estimate that between 400[2] and 3,000[2] people suspected of being Sri Lankan Tamils or Hill Country Tamils were killed in the riots. 53 terrorism suspects alone were killed in the Welikade prison massacre. Eventually the Sri Lankan government put the death toll at about 300 dead.[18][19]
More than 18,000 houses and numerous commercial establishments were destroyed and hundreds of thousands of Tamils fled the country to Europe, Australia and Canada.[18] Many Tamil youths also joined the various Tamil groups including the LTTE.
Prosecutions and compensations [संपादित करें]
There was a presidential commission appointed during the subsequent People's Alliance government that estimated that nearly 300 people killed and 18,000 establishments including houses were destroyed and recommended that restitution be paid. Thus far, no restitution has been paid or any criminal proceedings against anyone involved begun.[18]
As a remembrance day [संपादित करें]
July 23, or Black July Day, has become a day of mourning and remembrance amongst the Sri Lankan Tamil diaspora around the world. The Canadian Tamil Congress sponsored an event in downtown Toronto on July 23, 2009, for Tamil-Canadians to gather and thank Canada for granting them asylum. Similar events were held in Switzerland, Norway, Denmark, Germany, France, Great Britain, Australia, and New Zealand.[20]
Gallery [संपादित करें]
External links [संपादित करें]
- Black July '83 Extensive survivor stories and documented history about Black July
- 24 July 1983, Peace and Conflict Timeline (PACT)
- Remember, Groundviews - Articles from Government Ministers and civil society on the 25th commemoration of Black July and the 50th commemoration of the anti-Tamil riots of 1958
- July still black after twenty years, The official website of the Sri Lankan government
- President Kumaratunga's speech on the 21st Anniversary of 'Black July', South Asian Terrorism Portal
- Remembering 1983 black July riots in Sri Lanka, LankaLibrary
- History of Tamil Eelam, EelamWeb
- Horror of a pogrom: Remembering "Black July" 1983, D.B.S. Jeyaraj
References [संपादित करें]
- ↑ http://www.internationalviewpoint.org/spip.php?article1190&var_recherche=sri%20lanka
- ↑ 2.0 2.1 2.2 "Twenty years on - riots that led to war". BBC News. July 23, 2003. http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/3090111.stm. अभिगमन तिथि: April 26, 2010.
- ↑ Senewiratne, Brian (2006-07-28). "Sri Lanka's Week of Shame: The July 1983 massacre of Tamils – Long-term consequences". Ilankai Tamil Sangam: Association of Tamils of Sri Lanka in the USA. http://sangam.org/taraki/articles/2006/07-28_Consequences.php?uid=1866. अभिगमन तिथि: 2006-08-01.
- ↑ Wilson, A. Jeyaratnam (1989). The Break up of Sri Lanka: the Sinhalese-Tamil conflict. University of Hawaii Press. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-8248-1211-5.
- ↑ Tambiah, Stanley (1984). Sri Lanka: Ethnic Fratricide and the Dismantling of Democracy. University of Chicago Press. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-226-78952-7.
- ↑ Rajasingham-Senanayake, Darini (May 2001). "Dysfunctional democracy and dirty war in Sri Lanka" (PDF). AsiaPacific Issues, No. 52. East-West Center. अभिगमन तिथि:
- ↑ O'Ballance, Edgar (1989). The cyanide war : Tamil insurrection in Sri Lanka, 1973-88. London: Brassey's (UK). आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780080366951. p.21 see also Edgar O'Ballance
- ↑ 8.0 8.1 8.2 O'Ballance, The cyanide war, p.21
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- ↑ 10.0 10.1 10.2 10.3 10.4 O'Ballance, The cyanide war, p.23
- ↑ Piyadasa, L. (1986). Sri Lanka: The Holocaust and After. Zed Books. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-906334-03-9.
- ↑ "Anti-Tamil Riots and the Political Crisis in Sri Lanka". Bulletin of Concerned Asian Scholars (Questia) Vol. 16: 27. 1984. http://www.questia.com/PM.qst?a=o&d=97784500. अभिगमन तिथि: 2006-08-01.
- ↑ 13.0 13.1 O'Ballance, The cyanide war, p.25
- ↑ 14.0 14.1 14.2 O'Ballance, The cyanide war, p.24
- ↑ 15.0 15.1 15.2 The Broken Palmyra - The Tamil Crisis in Sri Lanka: An Inside Account. Claremont, CA: The Sri Lanka Studies Institute (online: University Teachers for Human Rights). April 1990. Library of Congress Catalog Card No. 90 - 61314. http://www.uthr.org/BP/Content.htm.
- ↑ Swamy, M.R. Narayan (2003). Inside an Elusive Mind: Prabhakaran. Literate World. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 1-59121-003-8.
- ↑ "History of Tamil struggle for freedom in Sri Lanka: A photo album". Quoted from the London Daily Express, 1983-08-29. Ilankai Tamil Sangam: Association of Tamils of Sri Lanka in the USA. http://www.sangam.org/FB_PHOTOHISTORY/ONE.htm.
- ↑ 18.0 18.1 18.2 "President Kumaratunga's speech on the 21st Anniversary of 'Black July'". South Asia Terrorism Portal. 2004-07-23. http://www.satp.org/satporgtp/countries/shrilanka/document/papers/BlackJuly2004.htm.
- ↑ Grant, Patrick (2008). Buddhism and Ethnic Conflict in Sri Lanka. State University of New York Press. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-7914-9353-9. p. 132
- ↑ http://www.blackjuly83.com/
