ब्रेव न्यू वर्ल्ड

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ऐल्डस हक्स्ले

ब्रेव न्यू वर्ल्ड (अंग्रेज़ी: Brave New World, बहादुर नई दुनिया) ब्रिटिश लेखक ऐल्डस हक्स्ले का पाँचवा उपन्यास था जो १९३२ में प्रकाशित हुआ। इस कहानी की पृष्ठभूमि सन् २५४० का लन्दन शहर है। इसमें भविष्य विज्ञान के कई पहलु हैं जिनमें पारम्परिक मनाव समाज से हटकर एक बहुत ही भिन्न और कुछ हद तक घृणा-योग्य संस्कृति दिखाई गई है। कुछ समीक्षकों (क्रिटिक) के अनुसार यह २०वी सदी के १०० सब से अच्छे अंग्रेज़ी उपन्यासों में से एक है।[1]

पृष्ठभूमि[संपादित करें]

उपन्यास २५४० ईसवी में लन्दन में आरम्भ होता है। लगभग पूरे विश्व में एक सरकार है। विश्व जनसंख्या पर काबू पा लिया गया है और यह अब हर समय २ अरब लोगों पर स्थाई है। स्त्रियाँ बच्चे पैदा नहीं करती बल्कि अपने गर्भ सरकार को दे देती हैं जो जन्म और शिक्षा केन्द्रों में बच्चे पैदा करते हैं। समाज पाँच वर्णों में विभाजित है, जिनका नाम यूनानी अक्षरों पर डाला गया है: अल्फ़ा, बेटा, गामा, डेल्टा और एप्सिलन। अल्फ़ा शिशुओं को जन्म-बोतलों में साधारण रूप से बड़ा होकर जन्मने दिया जाता है। वे तीव्र-बुद्धि, आकर्षक चेहरे और ऊंचे क़द के होते हैं। बाक़ी शिशुओं की बोतलों में रसायन डालकर उनके बुद्धि और शरीर के विकास में बाधाएँ डाली जाती हैं। इन निचले वर्णों के शिशुओं को जन्म के बाद शारीरिक श्रम करने और अपने चाहें कम रखने की शिक्षा दी जाती है जो सोते-जागते हरदम उन्हें दी जाती है। अल्फ़ा श्रेणी के लोग राज करते हैं।

स्त्री-पुरुषों में खुला यौन सम्बन्ध होता है, जिसमें स्त्रियों में गर्भ न होने से बच्चे नहीं होते। सभी "सोम" नाम के नशीले पदार्थ का सेवन करते हैं। ऐल्डस हक्स्ले भारतीय संस्कृति से वाकिफ़ थे इसलिए उन्होने यहाँ वेदों में जिक्र किये गए एक पदार्थ का प्रयोग किया। इस समाज में प्राकृतिक रूप से जन्म होना, विवाह, स्त्रियों का गर्भ धारण करना और माता बनाना, सभी को घृणा की दृष्टि से देखा जाता है। समाज में स्थिरता और अनुशासन रखने के लिए सबको बताया जाता है के सब व्यक्ति एक-दुसरे की सम्पति हैं। अकेले रहने या अकेला रहना चाहने को पागलपन की निशानी समझा जाता है। स्त्री-पुरुष में प्रेम हो जाने को भी अजीब और घृणा-योग्य बात समझा जाता है। कोई किसी के क़रीब नहीं है। सभी का स्वास्थ्य ६० साल की उम्र तक बिलकुल ठीक रहता है और उस आयु पर पहुँच के उनकी मृत्यु हो जाती है। क्योंकि किसी का कोई रिश्ता नहीं और सभी स्वस्थ होते हुए यौन संबंधों, सोम सेवन और शारीरिक रूप से सुखी जीवन जीते हैं, इसलिए किसी को एक दिन आने वाली मृत्यु का अधिक दुख भी नहीं होता।

विश्व में कुछ ही स्थान रह गए हैं जहाँ पुरानी रीतियों के अनुसार लोग रह रहे हैं। इन आरक्षित स्थानों पर रहने वालों को विश्व-समाज जंगली और निचला समझता है। फिर भी इन्हें देखने के लिए बहुत से लोग पर्यटक बनकर आया करते हैं। आरक्षण पर रह रहे लोगों में ग़रीबी और फटेहाली बहुत है।

कथानक[संपादित करें]

लेनिना एक साधारण अल्फ़ा स्त्री है। बर्नार्ड एक अल्फ़ा पुरुष है लेकिन वह जन्म-प्रक्रिया में किसी ग़लती से क़द का छोटा रह गया है। क्योंकि छोटा क़द निचली श्रेणियों की निशानी है, इसलिए बर्नार्ड में इस बात को लेकर एक शर्म है। बर्नार्ड का एक हेल्म्होल्ट्ज़ नाम का मित्र है। हेल्म्होल्ट्ज़ लम्बा, शक्तिशाली और आकर्षक है। लेकिन इसे कविता लिखने और अकेले रहने का शौक़ है, इसलिए उसने बर्नार्ड को एक अजीब अल्फ़ा देखकर अपना हमराज़ बना लिया है। बर्नार्ड लेनिना को आकर्षित करना चाहता है इसलिए उसे एक आरक्षित क्षेत्र की सैर पर ले जाता है।

आरक्षित क्षेत्र में[संपादित करें]

वहाँ बर्नार्ड लेनिना को आकर्षित करने में असमर्थ रहता है, लेकिन उन्हें वहाँ एक लिंडा नाम की औरत मिलती है। लिंडा वास्तव में एक साधारण स्त्री थी जो आरक्षित क्षेत्र में आई और वहाँ फँस गई। उसका एक पुत्र है, जॉन। यह ज्ञात जोता है की जॉन वास्तव में बर्नार्ड के संचालक (थोमस) का बेटा है जिसके साथ लिंडा के शारीरिक सम्बन्ध थे (लिंडा ने अभी अपना गर्भ सरकार को दान नहीं किया था)। लिंडा जब आरक्षण पर रह गई तो उसने वहाँ वही किया जो वह लन्दन में करती थी - उसने सभी पुरुषों से सम्बन्ध रखे, जिस से उसे वहाँ एक गिरी हुई स्त्री समझा जाने लगा और उस के साथ लोग घृणा से पेश आते थे। जॉन को उसने आरक्षण के बाहर की सुन्दर दुनिया के बारे में बहुत बताया था, इसलिए जॉन लन्दन जाना चाहता है। बर्नार्ड की थोमस से लड़ाई चल रही है क्योंकि थोमस उस से काम पर क्रूरता से पेश आता है। बर्नार्ड ने सोचा के जॉन को ले जाकर थोमस के सामने रखा जाएगा को थोमस की बहुत बेईज्ज़ती होगी क्योंकि उस समाज में संतान से किसी भी प्रकार की पहचान और सम्बन्ध को रखना शर्मनाक माना जाता है।

जंगली जॉन लन्दन में[संपादित करें]

लन्दन लौटते ही थोमस सारे सहकर्ताओं के आगे बर्नार्ड पर चिल्लाने लगता है। बदला लेने के लिए बर्नार्ड जॉन और लिंडा को उसके आगे कर देता है। जॉन अपने पिता के आगे घुटने टेककर उसे अपना पिता होने का वास्ता देता है। इस से थोमस पर सब हँसते हैं और वह शर्म के मारे नौकरी से इस्तीफ़ा दे देता है। बर्नार्ड जॉन को लन्दन में सबसे मिलवाता है। जॉन के तौर-तरीके अलग हैं और लन्दन की स्त्रियों को भा जाते हैं। वह एक जंगली आरक्षण से आया है इसलिए उसका नाम जंगली जॉन (John the Savage, जॉन द सैवेज) पड़ जाता है। हर स्त्री उस से यौन सम्बन्ध बनाना चाहती है। इस चक्कर में बर्नार्ड स्वयं बहुत लोकप्रिय हो जाता है। जॉन और हेल्म्होल्ट्ज़ की भी दोस्ती हो जाती है। लेकिन कुछ समय में जॉन को यह समाज ख़ाली और व्यर्थ कामों में जुटा हुआ लगने लगता है। जॉन की माँ (लिंडा) वापस आकर सोम के नशे में ही रहती है और एक दिन हस्पताल में दम तोड़ देती है। जॉन रोष में आकर पूरे हस्पताल का सोम बाहर फेंक देता है। जॉन के इस मुश्किल समय में बर्नार्ड उसकी कोई मदद नहीं करता लेकिन हेल्म्होल्ट्ज़ मित्रता निभाता है।

बर्नार्ड, हेल्म्होल्ट्ज़ और जॉन को एक प्रमुख अधिकारी, मुस्तफ़ा मोंड, के आगे पेश किया जाता है। इन चारों के संवाद में इस समाज के असूलों और मसलों पर दिलचस्प बात दिखाई गई है। बर्नार्ड और हेल्म्होल्ट्ज़ को देशनिकाला देकर एक दूर-दराज़ के द्वीप समूह पर भेज दिया जाता है। जॉन को कहा जाता है के उसकी उपस्थितीत सरकार के हित का एक प्रयोग है और उसे लन्दन में रहने दिया जाएगा। लेकिन जॉन लोगों से दूर रहने लगता है। वह अपनी माँ की मृत्यु में अपने आप को भी दोषी ठहरता है और इस ग्लानी में स्वयं अपने आप को चाबुक मारकर दंड देता है। वह यह करते हुए देखा जाता है और खुद लोगों के लिए मनोरंजन का साधन बन जाता है। वह इसे देखने आते हैं और अपने बर्ताव से उसको इतना दुखी कर देते हैं की वह स्वयं को फांसी लगाकर जान दे देता है।

फोर्ड[संपादित करें]

इस उपन्यास के लिखे जाने से पहले हेनरी फ़ोर्ड ने अपना विश्व का सबसे पहला मोटर-गाड़ी बनाने का कारख़ाना खोला था। इसमें बहुत ही मशीनी तरीके से गाड़ियां बनती थी जिसमें हर मज़दूर का नाम निर्धारित था। कोई दिन भर बैठा हर गाड़ी का केवल आगे का बहिना दरवाज़ा लगता था तो कोई केवल पहिये के पेंच कसता था। यह विश्व के लिए अनूठी चीज़ थी और इसे देखकर हक्स्ले ने कल्पना की के अगर मानव समाज भी इन्ही सिद्धांतों पर चले तो कैसा होगा। ब्रेव न्यू वर्ल्ड में यह दर्शाया गया है। उपन्यास में फ़ोर्ड को एक देवता की तरह देखा जाता है। लोग "हे भगवान्" के स्थान पर "हे फ़ोर्ड" (By Ford) बोलते हैं और हर साल "फ़ोर्ड जयंती" (Ford Day) सब से बड़ा त्यौहार होता है। उनका कैलंडर भी "फ़ोर्ड संवत" पर आधारित है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]