बुलन्द दरवाज़ा

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बुलन्द दरवाजा़

बुलन्द दरवाज़ा, भारत के उत्तर प्रदेश प्रांत में आगरा शहर से ४३ किमी दूर फतेहपुर सीकरी नामक स्थान पर स्थित एक दर्शनीय स्मारक है। इसका निर्माण अकबर ने १६०२ में करवाया था। बुलन्द शब्द का अर्थ महान या ऊँचा है। अपने नाम को सार्थक करने वाला यह स्मारक विश्व का सबसे बडा़ प्रवेशद्वार है।[1] हिन्दू और फारसी स्थापत्य कला[2] का अद्भुत उदाहरण होने के कारण इसे "भव्यता के द्वार" नाम से भी जाना जाता है।

अकबर द्वारा गुजरात पर विजय प्राप्त करने की स्मृति में बनवाए गए इस प्रवेशद्वार के पूर्वी तोरण पर फारसी में शिलालेख अंकित हैं जो १६०१ में दक्कन पर अकबर की विजय के अभिलेख हैं। ४२ सीढ़ियों के ऊपर स्थित बुलन्द दरवाज़ा ५३.६३ मीटर ऊँचा और ३५ मीटर चौडा़ है। यह लाल बलुआ पत्थर से बना है जिसे सफेद संगमरमर से सजाया गया है। दरवाजे के आगे और स्‍तंभों पर कुरान की आयतें खुदी हुई हैं। यह दरवाजा एक बड़े आँगन और जामा मस्जिद की ओर खुलता है। समअष्टकोणीय आकार वाला यह दरवाज़ा गुम्बदों और मीनारों से सजा हुआ है।

दरवाजे़ के तोरण पर ईसा मसीह से संबंधित कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं जो इस प्रकार हैं: "मरियम के पुत्र यीशु ने कहा: यह संसार एक पुल के समान है, इस पर से गुज़रो अवश्य, लेकिन इस पर अपना घर मत बना लो। जो एक दिन की आशा रखता है वह चिरकाल तक आशा रख सकता है, जबकि यह संसार घंटे भर के लिये ही टिकता है, इसलिये अपना समय प्रार्थना में बिताओ क्योंकि उसके सिवा सब कुछ अदृश्य है" बुलंद दरवाज़े पर बाइबिल की इन पंक्तियों की उपस्थिति को अकबर को धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक माना जाता है।[3]

महत्वपूर्ण जानकारियाँ[संपादित करें]

चित्र दीर्घा[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "आगरा द सिटी ऑफ़ ताजमहल" (प्रकाशक= ताजसिटी). http://tajcity.blogspot.com. अभिगमन तिथि: २००९. 
  2. "बुलंद दरवाज़ा" (अंग्रेज़ी में) (एचटीएमएल/प्रकाशक=भारतऑनलाइन). http://www.bharatonline.com/uttar-pradesh/travel/fatehpur-sikri/buland-darwaza.html. अभिगमन तिथि: २००९. 
  3. "बुलंद दरवाज़ा" (अंग्रेज़ी में) (एचटीएमएल/प्रकाशक=इंडिप्लेसेज़). http://www.indiaplaces.com/india-monuments/fatehpur-sikri-buland-darwaza.html. अभिगमन तिथि: २००९.