बालेन्दु शर्मा दाधीच

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बालेन्दु शर्मा दाधीच

प्रमुख हिंदी वेब पोर्टल प्रभासाक्षी डॉट कॉम के समूह संपादक, तकनीकविद् और स्तंभकार बालेन्दु शर्मा दाधीच (English: Balendu Sharma Dadhich) सूचना प्रौद्योगिकी और न्यू मीडिया के क्षेत्र में एक सुपरिचित नाम हैं। उनकी गणना हिंदी और तकनीक के बीच अनुकूलता विकसित करने में जुटे हिंदी-सेवियों में होती है। वे भाषायी पृष्ठभूमि जन्य प्रौद्योगिकीय वंचितता (technology deprivation due to linguistic background) और आंकिक विभाजन (digital divide) के विरुद्ध अभियानों में भी सक्रिय हैं।

हिंदी भाषियों के तकनीकी सशक्तीकरण की दिशा में उन्होंने बहुपक्षीय प्रयास किए हैं। ये हिंदी सॉफ्टवेयरों, वेब अनुप्रयोगों आदि के विकास; मुख्यधारा के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में तकनीकी विषयों पर विशद लेखन; शैक्षणिक संस्थानों में तकनीक, हिंदी और मीडिया से जुड़े विषयों पर नियमित व्याख्यानों और कायर्शालाओं में भागीदारी; सॉफ्टवेयर कंपनियों के एप्लीकेशंस के हिंदीकरण अभियानों (लोकलाइजेशन) में सक्रिय योगदान और केंद्र तथा राज्य सरकारों के तकनीकी विभागों और संस्थानों की योजनाओं-परियोजनाओं में भूमिका के रूप में दिखाई देता है। बालेन्दु शर्मा दाधीच ने यूनिकोड, स्थानीयकरण, मानकीकरण, भाषायी तकनीकी विकास आदि क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मौलिक लेखन किया है।

वेब और डेस्कटॉप अनुप्रयोग

श्री दाधीच ने 1999 में कंप्यूटर पर हिंदी में काम करने के लिए 'माध्यम' नामक शब्द संसाधक (वर्ड प्रोसेसर) का विकास कर उसे नि:शुल्क उपलब्ध कराया था। सॉफ्टपीडिया द्वारा '100% स्वच्छ सॉफ्टवेयर' का पुरस्कार पाने वाले इस सॉफ्टवेयर की एक लाख से अधिक प्रतियां डाउनलोड हो चुकी हैं। उन्होंने 'प्रभासाक्षी डॉट कॉम' नामक लोकप्रिय हिंदी वेब पोर्टल का विकास भी किया। श्री दाधीच के अन्य योगदानों में यूनिकोड हिंदी संशोधक, दोतरफा हिंदी फॉन्ट परिवर्तक 'सटीक' आदि प्रमुख हैं। कंप्यूटर पर हिंदी में मानक टाइपिंग सिखाने वाले उनके सॉफ्टवेयर 'स्पर्श' का मार्च 2011 में लंदन में लोकार्पण हुआ है। हिंदी से जुड़े उनके प्रमुख अनुप्रयोग/तकनीकी कार्य इस तरह हैं:

  • हिंदी समाचार पोर्टल 'प्रभासाक्षी डॉट कॉम'
  • यूनिकोड हिंदी वर्ड प्रोसेसर 'माध्यम यूनिकोड प्रो'
  • हिंदी वर्ड प्रोसेसर 'माध्यम' (ड्युअल फॉरमैट) TTF-UNICODE
  • हिंदी वर्ड प्रोसेसर 'माध्यम' (अयूनिकोडित) Classic
  • मानक इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड आधारित यूनिकोड हिंदी टाइपिंग ट्यूटर 'स्पर्श'
  • हिंदी इंटरफ़ेस युक्त फाइल संपीड़न (ज़िप) सॉफ्टवेयर- 'हिंदीज़िप'
  • हिंदी यूनिकोड इनपुट युक्त चित्र संपादन सॉफ्टवेयर- 'छाया'
  • दोतरफा हिंदी फॉन्ट परिवर्तक 'सटीक'
  • विकृत यूनिकोड पाठ संशोधक (ऑनलाइन)
  • यूनिकोड पर जागरूकता के प्रसार हेतु वेबसाइट लोकलाइजेशनलैब्स.कॉम
  • हिंदी ईबुक प्रोत्साहन परियोजना 'ई-प्रकाशक.कॉम' की मेन्टरिंग
  • विंडोज एक्सपी लोकलाइजेशन तथा हेल्प परियोजना में योगदान।
  • माइक्रोसॉफ्ट विज़ुअल स्टूडियो 2008 लोकलाइजेशन (क्लिप) में योगदान आदि।

तकनीकी लेखन / सक्रियता

तकनीकी विषयों पर 'नवभारत टाइम्स', 'हिंदुस्तान', 'जागरण', 'राष्ट्रीय सहारा', 'राजस्थान पत्रिका', 'आज समाज', 'कादम्बिनी', 'शुक्रवार', 'नंदन' आदि में उनके स्थायी स्तंभ और आलेख प्रकाशित होते हैं। सरकारी तथा निजी टेलीविजन चैनलों और रेडियो पर तकनीक से जुड़े कार्यक्रमों में नियमित भागीदारी के साथ-साथ वे न्यू मीडिया पर भी अत्यधिक सक्रिय हैं। वे हिंदी ब्लॉगिंग के प्रारंभिक हस्ताक्षरों में से एक हैं और उनके दो ब्लॉगों- 'वाह मीडिया' (2005) और 'मतांतर' (2008) की विशिष्ट पहचान है।

श्री दाधीच तकनीक और भाषा के समन्वय में निष्णात हैं। उन्होंने अमेरिका, इंग्लैंड, मॉरीशस, जापान और दक्षिण अफ़्रीका सहित 'भाषा और तकनीक' विषयों से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में सक्रिय हिस्सेदारी की है। श्री दाधीच ने विदेश मंत्रालय की ओर से आयोजित आठवें विश्व हिंदी सम्मेलन (2007) के दौरान हिंदी तकनीक को लेकर न्यूयॉर्क में लगाई गई अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के संयोजक की भूमिका निभाई थी और सम्मेलन के वेब पोर्टल का दायित्व भी संभाला था। श्री दाधीच को न्यूयॉर्क (8वें) तथा जोहानीसबर्ग (नौवें) में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलनों के सूचना प्रौद्योगिकी सत्रों के संचालन का गौरव प्राप्त है, जिनमें हिंदी की तकनीकी दुनिया की दिग्गज हस्तियों ने भाग लिया था। जुलाई-अगस्त 2013 में उन्होंने विश्व हिंदी सचिवालय के सौजन्य से आयोजित कार्यक्रमों के तहत दक्षिण अफ़्रीका के डरबन तथा जोहानीसबर्ग शहरों और मॉरीशस में लगभग 500 लोगों को तकनीकी क्षेत्र में हिंदी के प्रयोग के लिए प्रशिक्षित किया।

पुरस्कार एवं मान्यता

  • हिंदी सेवी सम्मान (14 सितंबर 2014 को भोपाल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के हाथों)
  • वैश्विक हिंदी सम्मेलन (मुंबई) में भाषा प्रौद्योगिकी सम्मान (10 सितंबर 2014, गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा के हाथों)
  • संसद भवन में 'राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान' 2013
  • एस राधाकृष्णन स्मृति मीडिया अवार्ड 2012
  • राजीव गांधी एक्सीलेंस अवार्ड (तकनीक) 2011
  • हिंदी अकादमी दिल्ली सरकार का ज्ञान प्रौद्योगिकी पुरस्कार 2010
  • गूगल की ब्लॉग प्रतियोगिता 'है बातों में दम' के विजेताओं में शामिल (2010)
  • माइक्रोसॉफ्ट मोस्ट वेल्युएबल प्रोफेशनल (एमवीपी) 2007-2009
  • रोटरी राजभाषा सम्मान 2009
  • वेब मीडिया के लिए 'न्यूज़पेपर एसोसिएशन ऑफ इंडिया' सम्मान 2009
  • अक्षरम आईटी सम्मान 2008
  • श्रेष्ठ लेखन के लिए खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा विश्व खाद्य दिवस पुरस्कार 1994

बालेन्दु शर्मा दाधीच को राजभाषा हिंदी में कंप्यूटरीय विकास को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित की गई तीन समितियों (2009) का सदस्य बनने का गौरव भी प्राप्त है। इन समितियों ने 1. भारत सरकार के संस्थानों (सीडैक आदि) द्वारा विकसित किए गए हिंदी सॉफ्टवेयरों का मूल्यांकन किया। 2. निजी क्षेत्र द्वारा विकसित किए गए हिंदी सॉफ्टवेयरों की समीक्षा की। 3. सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्र में तकनीकी कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने तथा देश में हिंदी सूचना तकनीक के संदर्भ में जागरूकता बढ़ाने के लिए सुझाव दिए।

पुस्तकें

  • तकनीकी सुलझनें (2013) (बेस्ट सेलर: विमोचन के बाद चार महीने में पहला संस्करण पूरा बिका)
  • मॉरीशसः छोटा भारत (ई-बुक) 2012 (यात्रा संस्मरण) जोहानीसबर्ग में नौवें विश्व हिंदी सम्मेलन के दौरान विदेश राज्यमंत्री प्रणीत कौर द्वारा लोकार्पण।
  • सोशल मीडियाः प्रयोग, प्रभाव और प्रवृत्तियाँ (प्रकाशनाधीन)
  • अनोखा तावीज़ (बच्चों के लिए कहानियाँ)
  • परी की बाँसुरी (बच्चों के लिए कहानियाँ)

पृष्ठभूमि

जयपुर (राजस्थान) में जन्मे श्री दाधीच गुड़गाँव (दिल्ली एनसीआर) में रहते हैं। उन्होंने अपनी शिक्षा जयपुर, कुरुक्षेत्र और दिल्ली में पूरी की। वे हिंदी भाषा, कंप्यूटर विज्ञान, प्रबंधन और पत्रकारिता चारों विषयों में स्नातकोत्तर योग्यता धारी हैं।

वे हिंदुस्तान टाइम्स समूह, इंडियन एक्सप्रेस समूह, सहारा समूह और राजस्थान पत्रिका समूह के मीडिया संस्थानों में कार्य कर चुके हैं। प्रिंट, टेलीविजन, रेडियो और ऑनलाइन मीडिया का व्यावहारिक अनुभव रखने वाले बालेन्दु अपने संपादकीय दायित्वों के तहत राजनैतिक सामाजिक मुद्दों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं। सम्प्रतिः संपादकीय भूमिकाओं के अतिरिक्त, वे मोरारका औद्योगिक घराने में महाप्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी) के पद पर कार्यरत हैं।

बाहरी कडियाँ[संपादित करें]