बाढ़ जिला

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बाढ जिला बिहार के मध्य मे स्थित है। बाढ अभी एक अनुमन्डल है। इसे आन्तरिक जिले का दर्जा प्राप्त है। यह पटना जिले के पूर्वी हिस्से मे पड़ता है। पुरे भारत मे यह एक ऐसा भुभाग है जिसे गंदी राजनीति के कारण एक दिन का जिला घोषित किया गया था। बाढ जिले की जनसंख्या लगभग १६,००,००० तथा बाढ शहर की जनसंख्या लगभग १,०५,००० है। यह गंगा नदी के तट पर बसा हुआ है। इस जिले के उत्तरी भाग मे ऊँचे मैदान तथा दक्षिणी भाग मे तालक्षेत्र (टाल) है।

बाढ शब्द का उच्चारन[संपादित करें]

बाढ शब्द का उच्चारन- "अमरकोश" दृढ, मजबूत और ऊंचे स्वर वाले के लिए बाढ शब्द काम में लेता है। "मुद्राराक्षस" के अनुसार- यकीनन, निश्चय और अवश्य के अर्थ में भी बाढ शब्द का प्रयोग होता है। नाटक में बहुत अच्छा, तथास्तु, हां और अत्यन्त शुभ के अर्थ में बाढ शब्द का प्रयोग देखा जा सकता है। "शिशुपाल वध" में इस शब्द के सुन्दर प्रयोग दिखाई देते हैं।

बाढ शहर के एक छोड़ पर एक शिव जी का मन्दिर है, जो ऊमा नाथ के नाम से प्रसिद्ध है। यह मन्दिर सात-आठ सौ साल पुरानी है। इस मन्दिर में लगी एक मूर्ति वैशाली संग्रहालय में रखी उस मूर्ति से मिलती है जो सात सौ से आठ सौ साल पुरानी बताई जाती है। बाढ शहर के मध्य मे एक दुर्गा मन्दिर है। इस मन्दिर के बारे में लोगो का मानना है कि जो औरत सच्चे मन से यहाँ पूत्र कि इच्छा लेकर आती है, माँ ऊसकी गोद भर देती है। ये मंदिर भी लगभग १५० से २०० साल पुरानी बताई जाती है, जिसका पुनरुद्धार स्थानीय लोगों द्वारा कुछेक वर्ष पूर्व में किया गया था ! एक और प्राचीन मंदिर अलख नाथ है, ये भी गंगा तट पर बसा हुआ एक शिव मंदिर है ! और भी कई मंदिर है जो की महत्वपूर्ण एवं दर्शनीय है !

इतिहास[संपादित करें]

बाढ़ के इतिहास के बारे में कही भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती . लेकिन यह माना जाता है की बख्तियार खिलजी अपने बंगाल अभियान के दौरान बाढ़ में ही अपना डेरा डाला था। तुर्की में विश्राम करने के स्थल को बाढ़ कहा जाता था अतः इस स्थल का नाम बाढ़ पड़ा . ज्ञातव्य है की इसी अभियान के दौरान बख्तियार खिलजी ने नालंदा एवं विक्रमशिला विश्वविद्यालय को ध्वस्त किया था एवं कामरूप (असम) में उसे हर का सामना करना पड़ा था।

भूगोल[संपादित करें]

बाढ़ दक्षिण बिहार में स्थित है। गंगा नदी इसके सीमा को समस्तीपुर से अलग करती है। इसके पूर्व में लखीसराय जिला, पश्चिम में पटना शहर, उत्तर में गंगा नदी एवं समस्तीपुर तथा दक्षिण में नालंदा एवं बरबीघा है। यहाँ की मिटटी दलहन के लिए उपयुक्त है। यहाँ हर तरह की फसल उगाई जाती है।

जलवायु[संपादित करें]

अर्थ-व्यवस्था[संपादित करें]

ग्रामीण अर्थव्यवस्था जहाँ मुख्य रूप से कृषि एवं सब्जी के खेती पे निर्भर है वहीँ शहरी लोग मुख्यतः नौकरी पेशे में हैं ! ४०० वर्ग किलोमीटर में फैला टाल क्षेत्र से केवल एक फसल मिलने के बाबजूद यहाँ के किसान काफी संपन्न होते हैं!

नगर प्रशासन[संपादित करें]

यहाँ अनुमंडल अधिकारी, एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, जिनका कार्यालय कचहरी में हैं ! थाना शहर के बीचोबीच है ! और थाने के पीछे ही नगर परिषद का कार्यालय भी है !

यातायात[संपादित करें]

यातायात के दृष्टिकोण से बाढ़ रेल एवं सड़क दोनों मार्गों से जुड़ा हुआ है, रेलमार्ग भी काफी उपयोगी है और दिल्ली हावड़ा मुख्य लाइन पे है ! ज्यादातर लोग यात्रा के लिए रेलमार्ग का उपयोग करना बेहतर समझते हैं ! अभी एक नया सड़क मार्ग निर्माणाधीन है जो की अथमलगोला के नजदीक जमालपुर के पास से सीधा गंगा के ऊपर से होते हुए महनार (वैशाली) को जोड़ेगी इससे भी लोगों को बहुत फायदा होगा! यहाँ से एक सड़क थाना के नजदीक से शुरू होकर बरबीघा तक जाती है ! राष्ट्रीय उच्च पथ ३० ए स्टेशन से शुरू होकर नदवा, सकसोहरा होते हुए हरनौत होते हुए फतुहा में मिलती है !

खान-पान[संपादित करें]

बिहार के अन्य भागो कि तरह यहां भी दाल-चावल और रोटि-सब्जी मुख्य रुप से खाये जाते है। ताल क्षेत्र होने के कारन दलहन और सत्तु से जुरी खाद्य-पदार्थो कि प्रधानता है। दाल के पराठे (दलपुरी), लिट्टि-चोखा लोग चाव से खाते हैं।

यहाँ की मिठाई "लाइ" आस पास के इलाको में काफी प्रसिद्द है।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

संस्कृति[संपादित करें]

मीडिया[संपादित करें]

मीडिया के दृष्टिकोण से ये पूरा अनुमंडल हमेशा से उपेक्षित रहा है और यहाँ के क्रियाकलापों एवं समस्याओं को कभी उचित स्थान नहीं मिल पाया है, जिस कारण ये अनुमंडल उपेक्षित रहा है !

शिक्षा[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियां[संपादित करें]

यहाँ के सीढ़ी घाट में एक नवनिर्मित शनि मंदिर है। ये मंदिर पुरे भारत वर्ष में अनोखा है। इसका निर्माण शानियंत्र के अनुसार किया गया है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]