बाग की गुफाएँ
बाग गुफाएं, मध्य प्रदेश में धार जिले से ९७ किलोमीटर दूर विन्ध्य पर्वत के दक्षिणी ढलान पर हैं ! कुछ इतिहासकार इन्हें चौथी और पांचवी सदी में निर्मित मानते हैं ! अधिकतर ७ वीं सदी में !
बौद्ध धरम को दर्शाती हुई इन ९ गुफायों में से केवल ५ ही अभी बची हुई हैं ! ये इंदौर और वडोदरा के बीच में बाघिनी नदी के किनारे हैं ! इन गुफाओं का संबंध बौद्ध मत से है। यहां अनेक बौद्ध मठ और मंदिर देखे जा सकते हैं। इन गुफाओं में चैतन्य हॉल में स्तूप हैं और रहने की कोठरी भी बनी हैं जहाँ बोद्ध भिक्षु रहा करते थे.
अजंता और एलोरा गुफाओं की तर्ज पर ही बाघ गुफाएं बनी हुई हैं। इन गुफाओं में बनी प्राचीन चित्रकारी मनुष्य को हैरत में डाल देती है। इन गुफाओं की खोज 1818 में की गई थी। माना जाता है कि दसवीं शताब्दी में बौद्ध धर्म के पतन के बाद इन गुफाओं को मनुष्य ने भुला दिया था और यहां बाघ निवास करने लगे। इसीलिए इन्हें बाघ गुफाओं के नाम से जाना जाता है। बाघ गुफा के कारण ही यहां बसे गांव को बाघ गांव और यहां से बहने वाली नदी को बाघ नदी के नाम से जाना जाता है।
यहाँ बनी पदाम्पनी का चित्र ([पेंटिंग]) अजंता में बनी पदाम्पनी से मिलती जुलती है. बडे अफ़सोस की बात है की हमारे भारतीय इतिहासकार इन प्राचीन स्मारकों पर किताबें नहीं लिखते[?]. ज्यादातर किताबें और दस्तावेज अंग्रजों के द्वारा एकत्र किए हुए हैं ! यह किताब भी एक अंग्रेज ने ही लिखी है :
The Bagh Caves in Gwalior state AUTHOR - Sir John Marshall PUBLICATION - India society, London [year 1927]
बाहरी कड़ियाँ [संपादित करें]
- अपने में इतिहास समेटे बाग की गुफाएँ (सचिन की दुनिया नामक हिन्दी चिट्ठे पर)
- गुफाओं में मौजूद पांडवों का सभागृह