बड़ोदरा

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वडोदरा
—  शहर  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य गुजरात
ज़िला वडोदरा जिला
महापौर श्रीमती ज्योति पंड्या
सांसद
जनसंख्या
घनत्व
१,६४१,५६६ (2001 के अनुसार )
• ९५२
क्षेत्रफल १४८.९५ कि.मी²

Erioll world.svgनिर्देशांक: 22°11′N 73°07′E / 22.18°N 73.12°E / 22.18; 73.12 वडोदरा जिसे पहले बड़ौदा के नाम से जाना जाता था। यह गुजरात प्रान्त का तीसरा सबसे अधिक जनसन्ख्या वाला शहर है। यह एक शहर है जहा का महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय अपने सुंदर स्थापत्य के लिए जाना जाता है। वड़ोदरा गुजरात का एक महत्त्वपूर्ण नगर है। वड़ोदरा शहर, वडोदरा ज़िले का प्रशासनिक मुख्यालय, पूर्वी-मध्य गुजरात राज्य, पश्चिम भारत, अहमदाबाद के दक्षिण-पूर्व में विश्वामित्र नदी के तट पर स्थित है। वडोदरा को बड़ौदा भी कहते हैं। इसका सबसे पुराना उल्लेख 812 ई. के अधिकारदान या राजपत्र में है, जिसमें इसे वादपद्रक बताया गया है। यह अंकोत्तका शहर से संबद्ध बस्ती थी। इस क्षेत्र को जैनियों से छीनने वाले दोर राजपूत राजा चंदन के नाम पर शायद इसे चंदनवाटी के नाम से भी जाना जाता था। समय-समय पर इस शहर के नए नामकरण होते रहे, जैसे वारावती, वातपत्रक, बड़ौदा और 1971 में वडोदरा।

इतिहास[संपादित करें]

इतिहास मे शहर का पहला उल्लेख 812 ई. में इस क्षेत्र में आ कर बसे व्यापारियों के समय से मिलता है। वर्ष ई 1297 यह प्रान्त हिंदू शासन के अधिन हिंदूओ के वर्चस्व मे था। ईसाई यूग के प्रारम्भ मे यह क्षेत्र गुप्तवन्श के साम्राज्य के अधीन था। भयंकर यूध्ध के बाद, इस क्षेत्र पर चालुक्य वंश सत्ता आधिन हुआ. अंत में, इस राज्य पर सोलंकी राजपूतों ने कब्जा कर लिया. इस समय तक मुस्लिम शासन भारत वर्ष मे फैल रहा था, और देख ते हि देखते वडोदरा की सत्ता की बागडोर दिल्ली के सुल्तानों के हाथ आ गइ। वडोदरा पर दिल्ली के सुल्तानों ने एक लंबे समय तक शासन किया, जब तक वे मुगल सम्राटों द्वारा परास्त नहि किए गए। मुगलों की सबसे बड़ी समस्या मराठा शाषक थे जिन्होने ने धीरे धीरे से लेकिन अंततः इस क्षेत्र पर अपना राज्य स्थापित कर दीया, और यह मराठा वन्श गाइकवाड़ (Gaekwads) की राजधानी बन गया। सर सयाजी राव गाइकवाड़ (1875-1939) III, इस वन्श के सबसे सक्षम और लोकप्रिय शासक थे, और उन्हो ने इस क्षेत्र में कई सरकारी और नौकरशाही सुधार किए, हालांकि ब्रिटिश राज का क्षेत्र पर एक बड़ा प्रभाव था। बड़ौदा भारत कि स्वतंत्रता तक एक राजसी राज्य बना रहा। कई अन्य रियासतों की तरह, बड़ौदा राज्य भी 1947 में भारत डोमिनियन मे शामिल हो गया।

विश्वामीत्रि (Vishwamitri) नदी के तट पर स्थित वडोदरा उर्फ बड़ौदा शहर भारत के सबसे बड़े महानगरीय शहरों में अठारहवें नम्बर पर है। वडोदरा शहर वडोदरा जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है और इसे उद्यानो का शहर, औद्योगिक राजधानी और गुजरात के तीसरे सबसे अधिक आबादी वाले शहर से भी जाना जाता है। इसकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के कारण, जिले को संस्कारी (Sanskari) नगरी के रूप में संदर्भित किया जाता है। कई संग्रहालयों और कला दीर्घाओं, उद्योगों की इस आगामी हब और आईटी के साथ पर्यटकों का पसंदीदा स्थल है। राजा चन्दन के शासन के समय मे वडोदरा को चन्द्रावति (Chandravati) के नाम से जाना जाता था और बाद मे विरो कि धरती यानै विराशेत्रा (Virakshetra) या विरावती (Viravati)। विश्वामीत्रि नदी के तट पर बरगद के पेड़ की बहतायत की वजह से वडोदरा को वडपात्रा (Vadpatra) या वडपत्रा (Vadpatra) जाना जाने लगा और यहा से इसके वर्तमान नाम कि उत्पत्ति हूइ।

शिक्षण संस्थान[संपादित करें]

महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय

वडोदरा का लंबा इतिहास इसके कई महलों, द्वारों, उद्यानों और मार्गों से परिलक्षित होता है। यहाँ महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ़ बड़ौदा (1949) तथा अन्य शैक्षणिक व सांस्कृतिक संस्थान हैं, जिनमें इंजीनियरिंग संकाय, मेडिकल कॉलेज वडोदरा होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज, वडोदरा बायोइंफ़ॉर्मेटिक्स सेंटर, कला भवन तथा कई संग्रहालय शामिल हैं।

कलाकृतियाँ[संपादित करें]

लक्ष्मी विलास महल

इस शहर का एक प्रमुख स्थान बड़ौदा संग्रहालय और चित्र दीर्घा है, जिसकी स्थापना बड़ौदा के महाराजा गायकवाड़ ने 1894 में उत्कृष्ट कलाकृतियों के प्रतिनिधि संग्रह के रूप में की थी। इसके भवन का निर्माण 1908 से 1914 के बीच हुआ और औपचारिक रूप से 1921 में दीर्घा का उद्घाटन हुआ। इस संग्रहालय में यूरोपीय चित्र, विशेषकर जॉर्ज रोमने के इंग्लिश रूपचित्र, सर जोशुआ रेनॉल्ड्स तथा सर पीटर लेली की शैलियों की कृतियाँ और भारतीय पुस्तक चित्र, मूर्तिशिल्प, लोक कला, वैज्ञानिक वस्तुएँ व मानव जाति के वर्णन से संबंधित वस्तुएँ प्रदर्शित की गई हैं। यहाँ इतालवी, स्पेनिश, डच और फ्लेमिश कलाकारों की कृतियाँ भी रखी गई हैं।

उद्योग[संपादित करें]

इस शहर में उत्पादित होने वाली विभिन्न प्रकार की वस्तुओं में सूती वस्त्र तथा हथकरघा वस्त्र, रसायन, दियासलाई, मशीनें और फ़र्नीचर शामिल हैं।

परिवहन[संपादित करें]

वडोदरा एक रेल और मार्ग जंक्शन है तथा यहाँ एक हवाई अड्डा भी है।

कृषि[संपादित करें]

वडोदरा ज़िला 7,788 वर्ग किमी में फैला हुआ है, जो नर्मदा नदी (दक्षिण) से माही नदी (उत्तर) तक विस्तृत है। यह लगभग पूर्व बड़ौदा रियासत (गायकवाड़ राज्य के) की राजधानी के क्षेत्र या ज़िले के बराबर ही है। कपास, तंबाकू तथा एरंड की फलियाँ यहाँ की नक़दी फ़सलें हैं। स्थानीय उपयोग और निर्यात के लिए गेहूँ, दलहन, मक्का, चावल, तथा बाग़ानी फ़सलें उगाई जाती हैं।

जनसंख्या[संपादित करें]

2001 की जनगणना के अनुसार वड़ोदरा शहर की जनसंख्या 13,06,035 व ज़िले की कुल जनसंख्या 36,39,775 है।