प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान

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प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान (Institute for Plasma Research (IPR)) भारत में प्लाज्मा से सम्बन्धित अनुसंधान का स्वायत्त संस्थान है। यह गुजरात के गांधीनगर में स्थित है। इस संस्थान को वित्तपोषण (फण्डिंग) मुख्यत: परमाणु उर्जा विभाग से मिलती है।

यह संस्थान मौलिक प्लाज़्मा भौतिकी, चुम्बकीय परिसीमित तापीय प्लाज़्मा तथा औद्योगिक प्रयोग के लिए प्लाज़्मा तकनीकों जैसे प्लाज़्मा विज्ञान के विभिन्न पक्षों पर अनुसंधान करने वाली एक स्वायत भौतिकी अनुसंधान संस्थान है। मौलिक अनुसंधान के अतिरिक्त संस्थान में अभी स्थिर अवस्था सुपरंडिक्टिंग टोकामॉक (SST-1) के निर्माण की प्रक्रिया प्रगति पर है।

प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान देश का एकमात्र संस्थान है जो पदार्थ की प्लाज्मा अवस्था के विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं के अध्ययन एवं प्लाज्मा पर आधारित तकनीकों के विकास के लिए सम्पूर्ण रूप से समर्पित है। इस संस्थान की स्थापना भारत सरकार के वैज्ञानिक एवं तकनीकी विभाग द्वारा सन 1986 में की गई थी, लेकिन सन 1996 से यह परमाणु उर्जा विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में एक स्वायत संस्थान के रूप में कार्यरत है। ईटर- अंतर्राष्टीय ताप नाभिकीय प्रायोगिक रिएक्टर, एक अंतर्राष्टीय संगठन द्वारा निर्मित किया जा रहा है। इस संगठन के सहयोगी सदस्य देश यूरोपीय संघ, चीन, जापान, भारत, सोवियत संघ, कोरिया गणराज्य तथा संयुक्त राज्य अमेरिका हैं। ईटर द्वारा नाभिकीय संलयन से उर्जा के नये स्त्रोत की खोज की जायेगी। इसका मुख्य उद्देश्य आरोपित उर्जा से लगभग दस गुना उर्जा उत्पन करना है। भारत ईटर मशीन निर्माण और संचालन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। भारतीय प्लाज्मा परिषद एवं राष्टीय संलयन कार्यक्रम के तत्वावधान में प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान, गांधीनगर में आयोजित इस सम्मेलन का लक्ष्य एकदम स्पष्ट था कि परमाणु उर्जा विभाग की विभिन्न इकाइयों एवं भारत के अन्य प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को अपने विचार हिन्दी में प्रकट करने के लिए मंच प्रदान करना था जो सफल रहा। यह सम्मेलन निश्चित रूप से प्लाज्मा संस्थान के वैज्ञानिको को दीर्घकालीन संयुक्त उद्यम तथा नये वैज्ञानिक सहयोग स्थापित करने को प्रेरित करेगा।

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