प्रेशर कुकर
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ऐसा कोई भी वर्तन जिसमें भोजन पकाने के लिये वायुमंडलीय दाब से अधिक दाब उत्पन्न करके खाना बनाने की व्यवस्था हो उसे प्रेसर कुकर या दाबित रसोइया कहते हैं। प्रेसर कूकर में भोजन जल्दी बन जाता है क्योंकि अधिक दाब होने के कारण पानी १०० डिग्री सेल्सिअस से भी अधिक ताप तक गरम किया जा सकता है क्योंकि अधिक दाब पर पानी का क्वथनांक अधिक होता है।
[संपादित करें] लाभ
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| यह एक शृंखला है जो भारतीय व्यंजनों के बारे में है। |
| बनाने की विधियाँ एवं सामग्री |
| क्षेत्रीय व्यंजन |
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पंजाबी • उत्तर प्रदेश • |
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केरल • तमिल • |
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गोआ •गुजराती •मराठी • |
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इंडो-चाइनीज •फास्ट-फूड · |
| सामग्री एवं प्रकार |
| यह भी देखें: |
| संदूक संपादन करें |
- भोजन पकाने में कम समय लगता है (समय की बचत)
- कम जल का खर्च
- ईंधन कम खर्च होता है।
- अधिक ताप पर भोजन बनने के कारण सभी कीटाणु मारे जाते हैं।
- प्रेसर कुकर एक कारगर स्टेरिलाइजर (कीटाणुनाशी) के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
- प्रेसर कुकर से खाना पकाने में ताप का वितरण समान रूप से होता है। अतः पूरा भोजन समान रूप से पकता है।
- अधिक ऊंचाई वाले स्थानों (जैसे पहाड़ों पर) इससे बहुत लाभ मिलता है क्योंकि बिना दाब के वहाँ भोजन पकाने पर पानी १०० डिग्री सेल्सिअस से भी कम ताप पर उबलने लगता है जिससे भोजन पकाने में अधिक समय एवं असुविधा का सामना करना पड़ता है।
- बर्तन धोने की तकलीफ् बी कम होती है क्योंकि बर्तन/खाना जलता नहीं है।
- प्रेसर कुकर का ढक्कन बहुत टाइट बन्द होता है। इसलिये इसमें रखकर भोजन को कहीं ले जाने में भी सुविधा होती है। भोजन या इसका रस बाहर नहीं आता।
- जरूरत पडने पर इसका ढक्कन हटाकर सामान्य तरीके से भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।
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